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खास खबर:महिलाओं के बलबूते परिवार नियोजन कार्यक्रम 2020 में केवल 5 पुरुषों ने ही करवाई नसबंदी

हिसारएक महीने पहले
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  • पिछले तीन साल में 20 हजार महिलाओं ने कराई नसबंदी ताे पुरुषाें की संख्या रही मात्र 118
  • सरकार परिवार नियोजन कार्यक्रम पर कर रही लाखों रुपए खर्च, फिर भी जागरूक नहीं हो रहे लोग

महबूब अली,

भले ही सरकार परिवार नियोजन कार्यक्रम पर हर साल लाखाें रुपये खर्च कर रही हाे, मगर इसके बावजूद जिले के पुरुष नसबंदी के प्रति जागरूक नजर नहीं आ रहे हैं। महिलाएं नसबंदी कराने में आगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े यह दर्शाते हैं। पिछले तीन साल में जहां 20 हजार से अधिक महिलाओं ने नलबंदी कराकर परिवार नियोजन कार्यक्रम काे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है, वहीं तीन साल में नलबंदी कराने वाले पुरुषाें की संख्या मात्र 118 है।

हैरत की बात है कि पिछले साल 2020 में ताे मात्र पांच पुरुषाें ने ही नसबंदी कराई। परिवार नियाेजन कार्यक्रम काे सफल बनाने के लिए हिसार का स्वास्थ्य विभाग आए दिन जागरूकता अभियान चला रहा है। गाेष्ठी के साथ-साथ साेशल मीडिया के माध्यम से लाेगाें काे जागरूक किया जा रहा है।

सीएमओ डाॅ. रत्ना भारती और हिसार की डिप्टी सीएमओ डाॅ. अनामिका बिश्नोई ने बताया कि परिवार नियाेजन कार्यक्रम में पुरुष अधिक भागीदारी नहीं कर रहे है। पिछले साल वर्ष 2020 में जहां मात्र पांच पुरुषाें ने एनएसवी नसबंदी कराई, वहीं नलबंदी कराने वाली महिलाओं की संख्या 4147 रही। वहीं वर्ष 2019 में 68 पुरुषाें ने नसबंदी कराई जबकि महिलाओं की संख्या 8116 रही।

पुरुषों की अरुचि के पीछे सामाजिक कारण

समाज सेवी डाॅ. प्रभु यादव, राहुल का कहना है परिवार नियोजन को लेकर जहां महिलाएं गंभीर हैं, वहीं पुरुष रुचि नहीं दिखा रहे। इसके पीछे कई सामाजिक कारण हैं। पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता भी वजह हो सकती है। अगर पुरुष अपनी इस सोच का त्याग करके नसबंदी को अपना लें तो फिर जनसंख्या पर जल्द नियंत्रण पाया जा सकता है।

नसबंदी के लिए लगाए जाते हैं विशेष शिविर

डिप्टी सीएमओ डाॅ. अनामिका बिश्नाेई का कहना है कि विभाग द्वारा परिवार नियोजन को लेकर समय-समय पर पुरुष नसबंदी कैंपों का विशेष आयोजन किया जाता है। इन विशेष कैंपों में नसबंदी करवाने वाले पुरुषों को दाे हजार रुपये की राशि बतौर प्रोत्साहन दी जाती है। लेकिन इस सबके बावजूद पुरुष नसबंदी के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अधिकतर घरों में महिलाओं को ही नलबंदी करवाने के लिए बोला जाता है जबकि पुरुषों की नसबंदी ज्यादा आसान है। नसबंदी के बाद दैनिक कार्य जल्दी शुरू किए जा सकते हैं। विभाग द्वारा समय-समय पर नसबंदी के फायदे और नलबंदी की जटिलताओं के बारे में जानकारी भी दी जाती है।

पिछले तीन साल में नलबंदी और नसबंदी का आंकड़ा

वर्ष महिला पुरुष
2020 4147 05
2019 8116 68
2018 8188 45

नाेट: आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग से लिया।

नसबंदी के लिए लगाए जाते हैं विशेष शिविर

डिप्टी सीएमओ डाॅ. अनामिका बिश्नाेई का कहना है कि विभाग द्वारा परिवार नियोजन को लेकर समय-समय पर पुरुष नसबंदी कैंपों का विशेष आयोजन किया जाता है। इन विशेष कैंपों में नसबंदी करवाने वाले पुरुषों को दाे हजार रुपये की राशि बतौर प्रोत्साहन दी जाती है। लेकिन इस सबके बावजूद पुरुष नसबंदी के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं। अधिकतर घरों में महिलाओं को ही नलबंदी करवाने के लिए बोला जाता है जबकि पुरुषों की नसबंदी ज्यादा आसान है। नसबंदी के बाद दैनिक कार्य जल्दी शुरू किए जा सकते हैं। विभाग द्वारा समय-समय पर नसबंदी के फायदे और नलबंदी की जटिलताओं के बारे में जानकारी भी दी जाती है।

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