दहेज प्रताड़ना और धमकी देना नहीं हुआ साबित:बहू ने किया था प्रेम विवाह, पति केस दर्ज होने के बाद से फरार, चार माह बात सास बरी

हिसार9 दिन पहले
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बहू की शिकायत पर चार माह तक जेल में रह चुकी जमानत पर रिहा सास को अदालत से बड़ी राहत मिली है। बहू साबित नहीं कर सकी कि सास ने उसे दहेज के लिए प्रताडि़त किया, जान से मारने की धमकी देकर जातिसूचक अपशब्द बोले थे। इस मामल में शनिवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया ने सुनवाई करते हुए सबूतों के अभाव में सास को बाइज्जत बरी कर दिया है।

बचाव पक्ष के वकील करन सिंह तंवर ने बताया कि वर्ष 2014 में युवक-युवती ने हाईकोर्ट में जाकर प्रेम विवाह किया था। युवती अनुसूचित जाति से संबंध रखती है जबकि युवक पिछड़ा वर्ग से संबंध रखता है। शादी के कुछ समय बाद दंपति के बीच अनबन रहने लगी थी। इसके कारण वह अपने मायके में जाकर रहने लगी थी।

वर्ष 2018 में पति, सास व ननद पर दहेज प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी और जातिसूचक अपशब्द बोलने की शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके चलते पति फरार हो गया था। ननद को पुलिस ने तफ्तीश के दौरान निर्दोष माना था लेकिन सास को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। करीब 4 माह तक जेल में रहकर सास जमानत पर बाहर आई थी।

अदालत में सास के खिलाफ केस चला था। सास ने बहू के आरोपों के खिलाफ अदालत में लड़ाई लड़ी थी। इतना ही नहीं जांच अधिकारी डीएसपी ने शिकायतकर्ता के एससी होने का प्रमाण पत्र नहीं लिया मगर उसके पिता के प्रमाण-पत्र के आधार पर कार्रवाई की थी। ऐसे में बहू कोई ठोस सबूत नहीं पेश कर सकी जिससे साबित होता है कि सास ने दहेज के लिए प्रताडि़त किया, जान से मारने की धमकी दी और जातिसूचक अपशब्द बोले थे। इसलिए अदालत ने सास को बरी करने का फैसला सुनाया है।

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