रेमडेसिवीर इंजेक्शन की शॉर्टेज:मुख्यालय ने जिला स्वास्थ्य विभाग से रेमडेसिवीर इंजेक्शन की डिमांड बारे पूछा

हिसार8 महीने पहले
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रेमडेसिवीर इंजेक्शन - Dainik Bhaskar
रेमडेसिवीर इंजेक्शन
  • इसे खरीदने के लिए भटक रहे कोरोना रोगियों के तीमारदार, सिविल अस्पताल प्रबंधन ने 80 टीकों की भेजी डिमांड

पिछले साल कोरोना ग्रस्त गंभीर रोगियों के लिए हजारों रुपये कीमत का रेमडेसिवीर इंजेक्शन रामबाण साबित हुआ था लेकिन वर्तमान में टीकों की काफी शॉर्टेज है। अब मरीज भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य मुख्यालय ने सभी जिला स्वास्थ्य विभागों से रेमडेसिवीर इंजेक्शन की डिमांड बारे पूछा है। हिसार सिविल अस्पताल से करीब 80 टीकों की डिमांड भेजी है।

भविष्य में गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ने पर और टीकों की डिमांड की जाएगी। टीके कहीं भी उपलब्ध नहीं होने की वजह से तीमारदार भटक रहे हैं। कोरोना ग्रस्त गंभीर परिजनों की जान बचाने के लिए टीके खरीदने के लिए इधर-उधर संपर्क करने लगे हैं। ऐसा ही एक केस टीकों की खोज में रविवार को सिविल अस्पताल में आया था मगर निराश होकर लौट गए। इनका मरीज महानगर के बड़े अस्पताल में दाखिल है।

बता दें कि पिछले साल तेजी से बढ़ती रोगियों की संख्या के बीच कोरोना कहर बनकर बरपा था। तब सरकारी-निजी अस्पतालों में इंजेक्शन का गंभीर रोगियों की जान बचाने में काफी प्रयोग हुअा था। एक टीके की कीमत करीब 6 हजार थी जोकि रोगी कम होने व टीकों का इस्तेमाल कम होने पर कीमत घटकर 4500 से 3 हजार तक पहुंच गई थी।

सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड इंचार्ज डॉ. अजय चुघ ने बताया कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन का रिजल्ट अच्छा था। खून जांच के बाद ही टीके लगते हैं। जिस मरीज के लंग्स इंफेक्टिड हुए, ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हुई और हालत गंभीर होने पर छह टीके लगाते थे। पहले दिन 2 और चार दिन एक-एक टीका लगाते थे। इससे रोगियों की हालत में तेजी से सुधार होता था। अभी देशभर में टीके की शॉर्टेज है। हमने भी स्वास्थ्य मुख्यालय को डिमांड भेजी है। तेजी से रोगी बढ़ने के साथ मृत्युदर भी बढ़ती जा रही है। इसलिए कोरोना से खुद को बचाकर रखें। मास्क पहनना न भूलें। ..

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