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संक्रमण तोड़ रहा रिकॉर्ड:पहले गर्भ में बच्चे की मौत और अब मां ने तोड़ा दम, अग्रोहा में पिता-पुत्र की मृत्यु, बेड के इंतजार में बिगड़ रही हालत

हिसार9 दिन पहले
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  • कोरोना काल की एक दिन में अब तक की सबसे ज्यादा 32 मौतें, अकेले अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे में 15 जानें गईं
  • बढ़ते रोगियों के आंकड़ों के आगे संसाधन पड़ने लगे कम, मंगलवार को पहली बार 1248 पॉजिटिव मिले

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की बदइंतजामी के कारण कोरोना रोगी तड़प-तड़पकर दम तोड़ रहे हैं। अस्पतालों में बेड्स से लेकर जीवन रक्षक उपकरण, ऑक्सीजन और यहां तक की साधनों की काफी कमी के चलते रोगियों की जान तक लील रही है। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में महज 24 घंटे में 15 कोरोना रोगियों ने दम तोड़ दिया। कोविड प्रोटोकॉल के तहत 17 शवों का विभिन्न श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार हुआ है। वहीं कोरोना काल में मंगलवार को पहली बार सर्वाधिक 1248 नये मिले हैं।

निजी कोविड अस्पताल में सरसाना गांव की कोरोना संक्रमित महिला ने दम तोड़ दिया। कुछ दिनों पहले ही गर्भ में पल रहे सात माह के शिशु की मृत्यु हो गई थी। वहीं, सोमवार को एचएयू में रहने वाले कोरोना संक्रमित बड़े भाई की मौत के बाद मंगलवार को संक्रमित छोटे भाई की हालत बिगड़ गई। विडंबना यह कि सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में बेड मुहैया करवाने के लिए परिजनों को घंटों इंतजार व सिफारिशें लगवानी पड़ीं।

इसके लिए पहले पार्षद अमित ग्रोवर और फिर बायोलॉजिस्ट डॉ. रमेश पूनिया ने डिप्टी स्पीकर, डीसी, सीएमओ और पीएमओ से आग्रह करके बेड दिलवाया है, इसके बाद उपचार शुरू हुआ। इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज में जिन 15 संक्रमित रोगियों की मौत हुई है उनमें पिता-पुत्र भी शामिल हैं। चार रोगी ऐसे थे जोकि उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे।

काफी इंतजार के बाद बेड मिला मगर कुछ समय में उनकी सांसें टूट गईं। इसी स्वास्थ्य संस्थान में मंगलवार को कोरोना संक्रमित गर्भवती बेड खाली होने के इंतजार में बाहर बैठी रही। बता दें कि उक्त 32 मौतों के अलावा 12 मृतकों की डेथ का ऑडिट होने के बाद आंकड़ा पोर्टल पर अपलोड हुआ है।

अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ने वाले 16 से 82 उम्र के रोगी

अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ने वाले 15 रोगियों की उम्र 16 साल से 82 तक है। इनमें से अधिकांश रोगी पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे। कई की ऑक्सीजन सेचुरेशन 40 से 70 के बीच था। लंग्स काफी प्रभावित थे और सांस नहीं ले पा रहे थे। कई वेंटिलेटर पर थे, फिर भी जान नहीं बची। दिवंगत 82 वर्षीय पिता का मंगलवार को अंतिम संस्कार हुआ, जबकि 52 वर्षीय बेटे का बुधवार को दाह संस्कार होगा। मंगलवार को 210 रोगी भर्ती थे। मरीजों की बढ़ती संख्या और ऑक्सीजन व बेड की कमी से हाहाकार मचा हुआ है।

डॉ. दुग्गल बोलीं- निजी अस्पताल मरने के कगार पर पहुंचता देख मरीज कर रहे रेफर

मेडिकल कॉलेज की डायरेक्टर डॉ. गीतिका दुग्गल ने बताया कि मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं है। हमारा प्रयास है कि हर मरीज को ट्रीटमेंट मुहैया करवाएं। इसके लिए सारी मैन पावर, साधन-संसाधान लगा रखे हैं। जिन मरीजों की मौत हुई है उनकी हालत काफी बिगड़ी हुई थी। निजी कोविड अस्पताल मरने के कगार पर पहुंचता देख मरीजों को रेफर कर देते हैं जोकि यहां आकर दम तोड़ते हैं।

मरीज की कंडीशन बिगड़ रही है तो उसे आखिर तक इलाज मुहैया करवाना चाहिए। एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज तक पहुंचते ही कई रोगी अंतिम सांस ले चुके होते हैं या फिर लेने वाले होते हैं। मृतकों में काफी लोग दूसरे जिलों के रहने वाले भी थे। इनकी उम्र 48, 35, 55, 65, 16, 70, 82, 24, 32 साल थी।

नागरिक ढिलाई न बरतें

  • संक्रमित के संपर्क में आए हैं तो तुरंत जांच करवाएं।
  • कोरोना संक्रमित हैं तो इलाज करवाने में देरी न बरतें।
  • ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • हर उम्र पर कोरोना का दुष्प्रभाव है, इसलिए सतर्क रहें।
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