जन संकल्प से हारेगा कोरोना:डोर बेल बजने पर कोई घर से बाहर निकलता ताे सब डर जाते, पर लोगों ने मानसिक सपोर्ट देना बंद नहीं किया

पानीपत6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
ज्याेति गांधी, पति संजय गांधी व बच्चाें के साथ। - Dainik Bhaskar
ज्याेति गांधी, पति संजय गांधी व बच्चाें के साथ।
  • ज्योति बोलीं- सपोर्ट भी जरूरी है और आत्मबल भी
  • यमुना एनक्लेव में संजय गांधी का कोरोना पॉजिटिव होना सोसायटी का पहला केस था, फिर पूरा परिवार संक्रमित मिला। पति का साथ देने पत्नी भी अस्पताल में भर्ती हो गईं।
  • बोलीं- हमें तो कोरोना ने लड़ना सिखाया, हम जंग जीत गए, 13 दिन में ठीक होकर लौटे

“अभी तो चारों ओर अजीब भय का माहौल है, लेकिन शायद लोगों को पता नहीं कि जो डर गया उसे तो कोरोना जीतने नहीं देगा। हमने तो आत्मबल से कोरोना को हराया। वह ऐसा टाइम था, जब कोई साथ नहीं था- सिवाय परमात्मा के। हमें तो कोरोना ने लड़ना सिखाया, और हम जंग जीत गए।

जुलाई 2020 की बात है। 46 साल के पति संजय गांधी को 5-6 दिन से बुखार आ रहा था। दवा ले ही रहे थे। हम चाहते थे कि किसी अस्पताल में भर्ती हो जाएं, लेकिन सभी कोरोना की रिपोर्ट मांग रहे थे। हम सबने सैंपल दिए। उसी रात अचानक संजयजी की तबियत ज्यादा खराब हो गई। सांस की समस्या होने लगी।

अगले दिन पति की रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। मैं, मेरी सास 64 साल की प्रेमलता, ग्रेजुएट बेटी श्रुति और आठवीं में पढ़ने वाला बेटा आकांश सब पॉजिटिव निकले। सिर्फ देवर की रिपोर्ट निगेटिव निकली। तय किया कि पति के साथ मैं भी अस्पताल में एडमिट हो जाऊंगी। देवर को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया।

दोनों बच्चे अपनी दादी के साथ घर पर ही आइसोलेट हो गए। हम दाेनों को एक ही कमरे में दो बेड मिल गए। डॉक्टर कहते थे कि मुझे अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं है, लेकिन में संजयजी को मोटिवेट करने के लिए साथ रही। फोन पर बेटी कहती थी- मम्मा आप हो तो पापा को लेकर हमें कोई चिंता नहीं है।

हमने ताे वाे दाैर भी झेला है, देखा है। जब डाेर बेल बजने पर बच्चे घर से बाहर निकलते थे ताे सब डर जाते। पूरी यमुना एनक्लेव सोसायटी में भय का माहौल था। क्योंकि, पॉजिटिव का पहला केस जो था। लेकिन एक बात की तारीफ करनी चाहूंगी कि फिजिकली बेशक कोई आगे नहीं आए, पर मोरल सपोर्ट सबका जारी रहा।

कोई घर में खाना भेज देते तो कोई जरूरत के सामान। फोन करके सब जरूरत पूछते थे। मुश्किल में कोई आपको ये कहे कि वह आपके साथ खड़ा है। इससे जो आत्मबल मिलता है। पूरा परिवार, सगे संबंधी और सोसायटी के लोगों ने बहुत सपोर्ट किया। आत्मबल तो हम सब में था ही। इसलिए सबने मिलकर 13 दिनों में कोरोना को परास्त कर दिया। मैं तो यहीं कहूंगी कि अपने आप को हमेशा पॉजिटिव रखो, पॉजिटिव सोचो तो अच्छा ही होगा।’ ज्योति गांधी | मेंबर, कोरोना वॉरियर परिवार

खबरें और भी हैं...