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मांगाें को लेकर धरना:एचएयू-लुवास के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मी दो 2 घंटे धरने पर बैठे, पांच दिन का सप्ताह लागू करने,कैशलेस मेडिकल सुविधा समेत विभिन्न मांगें उठाईं

हिसार2 महीने पहले
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लुवास के गैर शिक्षक कर्मचारी धरना देकर प्रदर्शन करते हुए। - Dainik Bhaskar
लुवास के गैर शिक्षक कर्मचारी धरना देकर प्रदर्शन करते हुए।

एचएयू और लुवास के शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी संगठनाें के पदाधिकारियाें ने विभिन्न मांगाें पर मंगलवार काे दाेनाें विवि के प्रशासनिक भवनाें के सामने धरना दिया। जल्द मांगें पूरी न हाेने पर बड़े आंदाेलन की चेतावनी दी।

लुवास प्राध्यापक संगठन एवं लुवास के नॉन टीचिंग संगठन ने विश्वविद्यालय में 5 दिन का सप्ताह लागू करवाने एवं सभी कर्मचारियों के कैशलेस मेडिकल कार्ड बनवाने की मांग पर 2 घंटे तक धरना दिया। धरना सांकेतिक सुबह 9 से 11 बजे तक चला। इसकी अध्यक्षता लुवास प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. अशोक मलिक ने की। उन्होंने धरने को संबोधित करते हुए बताया कि पांच दिन का सप्ताह एवं कैशलेस मेडिकल कार्ड पूरे हरियाणा में पहले से लागू है तथा हम पिछले तीन महीने से विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध कर रहे हैं कि इसे लुवास में भी लागू किया जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह 10 दिन के अंदर-अंदर लागू हो जाएगा, परन्तु आज तक इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है।

इसी प्रकार जो पांच दिन का सप्ताह है उसे लागू करने के लिए विवि ने एक कमेटी का गठन किया। जिसकी अध्यक्षता डीन कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस डॉ. संदीप गेरा कर रहे थे। बैठक में नॉन टीचिंग के अध्यक्ष दयानन्द सोनी ने बताया कि हम बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन को इन मांगों से अवगत करवा चुके हैं मगर मांग काे पूरा नहीं किया जा रहा है। धरने को एचएयू प्राध्यापक संघ के प्रधान डॉ. प्रदीप चहल एवं उनके नॉन टीचिंग एसोसिएशन के प्रधान दिनेश ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एचएयू के टीचर एवं नॉन टीचिंग लुवास की इन मांगों के लिए लुवास कर्मचारियों का साथ देंगे।

जीजेयू में वीसी दफ्तर के बाहर दिया धरना

जीजेयू में वीसी कार्यालय के बाहर यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ व गैर शिक्षक संघ के शिक्षकों ने तीन घंटे का सांकेतिक धरना दिया। सरकार यूनिवर्सिटियों में शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्तियां अपने हाथ में लेने का विराेध किया। प्राे विनाेद गाेयल ने बताया कि सरकार पहले भी एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालयों में ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने का प्रयास कर चुकी है।

हरियाणा सरकार में बैठे हुए कुछ उच्च अधिकारी विश्वविद्यालय को आर्थिक सहयोग देने की वजह इस तरह के तुगलकी फरमान जारी करते हैं। जिसकी विश्वविद्यालय का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा और विश्वविद्यालय खत्म जाएंगे। यदि इस आदेश को सरकार वापस नहीं लेती है ताे यह आन्दोलन और भी आक्रमक होगा।

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