नेशनल डॉक्टर्स डे आज / कोई योग व पक्षियों को दाना डाल कर रहा दिन की शुरुआत तो किसी को साइकिलिंग से मिल रही एनर्जी

डॉ. मेजर सुभाष खतरेजा डॉ. मेजर सुभाष खतरेजा
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डॉ. मेजर सुभाष खतरेजाडॉ. मेजर सुभाष खतरेजा

  • कोरोना काल में डॉक्टर्स से समझा कैसे हर परिस्थिति में खुद को रख पाते हैं फिट

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:35 AM IST

हिसार. (अंशुल पांडेय) आज नेशनल डॉक्टर्स डे है। डॉक्टर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं। शायद इसी वजह से डॉक्टर्स को लोग धरती पर भगवान का दर्जा देते हैं। मगर सुबह से शाम दूसरों के दर्द की दवा बताते ये डॉक्टर्स खुद को कैसे रिलैक्स और रिफ्रेश रख पाते हैं।

अब जब कोविड-19 जैसी महामारी ने अपने पैर पसार रखे हैं तो ऐसे में स्ट्रेस फ्री रहकर डॉक्टर्स सकारात्मकता के साथ मरीज को सब ठीक हाे जाने की उम्मीद दे पाते हैं। हमने कोविड-19 के इस दौर में डॉक्टर्स से बात कर यह समझने की कोशिश कि किन तरीकों से डॉक्टर्स खुद को शांत, रिलैक्स और रिफ्रेश रख पाते हैं।

डॉ. रमेश पूनिया, बायोलॉजिस्ट: पीसफुल माइंड के लिए 20 साल से कर रहे मेडिटेशन 
कोरोना संकट के दौर में बायोलॉजिस्ट डॉ. रमेश पूनिया निरंतर सेवा में जुटे हैं। डॉ. पूनिया बताते हैं कि दूसरों की बेहतर मदद के लिए खुद का फिट और फाइन रहना बेहद जरूरी है। वह पिछले 20 सालों से पीसफुल माइंड के लिए मेडिटेशन और फिट व फाइन रहने के लिए योग के साथ जॉगिंग कर रहे हैं। मानसिक शांति के लिए बहुत जरूरी है कि हम समाज के कुछ अच्छा करें। सुबह उठते ही वो सबसे पहले चिड़ियों को दाना डालते हैं। गाय और कुत्ते के रोटी डालते हैं, जिससे अपार आत्मिक संतुष्टि का अनुभव मिलता है।

डॉ. मेजर सुभाष खतरेजा, नोडल ऑफिसर: रोज साइकिलिंग करते हैं, ओम का उच्चारण भी
आईडीएसपी वार रूम के नोडल ऑफिसर डॉ. मेजर सुभाष खतरेजा ने बताया कि वह रोज करीब पांच से सात किलोमीटर तक साइकिलिंग करते हैं, जिससे एनर्जीटिक पॉवर को फील कर पाते हैं और यही एनर्जी उनके काम में सहायक बनती है। आम दिनों में वो हर रोज करीब 20 से 25 किलोमीटर साइकिलिंग करते थे, मगर अब कोविड-19 की वजह से इस समय को कम कर दिया है। इसके साथ ही मन के शांति और सुकून के लिए ओम का उच्चारण करने के साथ अपने मनपसंद भजनों को भी सुनते हैं।

डॉ. समीर कंबोज, मेडिकल ऑिफसर: फैमिली के साथ बिताते हैं क्वालिटी टाइम
डॉ. समीर कंबाेज ने बताया कि किसी भी इंसान के लिए परिवार और अपनों का साथ सबसे बड़े एनर्जी सोर्स का काम करता है। हर दिन जब काम से थक कर घर पहुंचता हूं और फैमिली के साथ समय बिताने का मौका मिलता है तो कम हुई एनर्जी और पॉजिटिविटी को एक बार फिर इकट्ठा कर पाता हूं। बच्चों के साथ खेलकर सारी थकान दूर हो जाती है और मन को एक सुकून मिलता है तो अपने काम और उस काम से जुड़ी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा पाता हूं। खुद को फिट रखने के लिए योग व प्राणायाम भी करते हैं।

डॉ. नवनीत अग्रवाल, नोडल आॅफिसर: पुराने नगमे सुनकर खुद को रखते हैं रिलेक्स
कोविड-19 नोडल आॅफिसर डॉ. नवनीत अग्रवाल ने बताया कि पुरानी फिल्मों के गीत मन को एक अलग ही सुकून देते हैं। खाली समय में खुद को रिलेक्स फील करवाने के लिए पुराने नगमे सुनते हैं। मोहम्मद रफी और सोनू निगम के गानें पसंद हैं। साथ ही वह रोज कुछ समय अपनी मां के साथ भी बिताते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है मां का प्यार हर थकान को दूर करने की सबसे कारगर दवा है, मां के पास समय बिताने के बाद खुद ब खुद एक अलग पॉजिटिव एनर्जी का एहसास होता है और यही दूसरों की मदद करने का भाव भी पैदा होता है।

डॉ. संजीव सामरिया, मेडिकल ऑफिसर, अग्रोहा हरियाली के बीच आते हैं पॉजिटिव थाट्स
डॉ. संजीव सामरिया ने बताया कि वह रोज करीब पांच से साढ़े पांच बजे के बीच उठ जाते हैं। फिर 15 मिनट की वाक के बाद कुछ देर पेड़-पौधों के बीच बिताते हैं। अग्रोहा पीएचसी में लगे हर्बल पार्क की वो खुद देखभाल करते हैं। पेड़-पौधे के पास ऐसी पॉजिटिव एनर्जी होती है जिससे खुद ब खुद हमारे अंदर से भी पॉजिटिव थाट्स जेनरेट होने लगते हैं। खुद को फिट और फाइन रखने के लिए सुबह उठते ही करीब 8 गिलास गर्म पानी पीते हैं ताकि खुद तंदुरूस्त रहकर मरीजों तक हर सुविधा को समय पर मुहैया करवा सके।

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