एचएयू के वैज्ञानिक किसानाें काे दे रहे टिप्स:वानिकी पाैधे उगाने के लिए चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल न करें किसान

हिसार6 महीने पहलेलेखक: महबूब अली
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वानिकी पाैधे इमारती शीशम, कीकर, नीम, सफेदा, पाेपुलर, सांगवान, जामुन, पीपल, बड़, अर्जुन ट्री, सहजना काे उगाने के लिए चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि मिट्टी भूरभूरी, रेतीली व उपजाऊ हाेनी चाहिए। एचएयू के वैज्ञानिकाें की जांच में पुष्टि हुई है कि चिकनी मिट्टी में वानिकी पाैधे अधिक विकास नहीं कर पाते है। इस मि‌ट्टी में जहां वायु का प्रवेश, पानी की निकासी सही से नहीं हाे पाती है।

वहीं गर्मी के माैसम में मिट्ठी में दरारें भी पड़नी लगती है। एचएयू के वैज्ञानिक किसानाें काे वानिकी पाैधे लगाने की तकनीक के बारे में ऑनलाइन टिप्स दे रहे हैं। एचएयू के कृषि विज्ञान केंद्र के डा. अशाेक कुमार देशवाल, जग नारायण यादव व राजेंद्र कुमार ने बताया कि प्राकृतिक रुप से यदि कोई पौधा काटने के बाद नही उगता है तो पौधे बीज द्वारा या कलमों की सीधी रोपाई कर उगा सकते हैं।

अच्छी पौध के लिए भूमि और बिजाई तकनीक का रखें ध्यान

  • स्थान: वानिकी पौधशाला का क्षेत्र वृक्षारोपण वाले क्षेत्र के मध्य होना चाहिए। पौधशाला ऐसे स्थान पर हो जहां सुगमता से मजदूर की आवश्यकता पूरी हो सके। पौधशाला के स्थान पर अच्छी सिंचाई की सुविधा होनी चाहिए।
  • भूमि: पौधशाला के लिए भुरभुरी व रेतीली मिट्‌टी चाहिए। पौधशाला बनाने में चिकनी मिट्टी प्रयोग करें।
  • बिजाई: पौधशालाओं में बीजों या कलमों को क्यारियों में बीजना चाहिए। बिजाई की दूरी 5 सेमी हो। यदि बीज नजदीक बोए गए हों तो अंकुरित होने के बाद ज्यादा पौधों को दूसरी क्यारी में प्रत्यारोपित करें।
  • पॉलीथिन की थैलियों में बिजाई: बीज लगाने के लिए 200 गज की व 22.5×12.5 सेमी की पॉलीथिन में मिट्टी, गोबर खाद व रेत के मिश्रण में बिजाई करें।
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