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हुडा में टेंडर पर सवाल:हर साल बदले नियम और शर्तें, 3 साल से एक ही एजेंसी काे दिया जा रहा ठेका

हिसार22 दिन पहले
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एचएसवीपी यानी हुडा की हाॅर्टिकल्चर विंग में पिछले तीन साल से एक ही एजेंसी काे बार-बार 17 टेंडर अलाॅट करने का मामला सामने आया है। दि हिसार कमल एजेंसी के संचालक शमशेर सिंह ने उच्च अधिकारियाें काे शिकायत कर हुडा के जिम्मेदार अधिकारियाें काे लीगल नाेटिस भेजा है।

साथ ही एजेंसी ने विजिलेंस काे भी शिकायत भेजी है। अधिकारियों पर मिलीभगत कर टेंडर के नियम और शर्ताें में खुद बदलाव करने पर सवाल उठाए हैं। इस शिकायत के बाद एजेंसी काे टेंडर अलाॅट करने के मामले में शामिल हाॅर्टिकल्चर विंग के अधिकारियाें और कर्मचारियाें में खलबली मच गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अधिकारियाें की मिलीभगत से सरकार काे रेवेन्यू का नुकसान हुआ है। साथ ही काम करने वाली लेबर काे मिलने वाले ईपीएफ, ईएसआई व अन्य लाभ नहीं मिल पाए। एक एजेंसी काे लाभ देने के लिए 18% जीएसटी काे 5% भी दर्शाया गया है। भिवानी, हिसार, फतेहाबाद, हांसी, आदमपुर, सिरसा में हाॅर्टिकल्चर विंग में माली कम चाैकीदार लगाने के मामले में एजेंसी से टेंडर के माध्यम से मैनपावर मांगी थी।

जानिए... शिकायतकर्ता ने हर बार बदलते गए नियमों पर क्या उठाए सवाल

1. वर्ष 2016-17 में एजेंसी काे टेंडर अलाॅट हाे गया। अगले वर्ष 2017-18 में जब दाेबारा टेंडर निकाले गए ताे डीएनअाईटी यानी डिटेल नाेटिस इनवाइट टेंडर में नियम व शर्तें बदल दी गई। इसमें यह बदलाव किया गया कि लेबर काे मिलने वाले सभी लाभांश जैसे 4.75% ईएसआई, 19.31 % पीएफ और 18 % जीएसटी प्रति महीने की राशि यह एजेंसी संबंधित विभागाें में जमा करवाकर विभाग काे जमा रसीद के आधार पर क्लेम कर सकेंगे अन्यथा ये पैसे एजेंसी के रनिंग बिल से काटकर विभाग अपने स्तर पर जमा करवा देंगे। एचएसवीपी ने 4 सितंबर 2017 काे 1% कम रेट भरने वाली उसी एजेंसी काे टेंडर अलाॅट कर दिया। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार सर्विस चार्ज 2% से कम रेट भरने वाली एजेंसी काे टेंडर अलाॅट नहीं किया जा सकता।

2. वर्ष 2018-19 में अधिकारियाें ने फिर से नई चालाकी कर दी गई। इस पर फिर उसी एजेंसी काे टेंडर देने के लिए दूसरी एजेंसी द्वारा डाले गए 1.31 प्रतिशत के रेट काे 2 प्रतिशत सेवा चार्ज से कम दिखाकर एजेंसी काे बाहर कर दिया। जबकि वर्ष 2017-18 में चहेती एजेंसी काे भिवानी के सुरेंद्र सिंह मेमोरियल पार्क का टेंडर 1 प्रतिशत माइनस रेट में दिया गया था।

3. वर्ष 2019-20 में फिर नियमाें में बदलाव कर दूसरी एजेंसियाें काे भ्रमित किया गया। इस बार रेट प्रणाली काे छाेड़कर टेंडर प्रति व्यक्ति प्रति महीने के हिसाब से जाेड़ दिया गया ताकि चहेती एजेंसी काे मिलने वाली लाभ दर काे छिपाया जा सके। रेट में 5 प्रतिशत की अधिक राशि की जस्टिफिकेशन नाेटिंग में जाेड़ दी गई।

नियम में क्या: चीफ सेक्रेटरी हरियाणा ने लेटर नंबर 43/5/2001-3जीएस-2015 के अनुसार जाे एजेंसी या ठेकेदार सर्विस चार्जेज 2 प्रतिशत से कम मांगते हैं ताे उन्हें टेंडर अलाॅट ना किया जाए। एजेंसी काे इसके अलावा मिनिमम वेजेज, 13.61 प्रतिशत ईपीएफ, 4.75 ईएसआई , सर्विस टैक्स 18 प्रतिशत, टीडीएस 2 प्रतिशत, लेबर सेस 1 प्रतिशत जमा कराना हाेगा।

सीधी बात- विनय लाेहान, एक्सईएन हुडा हार्टिकल्चर विंग

Q. 17 टेंडर मामले काे लेकर हाॅर्टिकल्चर विंग पर आराेप लग रहे हैं कि मिलीभगत कर टेंडर की नियमाें व शर्ताें में बदलाव कर बार-बार एक एजेंसी काे दे रहे हैं?
A. ऐसा कुछ नहीं है। जाे भी टेंडर दिए गए हैं नियमाें के अनुरूप हुए हैं। जाे एजेंसी आराेप लगा रही है उसके टेंडर भरने में खुद से ही कमी रह जाती है और फिर वह इश्यू बनाता रहता है? जस्टिफिकेशन का मैटर ड्राइंग ब्रांच का है। हमने दूसरी ब्रांच की ड्राइंग ब्रांच से भी कनफर्म कर लिया। उन्हाेंने सही बताया है।

Q. जब टेंडर लगता है और ओपन हाेता है ताे इसमें काैन-काैन से ब्रांच व अधिकारी हाेते हैं?
A. इसमें अकाउंट ब्रांच हाेती है। सुपरिंटेंडेंट और एक्सईएन हाेता है। ये काेई इश्यू नहीं है, ये अपनी माेनाेपाेली बना रहा है।

Q. एजेंसी का आराेप है कि हाॅर्टिकल्चर विंग के अधिकारी अपनी माेनाेपाेली चला रहे हैं?
A. नहीं ऐसा कुछ नहीं है। अकाउंट ब्रांच अधिकारियाें से संपर्क कर सकते हैं। नियमाें में क्या बदलाव हुए हम ये क्लियर करेंगे।

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