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80 घंटे बाद कुएं से निकली किसान की बॉडी:हिसार में सेना-NDRF ने दोपहर बाद 2:22 बजे किया ऑपरेशन पूरा

हिसारएक महीने पहले
स्याहड़वा गांव में किसान की बॉडी के साथ एंबुलेंस को रवाना करते सेना-NDRF के जवान। इनसेट में किसान जयपाल हुड्‌डा का फाइल फोटो।

हरियाणा में हिसार जिले के स्याहड़वा गांव में फंसे किसान जयपाल हुड्‌डा के शव को सेना और NDRF ने आखिरकार करीब 80 घंटे बाद निकाल लिया। ऑपरेशन को पूरा करने के लिए ढ़ाई बजे की डेडलाइन तय की गई थी। बुधवार दोपहर बाद 2:22 पर ही किसान की बॉडी को कुएं से निकाल लिया गया। किसी को भी बॉडी देखने नहीं दी गई और आनन फानन में उसे एंबुलेंस से हिसार के नागरिक अस्पताल मे भेज दिया गया। किसान की बॉडी को एंबुलेंस तक पहुंचाने से पहले ही सेना ने ग्रामीणों को हटा दिया था।

कुएं से निकली किसान की डेडबॉडी को एंबुलेंस तक लाते जवान।
कुएं से निकली किसान की डेडबॉडी को एंबुलेंस तक लाते जवान।

रविवार सुबह सवा सात बजे से कुएं में मिट्‌टी में दबे किसान के शव को निकालने के लिए सेना और NDRF ने करीब 72 घंटे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। दो बार तो मिट्‌टी गिरने से NDRF के जवान भी कुएं में फंसने से बाल बाल बचे। रात को भी कुएं में दो बार मिट्‌टी गिरी। रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत यह आ रही थी कि कुएं में गिरी ईंटों को निकालने के लिए खुदाई में जोर लगाया जाता है तो ऊपर से मिट्‌टी आ जाती है। जवानों के दबने का खतरा भी हर समय बना रहता है। अब खुदाई का काम दोबारा शुरू हो गया है। कुएं के तीन ओर से मिट्‌टी काे पूरी तरह से हटाकर जवान अंदर जाएंगे। दोपहर ढ़ाई बजे तक मिट्टी हटा कर नीचे जाने का टारगेट सेना-NDRF ने तय किया है।

सेना ने ग्रामीणों को मौके से हटा दिया था। उन्होंने दूर खड़े होकर किसान को बॉडी को कुएं से निकाल कर एंबुलेंस में ले जाते हुए देखा।
सेना ने ग्रामीणों को मौके से हटा दिया था। उन्होंने दूर खड़े होकर किसान को बॉडी को कुएं से निकाल कर एंबुलेंस में ले जाते हुए देखा।

रात को दो बार गिरी मिट्‌टी

स्याहड़वा गांव में मौत के कुएं में मंगलवार रात को 11 बजे के करीब और फिर बुधवार सुबह पौने तीन बजे के करीब मिट्‌टी गिर गई। सुबह पौने 3 बजे के करीब यह हादसा तब हुआ, जबकि सेना ओर NDRF के जवान किसान जयपाल हुड्‌डा की बॉडी के पास पहुंच कर हाथ से मिट्‌टी हटाने में लगे थे। कुएं में रजवाहे की तरफ की मिट्‌टी की थेह (ढ़ाह) गिरी है। इस दौरान कुएं में नीचे काम कर रहे जवानों को भी मुश्किल से बाहर निकाला जा सका।

एंबुलेंस में रखी कुएं से निकाली गई किसान जयपाल की बॉडी।
एंबुलेंस में रखी कुएं से निकाली गई किसान जयपाल की बॉडी।

दोनों मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए जल्द दें : गंगवा

डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने हिसार के गांव स्याहड़वा में हादसे के शिकार हुए किसान जयपाल हुड्‌डा और मजदूर जगदीश उर्फ फौजी के परिजनों को मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना के तहत 5-5 लाख रुपए की राशि जल्द से जल्द दिए जाने के निर्देश दिए हैं। इस बीच किसान नेताओं ने दोनों मृतकों के परिजनों को 50—50 लाख रुपए मुआवजा देने और साथ में एक-एक पारिवारिक सदस्य को गुजर बसर के लिए सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

सड़ने लगी बॉडी, बढ़ी परेशानी

इस बीच जयपाल का शव सड़ने लगा। उससे उठ रही बदबू की वजह के कुएं में काम करने के लिए के उतर रहे सेना और NDRF के जवानों को बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा।

एक पोकलेन मशीन हुई खराब

इस दैरान जयपाल की बॉडी एक बार फिर से मिट्‌टी के नीचे दब गई। इसे निकालने के लिए साढ़े 3 बजे के करीब दो पोकलेन मशीनों को मिट्‌टी खुदाई के काम में लगाया गया। इस बीच एक पोकलेन मशीन भी खराब हो गई। सुबह पांच बजे गांव स्याहड़वा के मंदिर के लाउडस्पीकर से अनाउंसमैंट कर गांव के लोगों से 15 ट्रैक्टर लेकर मौके पर पहुंचने को कहा गया। ट्रैक्टरों से कुएं से निकाली जा रही मिट्‌टी को दूर किया गया।

सुबह फिर से ट्रैक्टरों को लेकर पहुंचे किसान।
सुबह फिर से ट्रैक्टरों को लेकर पहुंचे किसान।

62 घंटे से सेना-NDRF मौके पर

किसान जयपाल हुड्‌डा को कुएं में फंसे हुए 72 घंटे हो गए थे। मिट्‌टी और ईंटों के नीचे दबने से उसकी मौत हो चुकी थी और शरीर पानी में पड़े होने के कारण फूला हुआ था। किसान को निकालने के लिए सेना और NDRF की टीम करीब 62 घंटे से रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे रहे। बचाव दल किसान बॉडी तक पहुंचने के बाद भी उसे बाहर नहीं निकाल पाया। अचानक मिट्‌टी गिरने से उनके कई जवान की जान पर भी बन आई थी।

ये भी पढ़ें- सेना-NDRF किसान के पास पहुंचे:हिसार में कुएं में 60 घंटे बाद नजर आयी बॉडी; सुरक्षित निकालने के प्रयास शुरू

रविवार सुबह से फंसा है किसान

बता दें कि किसान जयपाल हुड्‌डा और उसके साथ खेत में काम करने वाला मजदूर जगदीश उर्फ फौजी रविवार सुबह सवा 7 बजे के करीब कुएं में मिट्‌टी गिरने से दब गए थे। सेना ओर NDRF की टीम ने जगदीश को तो 21 घंटे बाद मृत हालत में निकाल लिया था, लेकिन जयपाल को 72 घंटे बाद भी नहीं निकाला जा सका है। दोनों कुएं में पानी की मोटर रखने के लिए बरगा लगाने गए थे। जयपाल की पत्नी भी उनके साथ कुएं में थी, लेकिन वह चाय बनाने के लिए ऊपर पहुंची ही थी कि हादसा हो गया।

कुएं में फिर से गिरी मिट्‌टी को निकालने का काम शुरू किया गया।
कुएं में फिर से गिरी मिट्‌टी को निकालने का काम शुरू किया गया।

कुएं की दीवार से 2 फुट अंदर फंसी बॉडी

बचाव कार्य में लगी सेना और NDRF की टीम मंगलवार शाम को 8 बजे के लगभग जयपाल की बॉडी से करीब डेढ़ फुट की दूरी पर थी। टीम को बॉडी नजर आ गई थी। बॉडी कुएं की चारों ओर लगी ईंटों जो कि ढ़ह गई थीं, के नीचे फंसी थी। कुएं की तलहटी में पानी भी था। साथ ही वह बरगा तो वे नीचे लगाने गए थे, के नीचे बॉडी फंसी थी। बचाव दल ने बताया जयपाल तक पहुंचने के लिए करीब 55 फुट तक खुदाई करनी पड़ी है। कुएं की मिट्‌टी एक ब्लास्ट की आवाज के साथ गिरी थी। किसान कुएं की दीवार से 2 फुट तक साइड में जा फंसा था।

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फूल कर बॉडी बरगे के नीचे फंसी

बताया गया है कि पानी में पड़े होने से किसान जयपाल की बॉडी फूल गई है। फूलने की वजह से वह बरगे और जमीन के बीच इस कदर फंस गई है कि निकालना मुश्किल हो गया। सेना-NDRF की टीम ने मंगलवार रात को 11 बजे के करीब बॉडी से लगभग मिट्‌टी और ईंटों को निकाल लिया था। केवल घुटने के नीचे का हिस्सा ही जमीन में फंसा था। बॉडी को चूंकि सुरक्षित निकालना था, इस वजह से रेस्क्यू का टाइम बढ़ता ही गया। इसके बाद फिर से मिट्‌टी की थेह गिरने से बॉडी नीचे दब गई है।

हाथ से खोद कर निकालनी पड़ी मिट्‌टी

जवान मिट्‌टी साफ कर ही रहे थे कि कुएं की दीवार से फिर से मिट्‌टी की थेह ढ़ह गई। कुएं में करीब डेढ़ से 2 फुट तक मिट्‌टी गिरने से जयपाल की बॉड़ी को निकालने के कार्य को धक्का लगा। इसके बाद खुदाल और कस्सी से मिट्‌टी निकालने का काम पूरी तरह से रोक दिया गया। इसके बाद कुएं में उतरे जवानों ने हाथ से धीरे धीरे मिट्‌टी को निकालना शुरू किया। मिट्‌टी रेतीली होने और दीवार में नमी होने से मिट्‌टी बार बार सरक रही है।

पत्नी निकली, बाकी दो फंसे

हिसार से करीब 33 किलोमीटर दूर भिवानी बॉर्डर पर पड़ने वाले गांव स्याहड़वा के इस मौत के कुएं में किसान जयपाल और मजदूर जगदीश उर्फ फौजी के साथ किसान की पत्नी सावित्री भी नीचे उतरी थी। तीनों नीचे कुएं में घुटने तक पानी में खड़े होकर मोटर लगाने के लिए बरगा फिट कर रहे थे। इसके लिए कुएं की दीवार में दोनों तरफ सुराख किए गए थे।

रात को अंधेरे में भी सेना-NDRF का ऑपरेशन जारी रहा।
रात को अंधेरे में भी सेना-NDRF का ऑपरेशन जारी रहा।

ब्लास्ट की आवाज के साथ गिरी थेह

इसी बीच जयपाल ने पत्नी सावित्री को चाय बनाने के लिए ऊपर भेज दिया। साथ ही जगदीश भी ऊपर आने लगा। जयपाल ही नीचे था। सावित्री ऊपर पहुंच कर कुएं से निकल कर कोठे की तरफ गई थी कि ब्लास्ट की आवाज के साथ कुंआ बैठ गया। लोहे की सीढ़ी जिस पर जगदीश चढ़कर ऊपर आ रहा था वह भी नीचे गिर गई और जयपाल के साथ जगदीश भी मिट्‌टी में दब गया।

पत्नी बुलाकर लाई थी लोगों को

पति और मजदूर को मिट्‌टी में दबा देखकर सावित्री के हाथ पांव फूल गए। वह भाग कर 20-22 किले दूर खेतों में काम कर रहे लोगों के पास पहुंची और घटना की जानकारी दी। इसके बाद लोग मौके पर जुटे और चार JCB और ट्रैक्टरों की मदद से कुएं की खुदाई शुरू की। रविवार शाम को सेना और NDRF की टीम ने अभियान अपने हाथ ले लिया। अभियान को पूरा करने में 62 घंटे लग गए। इस दौरान न तो मजदूर जगदीश को बचाया जा सका और न ही जयपाल हुड्‌डा को।