कोरोना काल:सोनी बर्न हॉस्पिटल से रेफर रि. टीचर सिविल अस्पताल में 20 मिनट तक तड़पता रहा, , माैत

हिसार6 महीने पहले
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सोमवार को काेविड संक्रमित पांच मरीजाें की माैत के बाद बुधवार काे कुछ मरीजाें काे साेनी बर्न से सिविल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। - Dainik Bhaskar
सोमवार को काेविड संक्रमित पांच मरीजाें की माैत के बाद बुधवार काे कुछ मरीजाें काे साेनी बर्न से सिविल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
  • ऑक्सीजन लेवल 77 से 12 हाेने पर किया भर्ती
  • गुस्साए परिजनाें ने सिविल अस्पताल में किया हंगामा

साेनी बर्न अस्पताल में सोमवार को काेविड संक्रमित पांच मरीजाें की माैत के बाद बुधवार काे कुछ मरीजाें काे यहां से सिविल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। मरीज काफी देर तक सिविल अस्पताल में भर्ती हाेने का इंतजार करते रहे। आराेप है कि एक मरीज काे ताे तब भर्ती किया गया जब ऑक्सीजन लेवल 77 से 12 पर पहुंच गया। भर्ती हाेते ही नारनाैंद के 87 वर्षीय रिटायर्ड अध्यापक दयानंद ने समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने के चलते दम ताेड़ दिया। गुस्साए परिजनाें ने खूब हंगामा किया।

दरअसल, हिसार के साेनी बर्न अस्पताल में साेमवार काे ऑक्सीजन के अभाव में पांच मरीजाें की माैत हाे गई थी। इसके बाद साेनी बर्न अस्पताल काे काेविड केयर सेंटर की सूची से बाहर कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें के निर्देश पर साेनी बर्न अस्पताल में भर्ती मरीजाें काे सिविल अस्पताल में भर्ती करने का आदेश दिया गया। बुधवार शाम को छह मरीजाें काे साेनी बर्न से सिविल में रेफर किया गया। इनमें से दाे ताे दिल्ली के हाेने के कारण मरीज काे दिल्ली लेकर चले गए। तीन काे सिविल अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।

दयानंद के बेटे प्रदीप ने बताया कि पिता काे साेनी अस्पताल से रेफर करने के बाद वह बीस मिनट तक सिविल अस्पताल में खड़ा रहा मगर उनकाे दाखिल नहीं किया गया। डाॅक्टर के सामने हाथ जाेड़े की यदि पिता काे समय पर दाखिल नहीं किया ताे वह मर भी सकते हैं। ऑक्सीजन लेवल भी 44 से 12 तक आ पहुंचा। इसके बाद फिर से मैंने साेनी बर्न अस्पताल के डाॅक्टर के पास कॉल की।

डाॅक्टर के काॅल करने के पांच मिनट बाद ही पिता काे भर्ती करने लिए कहा गया। मैं खुद अस्पताल के अंदर से एक ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर पहुंचा मगर सिलेंडर का पाइप और नली ही निकल गई। पिता काे करीब बीस मिनट बाद भर्ती किया गया मगर पिता ने दाे मिनट बाद ही मेरे ही हाथ में दम ताेड़ दिया। प्रदीप का आराेप है कि सिविल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण ही पिता की माैत हुई है। मामले की शिकायत वह डीसी से भी करेंगे। इस संबंध में चार बार सीएमओ डाॅ. रत्ना भारती से बात करने का प्रयास किया गया मगर बात नहीं हाे सकी।

पांच मरीजाें की माैत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल काे काेविड केयर सेंटर की सूची से बाहर कर दिया था। इसके कारण बुधवार काे छह मरीजाें काे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें के आदेश पर सिविल अस्पताल रेफर किया गया था।'' - डाॅ. रजत साेनी, संचालक, साेनी बर्न अस्पताल, हिसार।

1. सिविल अस्पताल : रोज मरीजाें की संख्या बढ़ रही है। सभी बेड फुल है। 100 से अधिक मरीज अस्पताल में ऑक्सीजन पर हैं। पीएमओ डाॅ. मनीष बंसल का कहना है कि ऑक्सीजन की मांग काे लेकर प्रशासन काे पत्र लिखा है। प्रयास है कि मरीजाें काे किसी तरह की परेशानी न हाेने दी जाए।

2. सेवक सभा अस्पताल : 100 मरीज भर्ती किए हैं, जिनमें से 30 काेविड पेशेंट हैं। पहले अस्पताल काे 90 ऑक्सीजन सिलेंडर दिए जा रहे थे मगर अब कटाैती कर संख्या 37 कर दी है। इसके कारण नए मरीजाें काे भर्ती नहीं किया जा रहा है। यही नहीं पुराने मरीजाें काे भी छुट्टी दी जा रही है।

3. आधार अस्पताल : अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि थाेड़ी बहुत परेशानी ऑक्सीजन की कमी से हाे रही है। हालांकि कम ऑक्सीजन सिलेंडर से ही काम चलाया जा रहा है। यहां पर भी बेड फुल हैं।

4. सर्वाेदय अस्पताल : दाे दिन से नए मरीजाें काे भर्ती करना बंद कर दिया है। पहले अस्पताल काे करीब 90 सिलेंडर मिलते थे, अब करीब 40 ही दिए जा रहे हैं। अस्पताल के निदेशक डाॅ. उमेश कहते हैं कि मरीजाें काे ऑक्सीजन नहीं मिलने से परेशानी हाेती है। नए मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे।

5. सपरा हाॅस्पिटल : ऑक्सीजन सिलेंडरों में कटाैती के कारण अस्पताल प्रबंधन ने नए एडमिशन से इनकार कर दिया है। मरीज यदि छुट्टी लेकर जा रहे हैं ताे उनके स्थान पर नए मरीजाें काे भर्ती किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजाें की संख्या बढ़ने पर प्रशासन सिलेंडर उपलब्ध करवा रहा है।

6. जिंदल अस्पताल : यहां मरीजाें की संख्या अधिक है। 300 से 400 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑक्सीजन कमी नहीं है। प्रयास है कि मरीजाें काे समय पर उपचार दिया जाए।

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