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  • The Former Inspector Of The Forest Department, Who Saved Three Kittens From Hunting Dogs, Is Now Taking Care Of Himself.

जीव प्रेम ऐसा कि खुद को भी भूल जाते हैं:शिकारी कुत्तों से बिल्ली के तीन बच्चों काे बचाया वन्य विभाग के पूर्व इंस्पेक्टर अब खुद ही पाल रहे

हिसार8 दिन पहले
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शिकारियों से बचाए बिल्ली के बच्चों को दुलार करते वन्य प्राणी विभाग के पूर्व इंस्पेक्टर रामेश्वर दास व अन्य। - Dainik Bhaskar
शिकारियों से बचाए बिल्ली के बच्चों को दुलार करते वन्य प्राणी विभाग के पूर्व इंस्पेक्टर रामेश्वर दास व अन्य।
  • विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद भी जीवों के संरक्षण में जुटे रामेश्वर दास

वन्य प्राणी विभाग में इंस्पेक्टर रहे रामेश्वर दास रिटायर्ड हाेने के बाद भी शिकारी कुत्तों व अन्य जंगली जानवराें से वन्य प्राणियाें काे बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दाे दिन पहले ही उकलाना क्षेत्र में शिकारी कुत्तों ने बिल्ली और उसके तीन बच्चाें काे घेर लिया। मामले की सूचना पाते ही पूर्व इंस्पेक्टर माैके पर पहुंचे और बिल्ली के तीन मासूम बच्चाें काे बचा लिया मगर बिल्ली काे नहीं बचा सके। अब बिल्ली के तीनाें बच्चाें का पूर्व इंस्पेक्टर खुद ही पालेंगे, जिसके लिए वह अपने घर पर लेकर आ गए हैं।

दरअसल, मिल गेट के रहने वाले रामेश्वर दास वन्य प्राणी विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। जाे कुछ समय पहले ही रिटायर हाे गए। रिटायर हाेने के बाद भी उनका वन्य प्राणियाें के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ। रिटायर्ड हाेने के बाद भी उनके पास विभिन्न गांवाें से शिकारियों से वन्य प्राणियाें काे बचाने के लिए काॅल आती रहती हैं।

पिछले दिनाें ही इंस्पेक्टर ने जंगली बिल्ली के तीन, काेयल के दाे, माेर के तीन और उल्लू के दाे बच्चाें काे कुत्ते और अन्य से बचाया था। जिनका करीब खुद ही पालन पाेषण किया। हालांकि बाद में बड़े हाेने पर इनकाे जंगल में ही छाेड़ दिया गया था। रामेश्वर दास का कहना है कि वन्य प्राणियाें काे बचाने में मन काे संतुष्टि मिलती है। वह साेशल मीडिया के माध्यम से लाेगाें से भी अपील कर रहे हैं कि वन्य प्राणियाें की हर संभव मदद करें। ताकि वन्य प्राणियाें की घटती जा रही संख्या पर अंकुश लगाया जा सके।

कई सामाजिक संगठन भी कर चुके सम्मानित

वन्य प्राणियाें काे बचाने में अहम याेगदान देने वाले पूर्व इंस्पेक्टर रामेश्वर दास काे कई सामाजिक संगठन सम्मानित कर चुके हैं। रामेश्वर दास का कहना है कि वह वन्य प्राणियाें काे अपने बेटे की तरह पालते हैं। बाेतल में डालकर ही उन्हें दूध पिलाया जाता है।

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