जच्चा की मौत पर गुस्सा:डिलीवरी के बाद जच्चा की मौत पर हंगामा, गेट पर बांधी रस्सी, मरीज-स्टाफ अंदर बंद

हिसार9 महीने पहले
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हालात जब बेकाबू होते दिखे... गोस्वामी हॉस्पिटल के बाहर डिलीवरी के दौरान महिला की मौत के बाद जब परिजन गेट पर ताला जड़ने लगे तो महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें ऐसा करने से रोका। कहा, अन्य मरीजों के बारे में भी सोचें। - Dainik Bhaskar
हालात जब बेकाबू होते दिखे... गोस्वामी हॉस्पिटल के बाहर डिलीवरी के दौरान महिला की मौत के बाद जब परिजन गेट पर ताला जड़ने लगे तो महिला पुलिसकर्मी ने उन्हें ऐसा करने से रोका। कहा, अन्य मरीजों के बारे में भी सोचें।
  • ऋषि नगर स्थित निजी अस्पताल में मां की मौत; नवजात को बचाया, महिला डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप
  • डॉक्टर ने कहा- मेरा फर्ज है मरीज को बचाना; रोहिनी के लिए भी पूरी कोशिश की थी पर उसकी हालत नहीं सुधरी

ऋषि नगर स्थित गोस्वामी अस्पताल में शनिवार देर रात डिलीवरी के बाद न्यू विनोद नगर में रहने वाली 26 वर्षीय रोहिनी शर्मा की मौत हो गई। जच्चा की मौत से गुस्साये परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। इन्होंने अस्पताल की महिला डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही व अत्यधिक दवाइयां देकर मारने का आरोप लगाया।

स्त्री रोग विशेषज्ञा डॉ. अनीता गोस्वामी ने आरोपों को निराधार बताया। ऐसे में विवाद बढ़ने की आशंका देखते हुए पुलिस बल अस्पताल अंदर व बाहर तैनात कर दिया गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस के समझाने पर कुछ परिजन शव को सिविल अस्पताल लेकर चले गए, जहां मेडिकल बोर्ड से पाेस्टमार्टम करवाया।

वहीं, मृतका के देवर सहित अन्य परिचितों ने दोपहर 1 बजे तक अस्पताल के बाहर बैठकर धरना-प्रदर्शन किया। उधर गोस्वामी अस्पताल पर जच्चा के परिजनों ने गेट के हैंडल पर रस्सी बांध दी। इससे अस्पताल के अंदर तैनात पुलिस को कुछ देर के लिए बंद रखा। पुलिस के समझाने पर वो माने।

हमने पूरी कोशिश की, एनेस्थेटिस्ट और बाल रोग विशेषज्ञ को भी बुलाया

गर्भवती रोहिनी को उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। इसके साथ आई महिला ने बताया कि काफी दिनों से उल्टियां व शरीर में खुजली हो रही है। वह काफी बीमार थी। जब उसके पेट पर हाथ लगाकर देखा तो प्रसव पीड़ा में थी। जांच करने पर पाया कि बच्चे दानी का मुंह खुल चुका है। डिलीवरी होनी सुनिश्चित थी। परिजनों को यह बताया था। जब उसके सभी जरूरी टेस्ट करवाए तो रिपोर्ट सही नहीं थी। प्लेटलेट्स 90 हजार थी। खून काफी पतला हो चुका था।

डिलीवरी के बाद जच्चा के साथ-बच्चे को बचाने के लिए सभी ट्रीटमेंट किए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत कंसल ने बच्चे की सांस को शुरू किया। परिजनों को जानकारी दी। उन्हें दिखाया भी गया कि रेस्पट्री सपोर्ट के लिए वेंटीलेटर पर रखा है। इधर, रोहिनी की ब्लीडिंग नहीं रुक रही थी। खून पतला था जिसे जमाने के लिए जो दवाइयां देनी थी वह दीं। लाल रक्त व श्वेत रक्त मंगवाकर चढ़ाया गया।

रोहिनी को बचाने के लिए एनेस्थेटिस्ट डॉ. एनके खन्ना की मदद ली थी। ब्लीडिंग तो बंद हुई लेकिन खून नहीं जमा। आंख पर पटि्टयां इसलिए रखी थी ताकि इंफेक्शन न हो। तीन बजे उसकी मृत्यु हो गई थी। मैं डॉक्टर हूं और मेरा फर्ज रहता है मरीज को बचाना। उसके लिए मैंने हर संभव प्रयास किया। फरवरी माह में चेकअप के वक्त आई थी तब भी वह काफी बीमार थी। पर, परिजनों ने मेरी नहीं सुनी थी। हमने सारी मेडिकल रिपोर्ट्स पुलिस को सौंप दी है।'' -जैसा की स्त्री रोग विशेषज्ञा डॉ. अनीता ने दैनिक भास्कर को बताया।

विसरा जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई करेंगे

इस मामले में तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया है। वीडियोग्राफी भी करवाई है। विसरा जांच के लिए लैब में भिजवा दिया है। उससे मौत के सही कारण सामने आएंगे। इस मामले की जांच मेडिकल नेगलिजेंस बोर्ड द्वारा की जाएगी। विसरा रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाएंगे।'' -जाेगिंद्र शर्मा, डीएसपी हिसार।

सास ने कहा- चेकअप का बहाना बना बहू को दर्द की दवा दे दी

ऋषि नगर स्थित गोस्वामी अस्पताल में शनिवार देर रात डिलीवरी के बाद न्यू विनोद नगर में रहने वाली 26 वर्षीय रोहिनी शर्मा की मौत के मामले में मृतका की सास नीलम का कहना है कि मेरे बेटे विष्णु की शादी एक साल चार माह पहले ढाणी मोहब्बत वासी रोहिनी के साथ हुई थी।

पुत्रवधू गर्भवती थी। 20 फरवरी को ऋषि नगर स्थित गोस्वामी अस्पताल में डॉ. अनीता से चेकअप करवाया था। डॉक्टर ने कहा कि 20 मार्च को डिलीवरी हो सकती है। इसके चलते 13 मार्च को चेकअप के लिए रोहिनी को गोस्वामी अस्पताल लेकर आई थी।

डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट करवाने की बात कही। फिर टेस्ट रिपोर्ट आने तक रोहिनी को अपने साथ जांच के लिए लेकर चली गई। मैं भी उनके साथ गई लेकिन मुझे डॉक्टर ने रूम के बाहर रहने के लिए कहा। चेकअप का बहाना बनाकर आर्टिफिशल पेन लगाने के लिए पुत्रवधू को दवा दे दी। फिर बताया कि बच्चेदानी का मुंह खुल गया है।

नॉर्मल डिलीवरी होगी। करीब डेढ़ घंटे बाद बच्चा पैदा हो गया लेकिन हमें यह नहीं बताया कि लड़का है या लड़की। डॉ. अनीता ने 80 हजार रुपये बेटे विष्णु से ले लिए। रसीद मांगी तो नहीं दी। जब रोहिनी से मिलने की अनुमति दी तो आइसीयू में वेंटीलेटर पर भर्ती थी। उसकी आंखों पर पट्‌टी रखी हुई थी।

पूछने पर डॉक्टर ने बताया कि इंफेक्शन से बचाने के लिए पटि्टयां रखी हैं। खून का प्रबंध व दवाइयां लाने के लिए कहा। तब हमें शक हो गया था कि वह मर चुकी है। रात साढ़े 8 बजे रोहिनी की जीभ बाहर निकली हुई थी। 14 मार्च की अलसुबह तीन बजे मेरा पति परमानंद व अन्य परिजन आइसीयू में गए थे। आंखों की पट्‌टी हटाई तो रोहिनी मृत थी। डॉ. अनीता आइसीयू में पहुंच गई थी। बोलीं कि भगवान को यही मंजूर था।

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