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  • Avtar Singh, A Resident Of Panniwala Mota Of Sirsa, Made A New Record, Topped Khardungla With A Bicycle

17853 फीट की ऊंचाई पर चलाई साइकिल:8 दिन में रोहतांग से होते हुए पूरा किया 400km का सफर; पहाड़ और बर्फीले रास्ते भी नहीं डिगा पाए हौसला, खारदूंगला टॉप को फतह कर बनाया रिकॉर्ड

हिसार2 दिन पहले
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21 साल के अवतार सिंह ने 17853 फीट की ऊंचाई पर साइकिल चलाकर खारदूंगला टॉप फतेह किया। अवतार ने 8 दिन में 400 किलोमीटर का सफर तय कर अपना नाम यूरोपियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया है। वो सिरसा जिले के गांव पन्नीवाला के रहने वाले हैं और BA की पढ़ाई कर रहे हैं।

अवतार सिंह ने बताया कि वो शौक के लिए साइकिल चलाते हैं। लेकिन लेह-लद्दाख घूमने गए तो उन्हें वहां साइकिल चलाने का मन किया। फिर उनके दिल में ख्याल आया कि क्यों न कुछ अलग किया जाए। बस इसी खुराफात में पहाड़ी और बर्फीले रास्ते पर 8 दिन तक साइकिल चलाकर रोहतांग के पास से गुजरते हुए 400 किलोमीटर लंबा सफर पूरा किया। तय किया और खारदूंगला टॉप फतेह कर लिया।

खारदूंगला टॉप फतेह करने वाले 21 साल के अवतार सिंह।
खारदूंगला टॉप फतेह करने वाले 21 साल के अवतार सिंह।

अगला लक्ष्य सियाचिन ग्लेशियर
अवतार सिंह ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य सियाचिन ग्लेशियर तक साइकिल चलाकर नया वर्ल्ड रिकार्ड कायम करना है। वैसे रोहतांग के पास से गुजरते हुए खारदूंगला टॉप तक साइकिल से पहुंचने वाला मैं पहला यात्री हूं। यूरोपियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने प्रमाण पत्र भी जारी किया है। वहीं सफर के दौरान ज्यादा ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी होने की समस्या आती है। कई यात्री तो रास्ते से ही लौट गए थे।

अवतार ने बताया कि 14 हजार फीट की ऊंचाई पर जाने के बाद बर्फबारी और खराब रास्ते के कारण उसका आगे बढ़ पाना मुश्किल होता गया। उसने हार नहीं मानी और आगे बढ़ता रहा। एक बार तो वह साइकिल समेत नीचे भी गिर गया, जिसके कारण उसको चोट भी आई। ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए वह कपूर को जलाकर सांस लेता था, ताकि थोड़ी राहत मिल सके।

पहाड़ी रास्ते से गुजरते हुए अवतार सिंह
पहाड़ी रास्ते से गुजरते हुए अवतार सिंह

UPSC की तैयारी कर रहे हैं अवतार सिंह
सिरसा की चौधरी देवी लाल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे अवतार सिंह UPSC की तैयारी भी कर रहे हैं। उनके पिताजी बलराज सिंह गांव पन्नीवाला मोटा में ही खेतीबाड़ी करते हैं। उसे साइकिलिंग में आगे बढ़ने का सुझाव रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल पी के रेड्‌डी ने दिया था। देहरादून में UPSC की तैयारी के दौरान उनसे मुलाकात हुई थी।

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