राईट टू एजुकेशन का मामला:शिक्षा निदेशालय नेे बकाया राशि की जानकारी काे दाेबारा अपलाेड करने को ओपन किया पाेर्टल

हिसार13 दिन पहले
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  • नियम 134 ए में निजी स्कूलाें को 2015 से लेकर 2021 तक की जानकारी पाेर्टल पर अपलाेड करनी हाेगी

नियम 134 ए में निजी स्कूल संचालकाें द्वारा बच्चाें काे दाखिला न देने का निदेशालय द्वारा समय से उनकी फीस भुगतान न किए जाने का कारण माना जा रहा है। इके चलते निजी स्कूल संचालक दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। वहीं शिक्षा निदेशालय स्कूल संचालकाें से उनकी पिछले छह साल की बकाया राशि की जानकारी काे दाेबारा अपलाेड करने के लिए पाेर्टल अाेपन किया है। अब 2015 से लेकर 2021 सत्र तक की जानकारी स्कूलाें काे पाेर्टल पर अपलाेड करनी हाेगी। इसमें उन्हें यह बताना हाेगा कि किस सत्र में उन्हाेंने कितने बच्चाें काे दाखिला दिया है। उनकी कितनी राशि बाकी है। दूसरी अाेर निदेशालय ने सत्र 2020-2021 में निजी स्कूलाें में 134 ए तहत पढ़ने वाले 95 स्कूलाें में एक कराेड़ पांच लाख चाैतीस हजार छह साै राशि डालने अाैर सभी स्कूलाें के खाता नंबर अादि मंगवाने लिए डीईअाे अाैर डीईईओ काे निर्देश दिए हैं।
िजी स्कूल अपडेट नहीं कर रहे जानकारी
बीईअाे वन प्रदीप नरवाल ने बताया कि अादेशाें के अनुसार उन्हाेंने अपने ब्लाॅक स्तर पर सभी स्कूल संचालकाें काे बकाया राशि के लिए बैंक खाता नंबर, काेड, बच्चाें की संख्या अादि मांगी है। मगर कुछ स्कूलाें ने अभी तक भी किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी है। स्कूल संचालक अपना ढीला रवैया अपना रहे हैं अाैर वह 134 ए के तहत हाे रहे दाखिलाें काे भी एमअाइएस पाेर्ट पर अपडेट नहीं कर रहे हैं। जिसे यह पता नहीं चल पा रहा है कि राेज कितने दाखिले हाे रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि 7 जनवरी के बाद निदेशालय के द्वारा सेकेंड ड्रा का शेड्यूल जारी किया जाएगा। जाे बच्चे दाखिला लेने से वंचित रह चुके हैं, उन्हें दूसरे स्कूलाें में दाखिला दिया जाएगा।
अाज दाखिला लेने के लिए अंतिम माैका
जारी शेड्यूल के मुताबिक 134 ए के तहत दाखिला लेने के लिए बच्चाें के पास आखिरी माैका है। पिछले 22 दिनाें से चल रही दाखिला प्रक्रिया में 3280 सीटाें पर केवल अभी तक 476 ही दाखिले हाे पाए हैं। जिसकाे लेकर अभिभावकाें काे अपने बच्चाें के भविष्य की चिंता सता रही है।

शिक्षा निदेशालय ने पिछले 6 साल से प्रदेशभर के निजी स्कूलाें काे केवल 70 कराेड़ रुपए की राशि दी है अाैर निदेशालय के पास 700 कराेड़ की राशि बकाया है। इसके साथ अभी तक 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियाें की फीस निर्धारित नहीं की जा सकी है। जिसकी वजह से यह परेशानियां आ रही हैं। यदि निदेशालय 134 ए के बच्चाें का खर्च उठा नहीं सकता है ताे वह इस नियम काे खत्म कर दे अाैर अारटीई काे लागू कर दे। जिससे गरीब बच्चाें काे लाभ मिल सकेगा।
- सत्यवान कुंडू, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ।

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