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मिर्चपुर कांड:258 विस्थापित परिवारों को प्रशासन देगा 456.56 करोड़ की 25,850 वर्ग गज जमीन

हिसार8 महीने पहले
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  • लघुसचिवालय के काॅन्फ्रेंस हाॅल में सीएम के पॉलिटिकल सचिव वितरित करेंगे कागज

मिर्चपुर कांड के विस्थापितों के लिए घाेषणाओं के 8 साल बाद धरातल पर कुछ हुआ। ढंढूर गांव में मिर्चपुर के 258 परिवारों को पुनर्वास के लिए 456.56 करोड़ रुपये की 25,850 वर्ग गज जमीन पर प्लॉट अलाट किए गए। इस जमीन पर दीन दयालपुराम नाम से काॅलोनी बनाई गई। इस जमीन पर प्रत्येक परिवार के लिए प्लाॅट अलाट किया गया। प्लाॅटों पर पजेशन देने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल के राजनीतिक सचिव कृष्ण कुमार बेदी देर रात हिसार पहुंच गए। वे आज सुबह 11 बजे लघु सचिवालय के काॅन्फ्रेंस हॉल में विस्थापितों को पजेशन के कागजात वितरित करेंगे।

मिर्चपुर पीड़ित और विस्थापित अधिकांश कैमरी रोड पर वेदपाल तंवर फार्म हाउस पर रह रहे थे। कुछ परिवार गांव ही बसे थे। इन परिवारों को ढंढूर गांव के पास दीन दयाल पुरम काॅलोनी में प्लाट उपलब्ध कराने के लिए दो साल पहले सरकार के मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ही आए थे। प्रत्येक परिवार को उतनी ही जमीन मिलेगी जितनी मिर्चपुर में घर की जमीन थी।

बहुचर्चित मिर्चपुर कांड 21 अप्रैल 2010 को हुआ था। भीड़ ने वाल्मीकि बस्ती में तोड़फोड़, मारपीट और आगजनी की थी। आगजनी में करीब 55 साल के तारा चंद और उनकी दिव्यांग बेटी 19 वर्षीय सुमन की मौत हो गई थी। 18 मकान जल गए और करीब 50 लोग घायल हुए थे। घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने 130 लोगों पर मामला दर्ज किया।

मामले की तफ्तीश में 27 लोगों के नाम कट गए और 103 रह गए, जिनमें पांच नाबालिग थे। तत्कालीन थाना प्रभारी को भी आरोपी बनाया गया। 2012 की शुरुआत में मिर्चपुर से ग्रामीणों का पलायन शुरू हो गया। सरकार और प्रशासन ने पलायन रोकने के तमाम प्रयास किए। मिर्चपुर में पुलिस चौकी तक बनाई गई। हालात सामान्य होने के बावजूद समुदाय के कुछ लोग वापस लौटने के लिए तैयार नहीं है। बड़ी संख्या में वाल्मीकि परिवार हिसार में तंवर फार्म हाउस में रह रहे हैं। कुछ आदमपुर और कुछ पंजाब चले गए हैं।

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