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लाॅकडाउन, फाइनेंशियल प्राॅब्लम और ऑनलाइन क्लासिस का असर:अबकी बार 10705 बच्चों का प्राइवेट छाेड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला

हिसार18 दिन पहले
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पहले जहां पेरेंट्स सरकारी स्कूल काे छाेड़कर अपने बच्चाें का एडमिशन प्राइवेट स्कूल में कराने की हाेड़ में लगे रहते थे, वहीं महामारी के दाैर में हालात इससे उलट हैं। अब पेरेंट्स सरकारी स्कूलाें काे ज्यादा तवज्जाे दे रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक लाॅकडाउन, फाइनेंशियल प्राॅब्लम और प्राइवेट व सरकारी स्कूलाें में ऑनलाइन क्लासिस सिस्टम के चलते पेरेंट्स का रुझान बढ़ा है।

सरकारी स्कूलाें में पिछले साल के मुकाबले टारगेट से ज्यादा एडमिशन हुए हैं। अभी तक जिले के सरकारी स्कूलाें में 152344 एडमिशन हाे चुके हैं। यानि कि एडमिशन प्राेसेस में प्राइवेट स्कूलाें के मुकाबले सरकारी स्कूलाें में 25 से 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि छठी से नौवीं तक के दाखिले सितंबर महीने तक चलेंगे। प्रदेश में हिसार के एडमिशन प्रक्रिया में सेकंड है तो नूंह फर्स्ट पाॅजिशन पर है। जिले में गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूलें 504 हैं। गवर्नमेंट सीसे. स्कूल 882 हैं। माॅडल संस्कृति सीसे 12 है।

समझिए... कैसे बढ़ा एनराेलमेंट

सरकारी स्कूल : 2020-2021 में सरकारी स्कूलाें में 141483 एनराेलमेंंट किए गए थे। वहीं अब 2021-2022 के सेशन में 152188 किए जा चुके हैं। प्राइवेट स्कूल : 2020-2021 के सेशन में 188651 एनराेलमेंट हुए अाैर 2021-2022 के सेशन में 110211 एनराेलमेंट हुए हैं। यानि इस बार जिले के प्राइवेट स्कूलाें काे छाेड़कर 10705 स्टूडेंट्स ने सरकारी स्कूलाें में एनराेलमेंट कराया है।

बदलाव को लेकर पड़ताल में ये 5 बड़े कारण सामने आए

1. माॅडल संस्कृति स्कूल का सीबीएसई से एफिलिएटेड हाेना। 2. पेरेंट्स की लाॅकडाउन के दाैरान जाॅब का छूटना और फाइनेंसियल प्राॅब्लम। 3. प्राइवेट व सरकारी स्कूल में ऑनलाइन एजूकेशन का एक पैटर्न हाेना। 4. लाॅकडाउन में प्राइवेट स्कूल की भारी भरकम फीस का न दे पाना। 5. पेरेंट्स प्राइवेट स्कूल के स्टडी मेटेरियल से ज्यादा सैटिस्फाइड नहीं।

जिले में ये हुए हैं एडमिशन

पहली से पांचवीं 620504 छठी से आठवीं 39072 नाैवीं से दसवीं 29073 दसवीं से बारहवीं 21539

जानिए... जहाज पुल स्कूल क्यों बना है सबसे पहली पसंद

जहाज पुल माॅडल संस्कृति स्कूल में अभी तक सबसे ज्यादा 1803 एडमिशन हाे चुके हैं। स्कूल के प्रिंसिपल कृष्ण कुमार ने बताया कि स्कूल की लाेकेशन शहर में हाेने के कारण व स्कूल में सभी मूलभूत सुविधाएं माैजूद हैं। इसके अलावा बच्चाें की पढ़ाई सें संबंधित हर समस्या का समाधान करने के तत्पर रहते हैं। पिछले कई सालाें से स्कूल का शानदार रिजल्ट रहा है।

दूसरी ओर इस बार अभिभावकाें का ज्यादा रूझान माॅडल संस्कृति स्कूल बनने से भी बढ़ा है। हमने अपने स्तर पर काफी प्रयास किए हैं। एडमिशन के प्रचार काे हाेडिंग्स लगवाए। साथ ही टीचर्स ने अप्रैल से लेकर जून तक बच्चाें का डाटा जुटाकर उनके अभिभावकाें से स्कूल की खासियत बताकर एडमिशन कराया है।

इस तरह बढ़ी स्टूडेंट्स की संख्या : गवर्नमेंट मिडल स्कूल बरवाला ब्लाॅक के स्कूल में पिछले साल 25 स्टूडेंट्स थे। जिसमें टीचर्स ने डाेर टू डाेर कैंपेन चला कर एडमिशन काे लेकर पेरेंट्स काे जागरूक किया। अभिभावकाें काे विश्वास दिया कि उनके बच्चाें काे बेहतर शिक्षा दी जाएगी। नतीजा अब उनके स्कूल में स्टूडेंट्स की संख्या 100 से उपर हाे चुकी है।

सबसे कम और सबसे ज्यादा एडमिशन : पिछले साल गंगवा के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल में 400 एनराेलमेंट हुए थे। इस बार 700 से अधिक एनराेलमेंट हाे चुके। वहीं गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल ढाणी रामनगर में अभी तक सबसे कम 7 एडमिशन हुए हैं।

पिछले सत्र में 5 महीने खुले थे स्कूल : पिछले सत्र में लाॅकडाउन 22 मार्च 2020 में लगाया गया था। जिसमें स्कूल सत्र 22 नबम्वर से लेकर 19 मार्च 2021 तक यानि कि पूरे सत्र में करीब पांच महीने तक ही क्लासिस लगी है। वहीं सेकंड वेव के चलते लाॅकडाउन में ऑनलाइन के माध्यम से दाखिला व बच्चाें की पढ़ाई जारी है।

पेरेंट्स बोले... लॉकडाउन में जॉब छूटी तो फीस भरना हुआ मुश्किल

मैं कपड़ाें के शाेरूम में काम करता था। लाॅकडाउन के दाैरान मेरी जाॅब छूट गई थी। ऐसे में घर खर्च चलाना और बच्चाें की फीस दे पाना मुश्किल हो गया। प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधा माॅडल संस्कृति स्कूल में थी। इसलिए दाेनाें बच्चाें का दाखिला कराया है।'' -हरदयाल सिंह, उकलाना वासी।

पिछले डेढ़ साल से दुकान बंद थी और दुकान का किराया भी बढ़ता जा रहा था। कहीं भी कार मिस्त्री का काम न मिलने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। प्राइवेट स्कूल पूरी फीस ले रहे हैं। बच्चे घर पर ही ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। यही सुविधा अब सरकारी स्कूल में है। इसलिए मैंने तीनाें बच्चाें का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया है।'' -नरेश, नलवा वासी।

एक्सपर्ट की राय... लॉकडाउन में टीचर और स्टूडेंट्स के बीच गेप आया

लाॅकडाउन के वजह से टीचर और स्टूडेंट्स के बीच में काफी गेप आ चुका है। क्याेंकि टीचर टाइम से होमवर्क और अन्य एक्टिविटी नहीं दे पा रहे हैं। साथ ही एजूकेशन में सेम नए पैटर्न आ गए हैं। कुछ अभिभावक साेच रहे हैं कि जब तक लाॅकडाउन और ऑनलाइन एजूकेशन चल रही है। तब तक वह बच्चों के दाखिला सरकारी में करा दें। -रि. प्रिंसिपल राजेंद्र मलिक, गवर्नमेंट सीसे स्कूल, न्याेली खुर्द।

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