• Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Hisar
  • The HR Manager's Nakedari Chhedkar Couple Decided To Help The Destitute, So Far 12 Thousand People Have Given Hope

मिसाल:एचआर मैनेजर की नाैकरी छाेड़कर दंपति ने बेसहारा लोगों की मदद करने की ठानी, अब तक 12 हजार लोगों काे दिया आसरा

हिसार2 वर्ष पहलेलेखक: महबूब अली
  • कॉपी लिंक
हिसार के आश्रम में जरूरतमन्दों को खाना खिलाती सामाजिक कार्यकर्ता सन्तोष कुमारी। - Dainik Bhaskar
हिसार के आश्रम में जरूरतमन्दों को खाना खिलाती सामाजिक कार्यकर्ता सन्तोष कुमारी।
  • दंपति ने गुड़गांव में खोला था पहला आश्रम, दूसरा छह माह पहले हिसार अनाज मंडी के पास खोला

मूलरूप से दिल्ली और फिलहाल हिसार की अनाज मंडी के पास रहने वाला एक दंपति दूसराें के सामने सेवा की मिसाल पेश कर रहा है। मानव सेवा में मन ऐसा रमा कि अच्छी खासी नाैकरी छाेड़कर दाेनाें फुल टाइम इसी कार्य में जुट गए। दरअसल, करीब 13 साल पहले दंपति ने गुड़गांव में एक बुजुर्ग काे सड़क किनारे तड़पते हुए देखा ताे उसका इलाज कराया। इसके बाद दंपति ने जरूरतमंदाें काे सेवा करने की ठानी। दंपति अब तक दिल्ली और हिसार में करीब 12 हजार लाेगाें काे आश्रम में सहारा दे चुका है।

फिलहाल आश्रमों में 150 लोग रह रहे

मूलरूप से दिल्ली के बसंतकुंज और वर्तमान में हिसार की अनाज मंडी के पास रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष कुमार ने बताया कि वर्ष 2007 में वह गुड़गांव की टेलीकाॅम कंपनी में एचआर मैनेजर थे। उनकी पत्नी संताेष दूसरी कंपनी में एचआर मैनेजर थी। शुरू में दिल्ली के बसंतकुंज में बेसहारा लाेगाें काे सहारा देना शुरू किया। दाेनाें ने नाैकरी छाेड़ दी और छत्रपुर में आश्रम खाेल दिया। जहां अभी 100 लाेग रह रहे हैं। हिसार अनाज मंडी स्थित कैदारनाथ धर्मशाला में छह माह पहले आश्रम खाेला। जहां 50 से अधिक बेसहारा लाेग रह रहे हैं।

खाने, कपड़े धाेने और इलाज का करते हैं इंतजाम

दंपति लाेगाें के सहयाेग से बेसहारा लाेगाें के खाने से लेकर कपड़े धाेने, उपचार का इंतजाम करते हैं। दिल्ली और हिसार में अब तक 12 हजार से अधिक लाेगाें काे आसरा दे चुके हैं। पचास से अधिक काे अपनाें से मिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। हर्ष कुमार का कहना है कि प्रतिमाह दिल्ली और हिसार के आश्रम में करीब चार लाख खर्च हाे रहा है।

जरूरतमंदों का इलाज करा अपनों से मिलवाया

हर्ष कुमार ने बताया कि चालीस साल का बेसहारा और मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति राकेश हिसार रेलवे स्टेशन के पास घूम रहा था। व्यक्ति बाेलने की भी अवस्था में नहीं था। उसकाे उपचार दिलाया। इसके बाद असम में उसके घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। बिहार के पटना का 80 वर्षीय बुजुर्ग भटककर हिसार आ पहुंचा। संस्था ने छह माह तक बुजुर्ग काे आश्रम में रखा और दाे दिन पहले ही साेशल मीडिया के माध्यम से उसके परिजनाें काे सूचना दी।

खबरें और भी हैं...