नाकाम सिस्टम:‘भगवान’ कह रहे - सॉरी ऑक्सीजन बेड खाली नहीं, एंबुलेंस में मरीज लेकर भटक रहे परिजन

हिसार6 महीने पहले
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सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में कोरोना पेशेंट की कुछ दूर चलने पर सांस फूल गई। महिला फर्श पर गिर गई। परिजनों ने किसी तरह महिला को उठाकर वार्ड में भर्ती कराया। {फोटो: रॉकी कुमार। - Dainik Bhaskar
सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में कोरोना पेशेंट की कुछ दूर चलने पर सांस फूल गई। महिला फर्श पर गिर गई। परिजनों ने किसी तरह महिला को उठाकर वार्ड में भर्ती कराया। {फोटो: रॉकी कुमार।
  • ऑक्सीजन कोटा तय करने के तीन दिन बाद भी अस्पतालों में प्राणवायु कम
  • ऑक्सीजन की कटौती के बाद हालात और भी बेकाबू : आईएमए प्रधान
  • अस्पतालों में रोजाना बढ़ रही ऑक्सीजन की खपत, मरीज बेहाल

कोरोना का संक्रमण लगातार सांसें छीन रहा है। बढ़ते मामले के बीच सिस्टम पूरी ऑक्सीजन देने में नाकाम है। कोविड अस्पताल संचालक उपलब्ध ऑक्सीजन के अनुसार ही मरीज दाखिल कर रहे हैं। इस कारण सिविल अस्पताल और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में मरीजों का लोड डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गया है। ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने लगी है।

जीवन रक्षक उपकरण सीमित के कारण गंभीर रोगी बिना वेंटिलेटर दम तोड़ रहे हैं। अधिकांश ऐसे रोगी हैं, जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 80 से नीचे है, मगर इनकी जान बचाने के लिए विभाग के पास पूरे इंतजाम नहीं है।

कोविड अस्पतालों में हालात ये कि भगवान (यानि डॉक्टर) बेड खाली नहीं बताकर सॉरी कहकर नये मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर रहे हैं। मौजूदा हालातों में जिन गंभीर रोगियों को वेंटिलेटर की जरूरत है, उनकी सांसें ऑक्सीजन बेड्स पर उखड़ रही हैं। बेड की तलाश में मरीज को एंबुलेंस में ऑक्सीजन मास्क लगाए तीमारदार दिनभर भटक रहे हैं।

इतना ही नहीं सिविल अस्पताल में कई रोगी ब्रॉट डेड पहुंचे। इन्हें आइसोलेशन वार्ड के डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। किसी को वेंटिलेटर नहीं मिला तो कोई बेड की तलाश में भटकता रहा। ऑक्सीजन की कटौती के बाद अस्पतालों के नॉन कोविड वार्ड भी खाली है।

नोट : रोगियों की जान बचाने वाले डॉक्टर को भगवान माना जाता है।

नई गाइडलाइन: डेडिकेटिड अस्पताल रोगियों के इलाज से करेंगे मना तो धारा 188 के तहत होगी कार्रवाई

यहां डिब्बे में सांसें बंद: सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपकरण नहीं किए शुरू

सिविल अस्पताल का आइसोलेशन वार्ड फुल है। अधिकांश सीरियस मरीज हैं। ऑक्सीजन की खपत रोज 160 सिलेंडर तक पहुंच गई है। वहीं, वार्ड को ऑक्सीजन का इमरजेंसी बैकअप देने के लिए कंसंट्रेटर प्लांट शुरू नहीं हुआ है। अभी तक कंसंट्रेटर डिब्बा बंद हैं। अभी प्लांट से आइसोलेशन वार्ड स्थित मेनीफॉल्ड तक कॉपर लाइन को जोड़ने का काम पूरा हुआ है मगर कंसंट्रेटर इन्स्टाॅॅलेशन अटका हुआ है।

किसी ने तड़पकर दम तोड़ा तो किसी को नहीं मिल रहा बेड

1. बुधवार रात करीब 11 बजे मंगाली की करीब 60 वर्षीय वृद्धा को वेंटिलेटर की जरूरत थी। सेचुरेशन लेवल 70 तक पहुंच गया था। परिजन अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। सिविल अस्पताल में भी बेड नहीं मिला। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की डायरेक्टर डॉ. गीतिका के प्रयास से अतिरिक्त ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था हुई। करीब डेढ़ घंटे बाद वृद्धा ने दम तोड़ दिया। 2. ढंढेरी की 68 वर्षीय वृद्धा का सेचुरेशन लेवल 45 तक पहुंच गया था। इन्हें कहीं भी वेंटिलेटर बेड नहीं मिला। ये अग्रोहा मेडिकल कॉलेज पहुंची। वहां ऑक्सीजन बेड मिला मगर आधा घंटा भी सांस नहीं चली। 3. सेक्टर 15 की महिला ने बताया कि तीन दिन से अस्पतालों में बेड्स खाली होने का इंतजार कर रहे हैं। मगर बेड नहीं मिला। मेरी सास व ससुर कोरोना पॉजिटिव हैं और डायबिटिक पेशेंट हैं। 4. सदलपुर के 40 वर्षीय पेशेंट को एंबुलेंस में ऑक्सीजन मास्क लगाए परिजन घूमते रहे। कई अस्पतालों में पूछा मगर सभी बोले कि हमारे यहां बेड ही खाली नहीं है। 5. मेहता नगर की 66 वर्षीय वृद्धा काे वेंटिलेटर कहीं नहीं मिला। सिविल में अप्रोच लगाने पर ऑक्सीजन बेड मिला।

रि. मैटर्न पर टूटा दुखों का पहाड़, बीस दिन के भीतर भाई के बाद बहन को खोया

मैं फतेहाबाद सिविल अस्पताल से रि. मैटर्न हूं। पहले हिसार सिविल अस्पताल में ओटी इंचार्ज कार्यरत थी। हम तीन भाई व तीन बहनें हैं। सबसे छोटे भाई व बहन को कोरोना ने छीन लिया। 10 अप्रैल को ऋषि नगर में रहने वाले भाई और 28 अप्रैल को मुलतानी चौक में रहने वाली बहन की कोरोना से मौत हो गई। भाई ने ओरल सर्जरी करवाई थी, तब वह कोरोना संक्रमण की चपेट में आए थे। कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करतेे हुए दम तोड़ दिया। अब छोटी बहन भी छोड़कर चली गई। ऐसी त्रासदी कभी नहीं देखी और दोबारा कभी न दिखाए भगवान।

ये कोविड अस्पताल बैकफुट पर आए

ऑक्सीजन की कमी से पांच मौतों के बाद प्रशासन ने सोनी बर्न अस्पताल को डीसीएचएस लिस्ट से हटा दिया है। इनके अलावा गोस्वामी अस्पताल और मेडिसिटी अस्पताल प्रबंधन ने अपना नाम डीसीएचएस लिस्ट से हटाने की अर्जी विभाग का दी है। दो-तीन अस्पताल ऐसे हैं जोकि मौखिक तौर पर लिस्ट से नाम हटाने की कह रहे हैं।

2 बार ऑक्सीजन सप्लाई मिले: नलवा

आईएमए के प्रधान डॉ. जेपीएस नलवा के अनुसार ऑक्सीजन कटौती के बाद हालात और भी बेकाबू हो गए हैं। जिला प्रशासन को 2 समय ऑक्सीजन की सप्लाई कोविड-नॉन कोविड अस्पतालों को देनी चाहिए। इससे मरीजों की जान भी बचेगी। दिन में एक बार सप्लाई देना गलत है। सिलेंडर खत्म होने की स्थिति में दोबारा सप्लाई नहीं मिलने से रिस्क बढ़ जाता है।

15 से 20 बेड वाले अस्पताल भी कर सकेंगे कोविड पेशेंट का इलाज

स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना रोगियों के लिए बेड्स व ऑक्सीजन कंजप्शन के तहत नया प्रोटोकॉल लागू करने के दिशा-निर्देश दिए। बेड्स की संख्या बढ़ाने के लिए अब हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला, करनाल व सोनीपत में 15 से 20 बेड्स वाले डेडिकेटिड कोविड अस्पताल संचालक कोरोना रोगियों को भर्ती करके इलाज कर सकेंगे।

10 या 10 से कम बेड्स वाले अस्पताल को अनुमति प्रदान नहीं होगी। इसके अलावा एक बार जितने बेड्स उपलब्ध करवा दिए, उसके बाद अस्पताल संचालक बेड्स बढ़ा सकते हैं मगर घटा नहीं सकते। अगर किसी अस्पताल प्रबंधन ने बिना प्रशासनिक अनुमति के कोरोना रोगियों का इलाज किया तो उनके विरुद्ध धारा 188 व ऐपिडेमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यालय के निर्देशानुसार इमरजेंसी स्थिति में सरकारी व निजी कोविड अस्पतालों को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाने के लिए कंसंट्रेटर या सिलेंडर युक्त व्हीकल की व्यवस्था रखें। ऑक्सीजन जीवन रक्षक आवश्यक दवा है। किस रोगी को कितनी सेचुरेशन के तहत ऑक्सीजन देनी है उसको लेकर भी दिशा-निर्देश जारी हुए हैं।

एडवोकेट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट के प्रदेश चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। इसमें बताया कि हरियाणा में ऑक्सीजन की कमी से काेराेना पेंशेंट मर रहे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट हरियाणा सरकार को निर्देश दे कि उचित मात्रा में सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्ध करवाए ताकि कोरोना मरीजों की जान बचाई जा सके।

कोविड काल में हेल्पलाइन नंबर

  • सुबह 8 से रात 8 बजे तक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं। हेल्पलाइन नंबर 7497841598 पर एवं राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 18005990019 पर भी परामर्श ले सकते हैं।
  • ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडेसिविर इंजेक्शन और अन्य जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी से संबंधित सूचना हरियाणा पुलिस को मोबाइल न. 70870-89947 और टोल-फ्री नंबर 1800-180-1314 पर दी जा सकती है।

18+ काे कल से लगेगा टीका

कोरोना से बचाने के लिए 18 प्लस को 1 मई से टीका लगेगा। इसके लिए पहले सेल्फ रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसकी शुरुआत बुधवार से हो चुकी है। युवा selfregistration.cowin.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

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