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ड्रग विभाग की कार्रवाई पर सवाल:जिस मेडिकल हॉल को करना था सील उससे पहले दवाइयां गायब होने पर बिना जांच किए लौटी टीम

हिसार19 दिन पहले
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ड्रग विभाग की नाक तले अस्पतालों से लेकर मेडिकल स्टोर संचालकों ने महंगे दामों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन बिके। - Dainik Bhaskar
ड्रग विभाग की नाक तले अस्पतालों से लेकर मेडिकल स्टोर संचालकों ने महंगे दामों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन बिके।
  • रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का मामला - बड़ा सवाल, आखिर किसकी मिलीभगत से कौन ले गया दवाइयां

कोरोना काल में जीवन रक्षक दवाइयों की धड़ल्ले से कालाबाजारी हुई। ड्रग विभाग की नाक तले अस्पतालों से लेकर मेडिकल स्टोर संचालकों ने महंगे दामों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन बिके। किसी को 21 हजार तो किन्हीं को 40 हजार या इससे ज्यादा भी।

ऐसे में फिर से ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है। रेमडेसिविर की कालाबाजारी के दौरान पकड़े गए चाचा-भतीजा के होली अस्पताल स्थित मेडिकल हॉल को सील करने से पहले वहां से दवाइयों का गायब होना बड़े खेल की तरफ इशारा कर रहा है।

हैरत की बात यह कि दवाइयां कहां गई, कौन लेकर गया और किसकी अनुमति से दवाइयां बाहर निकाली गई, इससे ड्रग अधिकारी खुद को अनजान बता रहे हैं। यह भी बात सामने आई कि दवाइयों को एक अन्य मेडिकल हॉल पर शिफ्ट करके बेचा जा रहा है। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है यह जांच का विषय है।

बता दें कि लाइसेंस सस्पेंड रहने तक दवाइयों को बेचा नहीं जा सकता है। ड्रग विभाग की अनुमति के बिना एक टेबलेट भी दुकान से बाहर नहीं जा सकती है, लेकिन यहां मेडिकल हॉल के सारे रैक खाली हुए हैं। वह भी तब जब उक्त मेडिकल हॉल का संचालक अरुण खुराना अपने भतीजे पार्थ खुराना व नेशनल मेडिकल हॉल संचालक मुकेश मलिक के साथ फरार है।

इन तीनों को कोर्ट ने सरेंडर करने और ऐसा नहीं करने पर पुलिस को आराेपियाें काे गिरफ्तार करके पेश करने के आदेश दिए हैं। इनकी धरपकड़ के लिए पुलिस एनसीआर तक छापामारी कर चुकी है।

जानिए ड्रग कंट्रोलर ने भी मांगे थे इंजेक्शन

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी मामले में ड्रग कंट्रोलर का नाम भी सामने आया था। आरोपी अरुण खुराना की कॉल रिकॉर्डिंग में सामने आया था कि वे खुद इंजेक्शन की डिमांड कर रहे थे, जिन्हें मना किया था।

वहीं कोरोना काल में ड्रग कंट्रोलर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए थे। फोन तक रिसीव नहीं करते थे। मेडिकल हॉल खाली होने के मामले में भी ड्रग कंट्रोलर सुरेश चौधरी से काफी बार संपर्क किया मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

दवाइयां कहां गई जांच का विषय है : एसडीसी

सीनियर ड्रग कंट्रोलर डॉ. रमन श्योराण का कहना है कि होली अस्पताल में जब मेडिकल स्टोर सील करने गए थे लेकिन वह खाली मिला। यह बात अस्पताल प्रबंधन ने लिखकर दी है। पर, दवाइयां कहां गई ये जांच का विषय है। कौन लेकर गया और किसने बाहर निकालने में मदद की, उसका तो जांच से पता चलेगा।

अगर किसी अन्य मेडिकल हॉल पर दवाइयां रखी हुई हैं तो वहां जांच करके सेल-परचेज रिकॉर्ड जांचा जाएगा। अगर खामियां मिलती हैं तो ड्रग एक्ट के तहत कार्रवाई अमल में लाएंगे। पर, हमारी बिना अनुमति के दवाइयां शिफ्ट हुई हैं जोकि गलत है। इसको लेकर ड्रग कंट्रोलर को जांच के लिए कहा जाएगा।

पुलिस ने तीन को पकड़ा था 4 इजेक्शन किए थे बरामद

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का भंडाफोड़ करते हुए होली अस्पताल स्थित मेडिकल हॉल संचालक अरुण खुराना व इसके भतीजे पार्थ खुराना को पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा था। इनसे 2 इंजेक्शन व 40 हजार रुपये बरामद किए थे। आरोपी 40 हजार में एक इंजेक्शन बेचते हुए पकड़ में आए थे। इन्हें इंजेक्शन बेचने वाले नेशनल मेडिकल हॉल के संचालक मुकेश मलिक को गिरफ्तार कर 4 और इंजेक्शन बरामद किए थे।

हालांकि इन तीन की गिरफ्तारी के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस कालाबाजारी में और कौन-कौन शामिल रहे, उनका खुलासा नहीं हुआ। वहीं, चाचा-भतीजा की जमानत को अदालत ने रद्द करके सरेंडर करने के अादेश िदए थे।

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