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धूम्रपान, तंबाकू और गुटखा सेवन से होती है इम्युनिटी वीक:कोरोना का सीधा अटैक फेफड़ों पर, इसलिए इन्हें बीड़ी, सिगरेट व हुक्का गुड़गुड़ाकर और नुकसान न पहुंचाएंं

हिसार23 दिन पहले
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  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस आज कोरोना रोगी न करें धूम्रपान और न चबाएं तंबाकू-गुटखा

धूम्रपान एवं तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह चेतावनी हर बीड़ी, सिगरेट, गुटखा व तंबाकू के पाउच पर लिखी होती है। फिर भी लोग इनका सेवन करने से नहीं कतराते हैं, जबकि पता है कि ये उत्पाद मौत के मुंह तक खींचकर ले जाते हैं।

शौक व लत के चक्कर में लोग अपनी जीवन खतरे में डाल रहे हैं। पर, इन्हें पहले से ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। इन्हें कैंसर के अलावा कोरोना संक्रमण जकड़ सकता है। ऐसा इसलिए कि इन उत्पादों के सेवन से इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

वहीं, कोरोना का सीधा अटैक लंग्स यानी फेफड़ों को डैमेज करता है। धूम्रपान के दौरान बीड़ी, सिगरेट व हुक्का का धुआं भी फेफड़ों के साथ नाक के अंदरुनी भाग निकोजा को नुकसान पहुंचाता है। इससे संक्रमण का फेफड़ों तक पहुंचना और आसान होता है।

विशेषकर उन लोगों को तंबाकू उत्पादों का सेवन त्याग देना चाहिए जोकि कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। बता दें कि हिसार में अनुमानित औसत रोज करीब 5 लाख रुपये की बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू उत्पादों की बिक्री होती है।

डॉ. अजय चुघ, फिजिशियन, सिविल अस्पतालतंबाकू के धुएं से नाक का निकोजा खराब होने से संक्रमण का खतरा और अधिक

1. बीड़ी-सिगरेट का धुआं मुंह से होकर फेफड़ों व नाक से बाहर आता है। इससे नाक का अंदरुनी हिस्सा निकोजा खराब होता है। मुंह व नाक से कोरोना संक्रमण शरीर में प्रवेश करके फेफड़ों को डैमेज करता है। पहले धूम्रपान के धुएं से डैमेज फेफड़े और ज्यादा खराब हो जाते हैं।

2. यदि बीड़ी, सिगरेट या हुक्का का सेवन करते हाेंगे और कोरोना संक्रमित हो चुके हैं तो इन्हें त्याग दें। विशेषकर वे लोग जोकि कोरोना संक्रमित थे और आईसीयू में वेंटिलेटर पर काफी दिनों तक रहेे थे। लंबे समय तक फेफड़े रिकवर होने में समय लग सकता है। इस बीच धूम्रपान अपनी सांसों को उखाड़ना साबित होगा।

3. ऑक्सीजन सपाेर्ट वाले कोरोना संक्रमितों के डैमेज फेफड़े ठीक हो सकते हैं अगर सिकुड़ न गए हों। इन्हें भी धूम्रपान से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि पहले से फेफड़ों की पंपिंग या श्वास क्षमता कम है।

4. फेफड़े जितने ज्यादा डैमेज होंगे उतना ही ज्यादा सांस लेने में दिक्कत बढ़ेगी। शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होगा, जिससे जान पर बन आ सकती है। इसलिए तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं छोड़ने वाले लोगों के लिए कोरोना भी घातक साबित हो सकता है।

डॉ. बंसीलाल, डेंटल सर्जन, सिविल अस्पताल
अगर 15 दिन तक मुंह में जख्म तो डेंटल सर्जन की सलाह ले इलाज करवाएं

गुटखा या तंबाकू का लगातार सेवन से मुंह का कैंसर संभव है। यह कैंसर शरीर के दूसरे अंगों को प्रभावित करती है। अन्य रोगियों की तुलना में मुंह के कैंसर में जान बचने की संभावना कम है। मुंह के अंदर फंगस है तो उसका समय रहते इलाज जरूर करवाना चाहिए।

अगर 15 दिन तक मुंह में जख्म है तो यह कैंसर की पहली स्टेज है। इसकी रोकथाम के लिए बिना वक्त गंवाए डेंटल सर्जन की सलाह लेकर इलाज करवाएं। शराब सेवन के साथ धूम्रपान बेहद खतरनाक होता है। इससे फेफड़ों व शरीर पर दोहरी घातक मार संभव है।

ये भी जानिए.. नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर है प्रतिबंध

1. तंबाकू सेवन को लेकर कोटपा एक्ट लागू है। इसके तहत नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचना या उनसे उत्पाद बिकवाना, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने, शिक्षण संस्थान के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचने व तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर प्रतिबंध है। इन आदेशों की उल्लंघना पर जुर्माने व जेल भेजने का प्रावधान है।

2. तंबाकू उत्पादों में 4 हजार जहरीले तत्व होते हैं, जोकि बीमारी का कारण बन सकते हैं। बीमारी के साथ दर्दनाक मौत का सामना करना पड़ सकता है। बालों का झड़ना, मोतियाबिंद, दांतों में सड़न, फेफड़ों व मुंह का कैंसर, पेट में अल्सर, बदरंग अंगुलियांं, विकृत शुक्राणु व गैंगरीन जैसी घातक बीमारियां भी चपेट में ले सकती हैं। इसलिए नेशनल तंबाकू क्वीट लाइन 1800112356 है, जिस पर संपर्क करके तंबाकू उत्पादों के सेवन की लत से निजात पा सकते हैं।

3. दुनिया भर में भारत तंबाकू उत्पाद बनाने में तीसरे नंबर और उत्पाद का सेवन करने में दूसरे स्थान पर है। देश में सालना 10 लाख लोग जान गंवाते हैं। 2500 मौतें रोजाना होती हैं मगर 5500 नये यंग्स्टर्स तंबाकू का सेवन करने को तैयार होते हैं। 50 फीसद पुरुषों व 25 फीसद महिलाओं को कैंसर जकड़ता है। 40 फीसद टीबी से होने वाली मौतों के लिए धूम्रपान जिम्मेदार है।

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