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HAU हिसार में किसान मेला:आईसीएआर महानिदेशक ने हरियाणा में 70% पानी बेकार जाने पर जताई चिंता, कहा- पानी की कमी से राज्य में 30% तक घट जाएगा खेती उत्पादन

हिसारएक महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
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कृषि विश्वविद्यालय हिसार में बुधवार से आगामी रबी फसली सीजन को लेकर दो दिवसीय किसान मेला शुरू हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने एचएयू में कृषि मेले के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि हरियाणा जैसे प्रदेश में 70 प्रतिशत पानी बेकार बहकर चला जाता है। इतनी ज्यादा मात्रा में पानी का बेकार जाना चिंता का विषय है। पानी की लगातार बढ़ती खपत के कारण कृषि क्षेत्र के लिए मात्रा घटी है। गेहूं-धान फसल-चक्र वाले क्षेत्रों में भूजल के अति दोहन के कारण भी जलस्तर निरंतर गिरता जा रहा है। इसलिए कृषि के लिए जल की उपलब्धता मुख्य समस्या के रूप में उभरकर आ रही है। प्राकृतिक संसाधनों का दोहन इसी तरह जारी रहा तो हरियाणा में आने वाले समय में सिंचाई तो दूर की बात, लोगों को पीने के लिए साफ पानी की भारी कमी हो सकती है। इस कारण कृषि उत्पादन में 30 प्रतिशत कमी की सम्भावना है जो बेहद चिंतनीय है। साल में दो बार आयोजित होने वाला यह मेला पिछले दो साल से कोरोना के कारण आयोजित नहीं हो पाया था। इस बार मेला कोरोना नियमों का पालन करते हुए फिर से शुरू किया गया है। मेले में किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है। प्रत्येक जिले से एक-एक प्रगतिशील किसान को सम्मानित किया जाएगा।

पानी बचाने के लिए किसान अपनाएं आधुनिक तकनीक
एचएयू के वीसी बीआर कम्बोज ने कहा कि जीवन को बचाने के लिए हमें जल संसाधनों का बेहतर प्रयोग, वाटरशेड विकास, वर्षा जल संचय तथा उन्नत तकनीकों को अपनाकर उचित प्रबंध करने की आवश्यकता है। बूंद-बूंद पानी का सदुपयोग करें तथा ऐसा करने के लिए भूमिगत पाइप लाइन, टपका सिंचाई तथा फव्वारा सिंचाई जैसी पद्धतियां अपनाएं। इजरायल जैसे छोटे देश के प्राकृतिक संसाधन कृषि के अनुरूप नहीं हैं फिर भी यह देश विश्व में आधुनिक कृषि तकनीकों के मामलों में सबसे आगे है। पानी के सदुपयोग के लिए हमारे किसानों को भी इजरायल में विकसित टपका व अन्य सिंचाई संबंधी तकनीकों को अपनाना होगा।
प्रगतिशील किसानों की स्टॉल आकर्षण का केंद्र
एचएयू, लुवास, एमएचएयू करनाल और बाहरी कंपनियों ने कई स्टाल लगाई हैं। इनमें विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों, आधुनिक तकनीकों सहित आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी किसानों को दी गई। इस दौरान मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मुर्गी पालन व मछली पालन से जुड़ी प्रदर्शनी किसानों के आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले में सौर उर्जा से जुड़े नए-नए यंत्रों को किसानों ने काफी सराहा और पसंद किया। बैटरी से चलने वाला छोटा ट्रैक्टर, सोलर ट्राली और बैटरी चलित स्प्रेयर बाइक भी किसानों ने पसंद किया।

जल संरक्षण थीम
वहीं इस बार ऑफलाइन माध्यम से होने वाले इस कृषि मेले(रबी) की थीम जल संरक्षण है। मेले का आयोजन विश्वविद्यालय के गेट नंबर तीन के सामने बालसमंद रोड पर मेला ग्राउंड में किया गया है। मेले के शुभारंभ अवसर पर कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र मुख्यातिथि होंगे, जबकि लाला लाजपतराय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डॉ. गुरदयाल सिंह विशिष्ट अतिथि होंगे। एचएयू एवं गुरू जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज अध्यक्षता करेंगे।

इन किसानों को मिलेगा सम्मान
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा ने बताया कि सम्मानित होने वाले किसानों में अंबाला जिले के गांव हमीदपुर से जसबीर सिंह, बावल के गांव धारूहेड़ा से संजय यादव, भिवानी के गांव से कुसुम लत्ता, फरीदाबाद के गांव ताजुपुर से लखनपाल, फतेहाबाद के गांव चंद्रावल से सूरजभान, झज्जर के गांव ससरोली से मंजू पुनिया, जीन्द के गांव धतरथ से रामपाल, कैथल के गांव गुहना से रणधीर सिंह, करनाल के गांव महमूदपुर से दर्शन खोखर, कुरूक्षेत्र के गांव बरना से गुरशरन सिंह, मंडकौला के गांव बाधा से ओमबीर डागर, महेन्द्रगढ़ के गांव गादड़वास से संजय चौधरी, पानीपत के गांव जलालपुर से दिलबाग सिंह, पंचकूला के गांव नागल से जीत सिंह, रोहतक के गांव गढ़ी से आशीष, सदलपुर के गांव खांडा खेड़ी से विक्रम सिंह, सिरसा के गांव झोरडऩाली से दीपक कुमार, सोनीपत के गांव पलरी से विनोद कुमार ओर यमुनानगर के गांव डोहली से वैगीश काम्बोज शामिल हैं।

कमेटियां देंगी किसानों के सवालों के जवाब
मेले के दौरान आने वाले किसानों की खेतीबाड़ी संबंधी सभी समस्याओं के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों की कमेटियों का गठन कर दिया गया है। वे किसानों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देंगे और फसलों, बीजों, किस्मों व अन्य सभी प्रकार की जानकारी मुहैया करवाएंगे। इसके अलावा मेले में कृषि संबंधी व कृषि औद्योगिकी की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों व तकनीकों की जानकारी मिल सके। साथ ही विश्वविद्यालय के सभी विभाग प्रदर्शनी लगाएंगे।

बीज खरीद भी सकेंगे किसान
मेला ग्राउंड के प्रवेश द्वार स्थित बीज बिक्री केंद्र पर 9 हजार क्विंटल उच्च क्वालिटी के बीजों की बिक्री की जाएगी। यहां गेहूं की किस्मों डब्ल्यूएच-711, डब्ल्यूएच-1105, डब्ल्यूएच-1124, डब्ल्यूएच-1142, डब्ल्यूएच-1184, सी-306, पीबीडबल्यू-725, एचडी-2967, एचडी-3086, एचडी-3226, डीबीडब्ल्यू-303, डीबीडब्ल्यू-187 का बीज उपलब्ध है। जौ की किस्मों बीएच-393, बीएच-946 और सरसों की किस्मों आरएच-30, आरएच-725, आरएच-749, आरएच-761 और आरएच-406 का बीज उपलब्ध रहेगा। चने की किस्मों एचसी-1, एचसी-5, एचसी-7, सीएसजे-515 और सीएनजी-1581, बरसीम का एचबी-1, मास्कवी, एचबी-2 और जई का एचजे-8 व केंट उपलब्ध होगा। सब्ज्यिों में गाजर, मूली, टमाटर, पालक, बेंगन, मटर, मेथी, धनिया, प्याज, शलजम का बीज उपलब्ध रहेगा।

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