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डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप के सुझाव:3 माह में मजबूत करना होगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर ताकि कोरोना की तीसरी लहर में बचा सकें जानें

हिसार18 दिन पहलेलेखक: भूपेश मथुरिया
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  • कोरोना की पहली लहर के बाद जिम्मेदारों ने सबक लिया होता तो दूसरी लहर में बचाई जा सकती थी कई जिंदगियां, देर आए दुरुस्त आए... अब तीसरी लहर का अंदेशा भांप तैयारी
  • इन बिंदुओं पर खास फोकस-1. जीवन रक्षक मशीनों, आईसीयू बेड, मैनपावर को बढ़ाया जाना 2. वेंटिलेटर्स संचालन को डॉक्टर्स और स्टाफ को ट्रेंड किया जाना

कोरोना की पहली लहर से सबक लेकर अगर शासन-प्रशासन हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ोतरी पर फोकस करता तो दूसरी लहर में सैकड़ों जिंदगियां बचाई जा सकती थी। देरी का परिणाम यह कि किसी काे ऑक्सीजन के अभाव में तो किसी को अस्पतालों की दर-दर ठोंकरे खाने के बावजूद बेड नसीब नहीं हुआ था। 500 बेड्स का अस्पताल दूसरी लहर से पहले बन जाता ताे मरीजों को परेशानियां झेलनी न पड़ती।

अब कोरोना की पहली और दूसरी लहर से सबक लेते हुए विभागों ने तीसरी लहर के अंदेशा भांपते हुए जिंदगियां बचाने के लिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर फाेकस किया है। डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रुप हिसार की मीटिंग में तीन माह के भीतर जरूरी प्रस्तावों को सिरे चढ़ाने का सुझाव दिया है। इसमें जीवन रक्षक मशीनों, मैनपावर सहित आईसीयू बेड्स बढ़ोतरी पर विशेष फोकस रखा है।

पढ़िए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए क्या-क्या उठाए जा रहे हैं कदम

सीएचसी-एसडीएच में बिछेगी ऑक्सीजन लाइन, संजीवनी अस्पताल में 10 वेंटिलेटर्स बेड का आईसीयू बनेगा, चिल्ड्रन क्रिटिकल केयर आईसीयू प्रस्तावित

5 खामियां अगर इन्हें पहली लहर के बाद करते दूर तो दूसरी लहर में कई जिंदगियाें को बचाया जा सकता था, घर न उजड़ते

1. हांफते वेंटिलेटर के भरोसे रहीं जिंदगियां : सिविल अस्पताल में करीब 16 वेंटिलेटर हैं मगर फंक्शनल पांच-सात हैं। बाकी सभी वेंंटिलेटर्स के संचालन को लेकर विशेष फोकस की जरूरत है। कई वेंटिलेटर्स ऐसे हैं जोकि लगातार फंक्शनल नहीं हैं। 2-3 घंटे बाद हांफने लगते हैं। कुछ उपकरणों की कमी रही। इससे सभी वेंटिलेटर्स का लाभ मरीजों को नहीं मिल सका। अब सभी वेंटिलेटर्स दुरुस्त करने के साथ 5 वेंटिलेटर स्टैंडबाय रखने का सुझाव है। वेंटिलेटर संचालन के लिए डॉक्टर्स व नर्स ट्रेंड नहीं है, जिन्हें ट्रेंड करने की जरूरत है ताकि अगर ट्रेंड स्टाफ संक्रमित हो चुका है तो उनकी अनुपस्थिति दूसरी ट्रेंड टीम वेंटिलेटर की कमान संभाले।

2. देरी से मिली अस्पताल की संजीवनी : कोरोना की दूसरी लहर गुजरने के बाद देरी से 500 ऑक्सीजन बेड अस्पताल की संजीवनी मिली। अगर पहली लहर के बाद अस्पताल शुरू होता तो सैकड़ों मरीजों को बड़ी राहत मिलती। ऑक्सीजन के लिए मारामारी नहीं होती और जिंदगियां बचती। बता दें कि अभी तक ब्लॉक बी को शुरू किया है। मरीज कम हैं जिसके कारण ए ब्लॉक आज तक शुरू नहीं हो सका है, क्योंकि अस्पताल भी दूसरी लहर खत्म होते-होते जनता को समर्पित हुआ था।

3. पहले नहीं की ऑक्सीजन बेड्स में बढ़ोतरी : कोरोना की दूसरी लहर के बाद जीएच, एसडीएच व सीएचसी में ऑक्सीजन बेड्स की बढ़ोतरी पर तेजी से काम शुरू हुआ है, जबकि पहली लहर खत्म होने के बाद काम शुरू होना था। सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट की घोषणा के चार माह बाद प्लांट स्थापित हो सका है जबकि दूसरे प्लांट के लिए साइट का चयन हुआ है जिस पर काम शुरू होना है। अगर सीएचसी व एसडीएच स्तर पर ऑक्सीजन की सुविधा मुहैया होती तो मरीजों को भटकना न पड़ता। मिनी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी कोरोना संक्रमण घटने के दौरान सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध करवाएं हैं।

4. बच्चों केे लिए नहीं की व्यवस्था : कोरोना की पहली व दूसरी लहर में संक्रमित बच्चों के लिए न तो अाईसीयू न ही केयर यूनिट की सुविधा मुहैया हुई। नौनिहालों का इलाज अग्रोहा मेडिकल कॉलेज, होम आइसोलेशन या फिर शुल्क देकर निजी कोविड अस्पताल में करवाना पड़ा। अगर सिविल अस्पताल में बच्चों के लिए भी केयर यूनिट स्थापित होती तो बिना शुल्क के उनका इलाज संभव था।

5. निगरानी कमेटी बनी रहीं मूकदर्शक : जिला प्रशासन ने जिस उद्देश्य के साथ कोविड अस्पतालों की निगरानी के लिए कमेटियों का गठन किया था, वे किसी काम की साबित नहीं हुई। कुछ कोविड अस्पतालों ने मरीजों के भय का फायदा उठाकर उनसे इलाज के नाम पर ओवरचार्जिंग करके आर्थिक नुकसान पहुंचाया। पर, निगरानी कमेटियां अस्पतालों की ओवरचार्जिंग रोकने में असफल रही। कमेटियां अपना सही रोल निभाती तो शायद मरीजों को अपनी जमा पूंजी या फिर उधार लेकर इलाज नहीं करवाना पड़ता है। कोरोना के इलाज में कई के घर तक उजड़ गए हैं।

5 प्रस्ताव व सुझाव पर जिन पर काम होगा, अस्पतालों में बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था से लेकर पर्याप्त स्टाफ का होगा इंतजाम

1. सीएचसी-एसडीएच तक प्राण-वायु, फंड भी उपलब्ध सिविल अस्पताल के सभी वार्डों में ऑक्सीजन लाइन पहुंच गई है। अब सिलेंडर से ऑक्सीजन देने का झंझट नहीं है। अब आदमपुर व हांसी एसडीएच व आर्य नगर, बरवाला, मंगाली, नारनौंद, सीसवाल, सोरखी, उकलाना सीएचसी के पेशेंट एडमिशन वार्डों में ऑक्सीजन लाइन बिछाने का प्रस्ताव मंजूर हुआ है। ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए हेल्थ सेंटर्स के प्रभारियों से जमीन बारे पूछा है। फंड भी मिला है। सिविल अस्पताल में एक ऑक्सीजन प्लांट बन चुका है और दूसरे पर काम जारी है। सभी सीएचसी-पीएचसी पर 103 और जीएच में 30 मिनी ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मिले हैं।

2. संजीवनी में वेंटिलेटर से लैस आईसीयू : जिंदल माॅडर्न स्कूल में करीब 28 करोड़ की लागत से तैयार 500 बेड्स के चौ. देवीलाल संजीवनी अस्पताल में वेंटिलेटर से लैस आईसीयू स्थापित करने का प्रस्ताव है। अस्पताल के डीएमएस डॉ. राजेश के अनुसार पहले 40 वेंटिलेटर का प्रपोजल था लेकिन प्रथम फेज में 10 बेड्स का आईसीयू स्थापित होगा। हर बेड्स पर ऑक्सीजन सपाेर्ट उपलब्ध है मगर वेंटिलेटर की सुविधा नहीं थी। आईसीयू के लिए प्रस्ताव भेजा है।

3. बच्चों की सुरक्षा में केयर यूनिट : अंदेशा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी। इसलिए बच्चों के लिए 20 बेड्स का चिल्ड्रन क्रिटिकल केयर आईसीयू स्थापित करने को जगह व संसाधन जुटाने शुरू किए हैं। जहां नौनिहालों से 15 साल तक के बच्चों का इलाज होगा।

अग्रोहा मेडिकल में बच्चों के लिए 20 फीसद वेंटिलेटर की व्यवस्था पर जोर है। अभी सिविल अस्पताल में एसएनसीयू है। यहां कुल 22 बेड्स हैं, जिनमें 16 एडमिशन, 2 ट्रायज, 6 केएमसी जहां नवजात बच्चों को स्टेबल होने तक मां के साथ रखा जाता है। आर्य नगर, बरवाला, नारनौंद, उकलाना सीएचसी, हांसी व आदमपुर एसडीएच में एनबीएसयू के तहत 4-4 बेड उपलब्ध है।

4. विशेषज्ञ व स्टाफ बढ़ाया जाए : वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टर्स, पैरामेडिकल व नॉन पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी है जिससे मरीजों की बेहतर देखभाल नहीं हो पाती है। इसलिए मैनपावर बढ़ाने के लिए जहां मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों की संख्या बढ़ाकर एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन सहित अन्य विशेषज्ञ तैयार करने का सुझाव है। सभी स्वास्थ्य संस्थानों सहित स्वास्थ्य संगठनों को एकजुट होकर काम करने की सलाह है। वॉलियंटर्स की मदद ली जाए।

5. 80% मरीज हो सकते हैं घर ठीक, इसलिए अवेयरनेस जरूरी : कोरोना काल में भय का माहौल अधिक रहा। यह भी रोगियों को रिकवर न होने देने का मुख्य कारण है। 80 फीसद मरीज घर में रहकर ठीक हो सकतेे हैं। ऐसे में लोगों को कोरोना से बचाव, रोकथाम, इलाज संबंधित अवेयरनेस के लिए नुक्कड़ नाटक, मुनादी, अनाउंसमेंट इत्यादि माध्यमों का सहारा लिया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर हाेर्डिंग्स व पोस्टर लगाए जाएंगे। हेल्प डेस्क स्थापित होंगे, ताकि लोगों को सवालों का सही जवाब एवं जानकारियां मिल सकें। 15 फीसद माइल्ड सिप्टम व 5 फीसद सीरियस केस होते हैं।

यह बताना भी जरूरी

आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को केशलेस बीमा के प्रति जागरूक करना होगा। किस मर्ज का इलाज किस अस्पताल में कितने पैकेज में होगा, उसकी सही जानकारी होनी चाहिए। इसी तरह कोरोना काल में कुछ कोविड अस्पतालों में इलाज के नाम पर काफी मरीजों से कई गुना ज्यादा शुल्क लेने के मामले सामने आ रहे हैं।

इलाज के लिए अस्पतालों में जाने वाले मरीजों को नॉन एनएबीएच व एनएबीएच ट्रीटमेंट पैकेज की जानकारी देने के लिए जागरुकता अभियान चलाने होंगे। जरूरतमंद मरीजों को जीवन रक्षक सेवाओं के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए इमरजेंसी हेल्थ सेंटर स्थापित होने चाहिए।

उपकरणों की डिमांड भेजी है: डाॅ. भारती

कोरोना की तीसरी लहर से पहले हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए प्रयास जारी हैं। ऑक्सीजन प्लांट से लेकर ऑक्सीजन लाइन बिछाने तक का काम शुरू होगा। कोरोना संक्रमित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए केयर यूनिट पर ध्यान केंद्रित है। उपकरणों की डिमांड भेजी है।'' डॉ. रतना भारती, सीएमओ, हिसार।

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