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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:तीन दाेस्त हाे गए थे पाॅजिटिव; दो अस्पताल में थे, वीडियो कॉल कर बढ़ाया हौसला, गुनगुनाए गाने, योग किया अब तीनों ठीक

हिसार2 महीने पहले
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कै. नरेंद्र शर्मा, काेराेना वॉरियर  - Dainik Bhaskar
कै. नरेंद्र शर्मा, काेराेना वॉरियर 
  • ऑक्सीजन लेवल 85 तक पहुंच गया था, डाॅक्टर ने ऑक्सीजन की व्यवस्था कर दी, मैंने इनकार कर दिया, बाॅडी में अभी ताकत और मन में हिम्मत है जल्द ठीक हाे जाऊंगा

आर्मी से कैप्टन रिटायर्ड हूं। मैं और मेरे दाे दाेस्त काेराेना पाॅजिटिव हाे गए। मुझे 15 अप्रैल काे बुखार आया। टेस्ट कराया ताे डाॅक्टराें ने कहा कि टाइफाइड है। 21 अप्रैल काे फिर काेराेना टेस्ट के लिए सैंपल दिया। 22 अप्रैल काे रिपाेर्ट आ गई। मैंने ये सुनकर हिम्मत ही नहीं हारी कि क्या हुआ।

आर्मी में सिपाही भर्ती हुए दाे अन्य साथियाें से बात की। इनमें से एक दाेस्त जाे दिल्ली में रहता था वह भी पाॅजिटिव था। दूसरा दिल्ली में ही रहने वाला दाेस्त उसकी सहायता के लिए उसके पास पहुंच गया। हालांकि तीन से चार दिन में बाद वह भी पाॅजिटिव हाे गया। 24 अप्रैल काे तबीयत ज्यादा खराब हाे गई।

परिजनाें ने डर के चलते अस्पताल में भर्ती करवा दिया। हालात सीरियस हाेती जा रही थी। सीटी स्कैन में एचआर सिटी 25 में से 14 आ गई। फेफड़ाें पर 50 प्रतिशत से ज्यादा असर आ गया। ऑक्सीजन लेवल भी गिरने लगा। 85 तक पहुंच गया। डाॅक्टराें ने रूम में ऑक्सीजन की व्यवस्था कर दी मगर मैंने ऑक्सीजन लगाने से साफ इनकार कर दिया।

मैंने कहा कि बाॅडी में अभी इतनी ताकत व मन में अभी हिम्मत है जल्द ही ठीक हाे जाऊंगा। डाॅक्टर ने ऑक्सीजन नहीं लगाई। सबसे बड़ी हिम्मत दाेस्ताें ने दी। हम तीनाें दाेस्त जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल ओमप्रकाश दिल्ली में रहते मगर काेराेना पाॅजिटिव हाेने के बाद उन्हें बहादुरगढ़ में दाखिल कराना पड़ा था।

दूसरे सूबेदार सतेंद्र भी लेफ्टिनेंट कर्नल की सेवा करते हुए पाॅजिटिव हाे गए थे। घर में क्वारेंटाइन थे। तीनाें हर राेज वीडियाे काॅल कर गाने व भजन गुनगुनाते थे। अस्पताल में दाखिल लाेग व स्टाफ हमें एेसा करता देख हंसता था। मगर हमने बिना काेई परवाह किए इस संकट की घड़ी में भी जिंदादिली दिखाई। सेना में सेवा के दाैरान की घंटाें तक बातें करते थे। पुराने दिन याद कर एक दूसरे की हिम्मत जुटाई। सुबह शाम गायत्री मंत्र जप किया। हमेशा पाॅजिटिविटी रहती। दवाइयां सुचारू चलीं। याेगा किया और दिन में तीन से चार बार भांप ली जाती थी।

दाेस्त ओमप्रकाश की हालात ताे मेरे से भी ज्यादा खराब थी। उनका सेचुरेशन ताे 70 तक पहुंच गया था मगर अब तीनाें हम ठीक हाे गए। हम तीनाें सिपाही भर्ती हुए थे। 13 साल तक हम तीनाें एक ही यूनिट में रहे। सूबेदार सतेंद्र और मैं ताे जम्मू से रिटायर हुए और ओमप्रकाश हिसार से रिटायर हुए थे। हमने उपचार के दाैरान श्रीलंका युद्ध की बातें तक याद की जब माैत के मुंह से हम निकलकर आए थे ताे काेराेना काे हराना हमें बड़ा आसान लग रहा था। 3 मई काे मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मेरा ताे एक ही संदेश है हिम्मत से काम लाे काेराना खुद हार जाएगा।

कै. नरेंद्र शर्मा, काेराेना वॉरियर

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