किसान आंदोलन के बीच हिसार रेंज IG के निर्देश:SP से सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना भेजने वालों का डाटा जुटाकर कानूनी कार्रवाई करने को कहा, बोले-माहौल खराब नहीं होना चाहिए

हिसारएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
आईजी राकेश आर्य का फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
आईजी राकेश आर्य का फाइल फोटो।

किसान आंदोलन की सक्रियता के चलते सरकार द्वारा इंटरनेट पर रोक लगाए जाने के बाद अब हिसार रेंज आईजी ने पुलिस को निर्देश जारी किया है। आईजी राकेश कुमार आर्य ने सभी एसपी को आदेश जारी करते हुए कहा है कि एक कमेटी बनाकर सोशल मीडिया पर आने वाली पोस्ट को फिल्टर करें और भ्रामक व झूठी सूचनाएं भेजने वालों को ट्रेस करके उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।

ज्ञात रहे कि किसान आंदोलन शुरू होने के बाद इंटरनेट से सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोकने व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब तक तीन बार इंटरनेट पर रोक लगाई जा चुकी है। करनाल में किसानों के पड़ाव के बाद भी 5 जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया गया था। क्योंकि सरकार को आशंका है कि इंटरनेट के कारण सोशल मीडिया पर खबरें जल्दी वायरल हो जाती हैं और इनकी सत्यता की कोई प्रमाणिकता नहीं होती, जिस कारण माहौल खराब होने की आशंका बनी रहती है।

करनाल में किसानों के सिर फोड़ने का आदेश देते हुए एसडीएम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके कारण विवाद पैदा हुआ है। हिसार रेंज आईजी राकेश कुमार आर्य ने पुलिस अधीक्षकों से बैठक करके सोशल अथवा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर एक तरफा व गलत प्रचार को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई है। जिले मे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि को हैंडल करने के लिए पूर्ण प्रशिक्षित टीम का गठन करें, जिसमे 3 से 5 सदस्य होंगे।

यह टीम जिला मे कानून-व्यवस्था से सम्बन्धित सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रुझानों का प्रतिदिन विश्लेषण करेगी व ऐसी भ्रामक सूचनाएं डालने वालों पर नजर रखने के साथ-साथ उनका डाटा भी तैयार करेंगे। टीम ऐसे मामलों पर तत्काल संज्ञान लेकर विश्लेषण करेगी और मामले की वास्तविक तथ्यों की जानकारी लेकर उसे लोगों के सामने स्पष्ट करेगी। फिर ऐसे लोगों की पहचान करके उनके मंसूबों का पता लगाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

सभी एसपी को आदेश हैं कि सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार-प्रसार रोकने के लिए इस बारे मे ज्यादा से ज्यादा लोगों व युवाओं को जागरूक किया जाए। सोशल मीडिया पर कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट, सामग्री डालना अपराध की श्रेणी मे आता है व ऐसी पोस्ट को लाइक करना आगे भेजना भी अपराध की श्रेणी मे आता है। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, खेल अकादमी व ट्यूशन सेंटरों पर भी युवाओं को इस बारे जागरुक करने के लिए अभियान चलाने को कहा गया है। कुछ असमाजिक तत्व सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब व इंस्टाग्राम आदि) के माध्यम से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, शान्ति भंग करने के लिए एक तरफा झूठा वीडियो, ऑडियो वायरल करते हैं। झूठी व भ्रामक सूचनाओं से न केवल लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है, बल्कि कानून व्यवस्था की स्थिति के लिए भी यह एक खतरा है।

खबरें और भी हैं...