रिश्वत मामले में खुलासा:रिश्वत की राशि में से विभाग के चपरासी और ड्राइवर को भी दिया जाता था खर्चा

हिसार2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • गिरफ्तार आरोपियों ने उगले राज, ड्रग कंट्रोलर भूमिगत
  • विजिलेंस को रामबिलास ने बताया था कि उसने मॉडल टाउन में मेडिकल हॉल खोलना था

मेडिकल हॉल संचालन के लिए लाइसेंस देने की एवज में 40 हजार रुपयों की रिश्वत लेते हुए एफडीए में ड्रग कंट्रोलर डॉ. सुरेश चौधरी के चपरासी सिवानी वासी रामपाल और ड्राइवर मूलतः भिवानी हाल चरखीदादरी के गांव जगरामबास वासी सुमित को विजिलेंस टीम ने अदालत में पेश किया। इन दोनों को जेल भेज दिया है। इस मामले में शिकायतकर्ता रामायण वासी रामबिलास के अदालत में बयान भी दर्ज हुए हैं। वहीं, भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ होने के बाद से ड्रग कंट्रोलर भूमिगत है। इसकी धरपकड़ के लिए छापामारी जारी है।

सिरसा विजिलेंस में इंस्पेक्टर अनिल ने बताया कि जिला एफडीए कार्यालय में चपरासी रामपाल और ड्राइवर सुमित की आड़ लेकर रिश्वत का खेल चल रहा था। ड्रग कंट्रोलर इन दोनों को डील करने के लिए आगे रखता था। चपरासी को रिश्वत की राशि में से खर्चे पानी के लिए 500-1000 रुपये मिल जाते थे लेकिन ड्राइवर सुमित को 10 हजार मासिक वेतन, गाड़ी के तेल सहित खान-पान का खर्चा मिलता था। सैकड़ों दवा विक्रेता हैं जिनसे रुपये लेने की बात सामने आई है। इस संबंध में साक्ष्य जुटाकर आगामी कार्रवाई करेंगे।

फिलहाल विजिलेंस की उक्त कार्रवाई के बाद साहस जुटाकर मामले में और भी पीडि़त मेडिकल हॉल संचालक शिकायत देने के लिए आगे आ सकते हैं। इधर, दूसरे दिन भी सीनियर ड्रग कंट्रोलर डॉ. रमन श्योराण ने आधे दिन तक अपना फोन बंद रखा। देर शाम को ऑन किया मगर कॉल रिसिव नहीं की। अधिकारियों का डर है कि कहीं भ्रष्टाचार का आंच उन तक न पहुंच जाए।

सोशल मीडिया और ड्रग स्ट्रीट में दिन भर चर्चा

भ्रष्टाचार के आरोप से घिरा ड्रग कंट्रोलर डॉ. सुरेश चौधरी भूमिगत है। इसे विजिलेंस की टीम तलाश रही है। ऐसे में सोशल मीडिया और ड्रग स्ट्रीट पर भगौड़े ड्रग कंट्रोलर की खूब चर्चा रही। हिसार शहर सहित अन्य ब्लॉकों में छोटे-बड़े 1 हजार से ज्यादा मेडिकल हॉल हैं। ऐसा कोई दवा विक्रेता या सप्लायर नहीं जोकि ड्रग कंट्रोलर के विरुद्ध हुई विजिलेंस कार्रवाई पर बात न करता हो। कोई ड्रग कंट्रोलर का पता बताने पर 51 हजार का इनाम देने की पोस्ट लिख रहा है तो कोई भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने वालों की पीठ थपथपा रहे हैं।

अफसर के लिए उगाही करने वाले को करेंगे बेनकाब

आप प्रवक्ता मनोज राठी और राजीव सरदाना का कहना है कि ड्रग कंट्रोलर के लिए उगाही करने वाले सिर्फ चपरासी व ड्राइवर नहीं हैं। और भी दलाल हैं जोकि अलग-अलग ब्लॉक में मौजूद हैं उन्हें भी बेनकाब किया जाएगा। सरदाना ने बताया कि शहर के भीतर भी ड्रग कंट्रोलर ने दलाल बैठा रखे हैं। उनके पास भी पैसा जमा करवाया जाता है, ताकि गुलाबी हाथ उनके हों। अगर किसी भी सत्ताधारी नेताओं ने भ्रष्टाचारियों को बचाने का प्रयास किया तो उनके खिलाफ भी आंदोलन करेंगे। उन मेडिकल हॉल संचालकों से अपील करते हैं जिनसे अवैध वसूली हुई है। वे भी सामने आकर शिकायत देकर एफडीए को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने में सहयोग दें।

यह है मामला

विजिलेंस को रामबिलास ने बताया था कि उसने मॉडल टाउन में मेडिकल हॉल खोलना था। इसके लिए लाइसेंस चाहिए था, जिसके लिए फाइल तैयार करवाकर ड्रग कंट्रोलर डॉ. सुरेश चौधरी के पास आवेदन किया था। 27 जुलाई से लगातार चक्कर काट रहा था लेकिन मुझे कभी आज तो कभी कल लाइसेंस देने के बहाने ड्रग कंट्रोलर टरकाता रहा। मैंने आरटीआई एक्टिविस्ट एवं आप नेता राजीव सरदाना से संपर्क किया था। हम दोनों ने स्टिंग करके लाइसेंस जारी करने के लिए मांगी एक लाख की रिश्वत से 40 हजार में डील पक्की होने की वीडियो रिकॉर्डिंग की। फिर इन्हें पकड़वाने के लिए विजिलेंस को शिकायत दी।

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