सतलोक आश्रम वाला रामपाल एक और केस में बरी:ड्रग्स के बाद बंधक बनाने के केस में मिली राहत, लेकिन जेल में ही रहेगा; जिला जज ने सरकार की अपील खारिज की

हिसार3 महीने पहले
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ड्रग्स मामले में राहत मिलने के बाद सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को कोर्ट ने एक और मामले में बरी कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायधीश अरुण कुमार सिंघल की कोर्ट ने सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने और बंधक बनाने के केस में सुनवाई करते हुए रामपाल समेत 5 आरोपियों को बरी किया है। इस मामले में सरकार की तरफ से जिला कोर्ट में अपील की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 2017 में रामपाल और बाकी आरोपियों को बरी कर दिया था। उसके बाद सरकार ने ऊपरी कोर्ट में अपील की थी, लेकिन सेशन कोर्ट ने भी निचली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।

बरवाला थाना पुलिस ने 17 नवंबर 2014 को सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल, बधावड़ के रामफल, भटगांव के राजेंद्र कुमार, रोहतक के बिजेंद्र, इमलौटा के प्रीतम के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, बंधक बनाने के आरोपों में केस दर्ज किया था। इस केस पर सुनवाई करते हुए 29 अगस्त 2017 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मुकेश सैनी की कोर्ट ने सभी पांचों आरोपियों को केस से बरी कर दिया था। निचली कोर्ट के रामपाल समेत पांचों आरोपियों को बरी करने के बाद सरकार ने जिला कोर्ट में अपील की थी। तीन साल चली कार्रवाई के बाद जिला कोर्ट ने निचली कोर्ट का फैसला बरकार करते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

हत्या केस में दोषी रामपाल हिसार सेंट्रल जेल में बंद
इस केस के अलावा रामपाल को ड्रग्स केस में पिछले दिनों बरी किया जा चुका है। सतलोक आश्रम का संचालक रामपाल फिलहाल हत्या के केस में आखिरी सांस तक उम्रकैद की सजा भुगत रहा है और हिसार सेंट्रल जेल में बंद है। रामपाल के खिलाफ देशद्रोह व ज्यादा संख्या में गैस सिलेंडर रखने का केस चल रहा है। नवंबर 2014 में रामपाल के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में उपद्रव हुआ था, जिसमें आश्रम के 6 अनुयायियो की मौत हुई थी। इस विवाद को लेकर सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल समेत 22 अन्य के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, सरकारी ड्यूटी में बाधा, ज्यादा मात्रा में दवाइयां रखने, गैस सिलेंडर आदि के स्टॉक से जुड़े केस दर्ज किए गए थे।

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