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  • Now In Six Hours, Animals Can Be Detected In Animals Like Sarra, Thalaria, Babesiosis Disease, Luvas Assistant Professor Developed The Technique, Will Save Time And Money

खास खबर:अब मात्र छह घंटे में चल सकेगा पशुओं में सर्रा, थैलेरिया, बबेसिओसिस रोग का पता, लुवास के असिस्टेंट प्राेफेसर ने तकनीक की विकसित, समय-धन बचेगा

हिसारएक महीने पहले
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असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गौरव चराया।
  • पहले तीन बीमारियों का टेस्ट करना पड़ता था अलग-अलग, तीन जांच के देने हाेते थे 1800 रुपये, अब 700 रुपए में हाेगी जांच

पशुपालकाें के लिए खुशखबरी है। पशुओं में हाेने वाली सर्रा, थैलेरिया यानि दिमागी बुखार, बबेसिओसिस तीनाें बीमारियाें का पता एक साथ मात्र छह से सात घंटे में ही पता लग सकेगा। लुवास के असिस्टेंट प्राेफेसर डाॅ. गाैरव चराया ने अपने साथियाें की मदद से तकनीक विकसित की है। पीसीआर मशीन से ही सफल टेस्ट किया जा सकेगा। मात्र 700 रुपये में तीनाें जांच एक साथ हाे सकेगी। पहले तीनाें बीमारियाें की जांच के लिए अलग-अलग टेस्ट कराने हाेते थे।

यही नहीं एक टेस्ट के 600 रुपये तक लिए जाते थे। यानि तीनाें टेस्ट के लिए 1800 रुपये पशुपालकाें काे चुकाने हाेते थे। असिस्टेंट प्राेफेसर डाॅ. गाैरव चराया ने बताया कि यदि भैंस या फिर अन्य पशु बुखार या फिर अन्य किसी बीमारी से ग्रस्त हाे जाता है ताे उसकी जांच के लिए पशुपालकाें काे सर्रा, थैलेरिया और बबेसिओसिस की अलग-अलग तीन जांच करानी हाेती है। लुवास के कुलपति डाॅ. गुरदियाल सिंह ने कहा कि अस्सिटेंट प्राेफेसर और अन्य वैज्ञानिकाें ने सराहनीय काम किया है।

बबेसिओसिस राेग: यह पशुओं में होने वाला रोग है, जो रक्त प्रोटोज़ोआ के कारण होता है। जाे एक कोशिकीय जीव है। यह मलेरिया-जैसा रोग है जो बबेसिया नामक प्रोटोजोवा के संक्रमण के कारण होता है। स्तनपोषी जीवों में ट्राइपैनोसोम के बाद बबेसिया दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला रक्त परजीवी है।

सर्रा राेग: सर्रा रोग मेरुडण्ड वाले प्राणियों को लगने वाला रोग है। यदि इसका इलाज नहीं किया गया तो पशु मर सकता है। यह रोग ट्राईपैनसो-इवेनसाई नामक परजीवी के कारण होता है। यह प्रोटोजोवा पशु के रक्त में प्रवेश कर जाता है जिससे ज्वर, कमजोरी, सुस्ती, वजन कम होना और खून की कमी हो जाती है। कुछ पशु चक्कर काटने लगते हैं। बीमारी के चलते पशुओं में तेज बुखार, थरथराहट, दिखना बंद हो जाता है। पशु दांत किटकिटाता है। जल्दी जल्दी पेशाब करता है। पेट फूल जाता है और गिर कर मर जाता है।

ऐसे हाेगी जांच : डाॅ. अमन कुमार बताते हैं कि तीनाें बीमारियाें की जांच के लिए पशु के खून का सैंपल लिया जाता है। खून से डीएनए निकाला जाता है। इसके बाद पीसीआर के माध्यम से राेगाें की रिपाेर्ट छह से सात घंटे के अंदर मिलती है।

टीम में ये रहे शामिल : नई तकनीक विकसित करने में लुवास के डायरेक्टर निदेशक डाॅ. प्रवीण गाेयल, वैज्ञानिक डाॅ. अमन कुमार, प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. सुशीला मान, रिटायर्ड वैज्ञानिक डाॅ. नरेश राखा का भी विशेष सहयाेग रहा।

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