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राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र एनआरसीई के वैज्ञानिकाें काे बड़ी जिम्मेदारी:पशुओं-मनुष्यों में होने वाले कोरोना के इलाज के लिए एंटी वायरल ड्रग तैयार करेंगे हिसार एनआरसीई समेत 4 संस्थानों के साइंटिस्ट

हिसार19 दिन पहलेलेखक: महबूब अली
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राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र एनआरसीई के वैज्ञानिकाें काे काेराेना वायरस से बचाव की दिशा में बड़ी जिम्मेदारी दी है। संस्थान काे नेशनल एग्रीकल्चर साइंस फंड यानि आईसीएआर ने 3.06 कराेड़ का प्राेजेक्ट दिया है। इसके तहत संस्थान के वैज्ञानिक 3 अन्य संस्थान आईवीआरआई इज्जतनगर, भाेपाल का एनआईएचएसएडी, एनआईवीईडीआई बेंगलुरु के वैज्ञानिकाें के साथ मिलकर पशुओं व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना वायरस से बचाव के लिए हर्बल दवा तैयार करेंगे। यह पाैधाें की मदद से तैयार की जाएगी।

काेराेना के पशुओं से मनुष्य में फैलने की संभावनाओं पर रिसर्च की जाएगी। देखा जाएगा कि पशुओं व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना वायरस में क्या डिफरेंस है।

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. यशपाल, नाेडल अधिकारी व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. बीआर गुलाटी ने बताया कि रिसर्च में देखा जाएगा कि पशु व मनुष्य में हाेने वाले काेराेना के बीच क्या संबंध है। पता लगाएंगे कि पशुओं में होने वाला काेराेना वायरस मनुष्य काे भी चपेट में ले सकता है या नहीं। जल्द ही काेराेना से बचाव के लिए एंटी वायरल ड्रग तैयार करने का कार्य शुरू किया जाएगा।

संस्थान के वैज्ञानिकाें काे इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं। प्राेजेक्ट का नेतृत्व अश्व अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. बलदेव राज गुलाटी करेंगे। उनके साथ वैज्ञानिक डाॅ. नवीन कुमार, डाॅ. रियेश कुमार, डाॅ. शनमुगा सुंदरम भी रिसर्च में शामिल रहेंगे।

जानिए.. पशु में काैन से काेराेना वायरस के विषाणु पाए जाते हैं

  • डाॅ. गुलाटी के अनुसार घाेड़ाें में इक्वाइन, भैंस और गाय में बाेवाइन तथा मुर्गियाें में इन्फेक्शस ब्राेकायटिस, सुअर में कई तरह के काेराेना वायरस के विषाणु पाए जाते हैं। इन सभी मनुष्यों से जोड़कर अध्ययन किया जाएगा।
  • भारत में अधिकतर मिले मामलाें में वर्तमान में बी.1.617 भी पाया जा रहा है। इस स्ट्रेन का नाम अब डब्ल्यूएचओं ने डेल्टा रखा है। जाे काफी संक्रामक है। यह स्ट्रेन एक से दूसरे काे तेजी से फैलता है। सावधानी ही इस स्ट्रेन से बचाव का उपाय है।
  • एनआरसीई के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. बीआर गुलाटी ने बताया कि टाइगर में काेराेना वायरस का मामला सामने आया था। टाइगर व अन्य जंगली पशुओं में हाेने वाले काेराेना वायरस पर भी रिसर्च की जाएगी। चाराें संस्थान के वैज्ञानिक रिसर्च के संबंध में हर जानकारी एक दूसरे से भी साझा करेंगे।

आईसीएआर की तरफ से संस्थान काे शोध और दवा के निर्माण के लिए 3.06 कराेड़ का प्राेजेक्ट मिला है। वैज्ञानिक जल्द ही एंटी वायरल ड्रग बनाने की दिशा में काम शुरू करेंगे। देश में इस तरह का प्राेजेक्ट मिलना भी संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है।
- डाॅ. यशपाल, निदेशक, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान, हिसार।

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