• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Hisar
  • Now HAU Will Make Phosphotic Fertilizer From Fly Ash And Spent Wash From Sugar Mills And Liquor Factories, MoU Signed

वेस्ट टू वेल्थ मेें बदलने की तकनीक:अब एचएयू चीनी मिलों और शराब फैक्ट्रियों से निकले फ्लाई ऐश और स्पेंट वाश से बनाएगा फास्फॉटिक फर्टिलाइजर, एमओयू किया साइन

हिसार2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान मौजूद एचएयू के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज व अन्य। - Dainik Bhaskar
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान मौजूद एचएयू के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज व अन्य।
  • एचएयू ने यूएसए स्थित इंटरनेशनल फर्टिलाइजर डिवेलपमेंट सेंटर के साथ किया एमओयू

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय जल्द चीनी मिल और डिस्टिलरी से निकलने वाली फ्लाई ऐश और स्पेंट वाश से फास्फॉटिक फर्टिलाइजर तैयार करने पर काम करेगा। यानी चीनी मिलाें के गन्ने से निकले वेस्ट और शराब की फैक्ट्री से निकले वेस्ट से फर्टिलाइजर तैयार हाे सकेगा।

इसके लिए विश्वविद्यालय ने यूएसए स्थित विश्व के एकमात्र उर्वरक शोध संस्थान इंटरनेशनल फर्टिलाइजर डिवेलपमेंट सेंटर (आईएफडीसी) के साथ एमओयू साइन किया है। इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए शुगरफेड हरियाणा प्रथम वर्ष एचएयू, आईएफडीसी व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को साढ़े सात करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करेगा।

काम्बोज बोले - फ्लाई ऐश व स्पेंट वाश का निस्तारण बड़ी समस्या

विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. बीआर काम्बोज ने बताया कि डिस्टिलरी से निकलने वाली फ्लाई ऐश व स्पेंट वाश का निस्तारण मौजूदा समय में एक बड़ी समस्या है, इनका फास्फॉटिक फर्टिलाइजर बनाना वेस्ट टू वेल्थ की सोच को सार्थक करने की दिशा में एक अहम कदम है। अंतरराष्ट्रीय संस्थान के साथ एमओयू के तहत विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और किसानों के लिए अनुसंधान, शिक्षा व प्रशिक्षण जैसे विभिन्न सहयोगात्मक कार्यक्रमों का संयोजन व आदान-प्रदान करेगा।

संस्थान के विशेषज्ञ व एचएयू के वैज्ञानिक व विद्यार्थी मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे और आईएफडीसी की ओर से तकनीक सीखने के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।

भारत सालाना 7000 करोड़ रुपए की उर्वरक का कर सकता है उत्पादन
यूएसए स्थित इंटरनेशनल फर्टिलाइजर डिवेलपमेंट सेंटर के कंट्री हेड डॉ. यशपाल सहरावत के अनुसार वर्तमान समय में पोटेशियम फर्टिलाइजर का एक 50 किलोग्राम का बैग जिसकी कीमत करीब 750 रुपए तक आंकी गई है जबकि उसी बैग का विकल्प फास्फॉटिक फर्टिलाइजर मात्र 180 रुपए में उपलब्ध हो सकेगा।

राज्य में सालाना लगभग 14000 टन पोटाश और 7000 टन फास्फोरस यानी लगभग 15 प्रतिशत पोटाश उर्वरक और 2 प्रतिशत फास्फोरस उर्वरक का उत्पादन राज्य कर सकता है। मौद्रिक दृष्टि से राज्य सालाना लगभग 55 करोड़ रुपए और 27 करोड़ रुपए मूल्य के पोटाश और फास्फोरस उर्वरक का उत्पादन करेगा जिससे केंद्र सरकार के सब्सिडी बोझ को सालाना 30 करोड़ रुपए से अधिक कम कर सकता है। इस नवीन तकनीक से भारत सालाना 7000 करोड़ रुपए की उर्वरक का उत्पादन कर सकता है।

ये भी रहे मौजूद : एचएयू के वीसी प्रोफेसर बीआर काम्बोज की उपस्थिति में विवि की ओर से अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.के. सहरावत, डॉ. एम.एस. सिद्धपुरिया, डॉ. यशपाल सहरावत व कंसल्टेंट डॉ. सांई दास ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर ओएसडी एवं स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डॉ. अतुल ढींगड़ा, मीडिया सलाहाकार डॉ. संदीप आर्य, सहायक निदेशक, आईपीआर सेल डॉ. विनोद कुमार व डॉ. जयंती टोकस मौजूद रहे।

खबरें और भी हैं...