प्रस्ताव:एमबीबीएस फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स स्वेच्छा से जिला चुनकर कोरोना से लड़ने में देंगे सहयोग

हिसारएक वर्ष पहले
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  • स्वास्थ्य विभाग ने एमबीबीएस फाइनल ईयर के 50 स्टूडेंट्स और बीएससी फाइनल ईयर की 38 नर्सिंग स्टूडेंट्स को कोरोना से बचाव और रोकथाम की ट्रेनिंग दी

कोरोना को हराने के लिए जंग लड़ रहे हेल्थ वॉरियर्स की मदद के लिए भावी डॉक्टर्स का सपोर्ट मिलेगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को चुना गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इनकी सुविधा का ध्यान रखते हुए स्वेच्छा से जिला चुनकर मदद करने का प्रस्ताव दिया है। 

बता दें कि यह कदम कोरोना से बचाव एवं रोकथाम के लिए जरूरी भविष्य की चुनौती को देखते हुए उठाया है। जुलाई में कोरोना के चरम पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मैनपावर का बैकअप रखना शुरू कर दिया था। इसके लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस फाइनल ईयर के 50 स्टूडेंट्स और करीब 38 बीएससी फाइनल ईयर की नर्सिंग स्टूडेंट्स को कोरोना से बचाव एवं रोकथाम सहित इलाज संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब स्टूडेंट्स की सुविधा के लिए दिशा-निर्देश जारी हुए हैं कि वे अपनी स्वेच्छा से गृह जिला या फिर अन्य जिला चुनकर स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे सकते हैं। 

हिसार में एक स्टूडेंट्स ने आकर रजिस्ट्रेशन करवाया है। इस व्यवस्था से सरकार का खर्चा बचेगा। भावी डॉॅक्टर्स के रहने, खाने-पीने का खर्चा नहीं उठाना पड़ेगा। वे अपने परिजनों या रिश्तेदारों के यहां रहकर अपनी सुख-सुविधा का ध्यान रखेंगे।  इस बारे में सिविल सर्जन डॉ. रतना भारती का कहना है कि हमने बैकअप तैयार कर लिया था। मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स और 38 नर्सिंग स्टूडेंट्स को ट्रेंड कर दिया था। अब नये दिशा-निर्देशों के तहत सबकुछ चेंज हो गया है। स्टूडेंट्स अपनी स्वेच्छा से जिला चुनकर हेल्थ विभाग में सेवा दे सकेंगे। 

इंटर डिस्ट्रिक्ट वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग : पीजीआई व सिविल अस्पतालाें के डॉक्टर्स ने इलाज के टिप्स दिए
सिविल अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अजीत लाठर ने बताया कि शुक्रवार को कोविड-19 को लेकर इंटर डिस्ट्रिक्ट वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग हुई। इसमें पीजीआई रोहतक और सिविल अस्पतालों के फिजिशियन एक-दूसरे से रूबरू हुए। कोरोना से बचाव, रोकथाम व इलाज को लेकर चर्चा हुई। डॉक्टर्स ने अपने-अपने अनुभवों का साझा किया, जोकि मरीजों की बेहतरी के लिए उठाए कदम थे। इतना ही नहीं इलाज को लेकर कोई दुविधा थी तो उसे वरिष्ठ डॉक्टर्स ने दूर किया।

यह भी बताया कि कोरोना से बचने के लिए हेल्थ स्टाफ को सुरक्षा किट का बड़ी सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। इसे पहने व उतारते समय तो जरूरी नियमों का पालना करना चाहिए। रोगियों को बूस्टअप करें ताकि कोरोना के भय से बाहर निकलें। संकेत है कि भविष्य में इस तरह की वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग होती रहेगी जिससे प्रदेश के डॉक्टर्स के बीच कोर्डिनेशन बना रहेगा। और बेहतर इलाज कैसे कर सकते हैं उसको लेकर नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों का पता चलेगा।

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