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आरसिटी प्रकरण:हाईकोर्ट ने आरोपी निदेशक, उसकी पत्नी और 2 बेटों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

हिसार3 दिन पहले
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  • भुगतान के बाद भी पजेशन नहीं मिली, बायर्स ने दर्ज कराया था केस

आरसिटी प्रकरण में मंगलवार को हाईकोर्ट की एकल पीठ में न्यायमूर्ति हरनरेश सिंह गिल ने सुनवाई के बाद आरोपी निदेशक राजेंद्र मित्तल, उसकी पत्नी सराेज रानी, बेटे कुशाल मित्तल और अरुण मित्तल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। बायर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ वकील नरेश सिंह शेखावत के अलावा वकील रोज गुप्ता, वकील अनुराग जैन व वकील हिमांशुराज ने भी पीड़ितों की तरफ से मामले में न्यायालय के समक्ष तथ्य रखे थे।

बताया कि आरसिटी मामले में फॉरेंसिक ऑडिट हुई थी। उसके अनुसार बिल्डर्स द्वारा पेश किए गए दस्तावेज गलत हैं। सरोज मित्तल व कुशाल मित्तल 2018 से पूर्व कंपनी के निदेशक थे। जब बायर्स ने आवाज उठानी शुरू की तो दोनों ने खुद को कंपनी से अलग कर लिया था। इतना ही नहीं उन्होंने कंपनी में शेयर होल्डर्स भी कम करने शुरू कर दिए थे। 12 एकड़ जमीन पर बिल्डर्स प्रोजेक्ट बना रहा है जिसकी रजिस्ट्री सिर्फ 5 करोड़ में करवाई थी लेकिन कंपनी के दस्तावेजों में 18 करोड़ की ट्रांजक्शन दिखाई है जोकि सरकार को रेवेन्यू का नुकसान पहुंचाया है।

वकीलों के अनुसार बिल्डर्स ने बिल्डर्स ने हरेरा में एक शपथ पत्र दिया था। इसमें दावा किया था कि 2019 में सभी फ्लैट का काम पूरा करवाकर बायर्स के सुपुर्द कर देंगे लेकिन 2021 का आधा साल और कुल 13 साल बीतने के बावजूद बायर्स को उनके सपनों का आशियाना नहीं मिल पाया। इसके चलते न्यायालय ने एसो. के पक्ष में फैसला सुनाया है। इन आरोपियों की निचली अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे थे। अब इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हिसार अर्बन एस्टेट थाना की पुलिस टीमें प्रयासरत हैं।

बायर्स एसो. की मांग... गिरफ्तारी हो

बायर्स एसो. के वाइज प्रेजिडेंट नरेश बंसल व सचिव दयानंद राणा ने कहा कि इस प्रकरण में इन चार के अलावा छह और आरोपी हैं, जिनके विरुद्ध पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए। पुलिस अगर मामले में त्वरित एक्शन लेती तो आरोपी गिरफ्त से बाहर न होते। इस मामले में कुछ बायर्स की तरफ से हिसार जिला अदालत में पैरवी करने वाले वकील परवीर आर्य और वकील महेंद्र सिंह नैन इत्यादि हैं।

यह है मामला : वर्ष 2019 में आरसीटी फ्लैट बायर्स एसाेसिएशन ने अर्बन एस्टेट थाना में धारा 406, 420, 468, 471, 477 ए और 34 आईपीसी के तहत केस दर्ज करवाया था। एसाेसिएशन का आराेप है कि बिल्डर्स द्वारा विला और फ्लैट्स के लिए एडवांस बुकिंग ली गई। पैसे जमा करवाने के बावजूद अब तक उनकाे पजेशन नहीं दी और न ही पैसा वापस किया। सेक्टर 9-11 के पास विला और फ्लैट्स का प्राेजेक्ट 2008 में हिसार रियल एस्टेट के नाम से लाॅन्च किया गया था। 2011 में हिसार रियल एस्टेट ने आरसीटी काे प्राेजेक्ट साैंप दिया।

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