डोर-टू-डोर टीकाकरण:आशा वर्कर्स को मिलेगा कोविड कार्य के बदले मानदेय, डोर-टू-डोर लोगों को टीका लगवाने के लिए करने लगीं प्रेरित

हिसारएक महीने पहले
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कोविड से बचाव को टीकाकरण का ग्राफ बढ़ाने को जगी आशा - Dainik Bhaskar
कोविड से बचाव को टीकाकरण का ग्राफ बढ़ाने को जगी आशा

कोरोना से बचाव के टीकों का ग्राफ बढ़ाने के लिए आशा वर्कर फिर मैदान में उतर चुकी हैं। डोर-टू-डोर जाकर लोगों को टीका लगाने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है। दरअसल, इन्हें कोविड कार्य के बदले अतिरिक्त मानदेय मिलता था। कोविड केस नहीं होने पर एनएचएम ने मानदेय बंद कर दिया था। आशा वर्करों ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कोविड कार्यों का बहिष्कार किया था।

उन्होंने फैसला लिया था कि जब तक मानदेय नहीं देंगे, काम नहीं करेंगे। इससे कोविड टीकाकरण अभियान को झटका लगा था। यह देख सोमवार को एनएचएम एमडी ने आशा वर्करों की कोविड कार्य के बदले मानदेय देने की मांग को स्वीकार कर लिया। इस संबंध में प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी करके दिशा-निर्देश दिए हैं। अब आशा वर्करों को एक हजार रूपये और आशा फैसिलिटेटर को 500 रुपए मानदेय मिलेगा।

अक्टूबर से मार्च 2022 तक मानदेय दिया जाएगा

एनएचएम के एमडी द्वारा जारी पत्र अनुसार अक्टूबर 2021 से मार्च 2022 तक कोविड कार्य के बदले आशा वर्करों को मानदेय दिया जाएगा। इसका सीधा लाभ हिसार में कार्यरत करीब 1300 प्लस सहित प्रदेश के सभी जिलों की आशा वर्करों को मिलेगा। ऐसे में आशा वर्करों की ताकत से डोर टू डोर टीकाकरण अभियान में गति लाने का प्रयास शुरू हो गया है।

हमारी 2 मांग लंबित हैं : प्रधान

आशा वर्कर एसो. की प्रधान सीमा ने बताया कि हमारी एक मांग पूरी हुई है लेकिन 2 और मांग लंबित हैं। एक तो हमें कर्मचारी का दर्जा मिले और दूसरा हमें सातवें वेतन आयोग से जोड़ा जाएगा। आशा वर्करों ने कोविड कार्य शुरू कर दिया है लेकिन बाकी मांगों को लेकर 17 दिसंबर को मीटिंग करके उन्हें भी पूरा करवाने के लिए रणनीति तैयार करेंगे।

हमारे पास डोज की कमी नहीं है, लोग टीकाकरण जरूर करवाएं : डॉ. तरूण

हमारे पास डोज की कोई कमी नहीं है। 18 प्लस उम्र के लोग आकर टीका जरूर लगवाएं। ज्यादा कैंप लगा रहे हैं जिसमें लोग कम पहुंच रहे हैं। इस दौरान आखिरी समय में ओपन वॉयल में कुछ डोज बच जाती हैं। वैक्सीन वेस्टेज रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं। आशा वर्करों को कोविड कार्य के बदले मानदेय मिलेगा।'' -डॉ. तरूण कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन।

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