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सुविधा:रत्ताखेड़ा के किसान ने 100 अलग-अलग किस्म के पाैधे लगाए, ग्रामीण भी ले रहे लाभ

रतिया13 दिन पहले
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किसान कृष्ण बिश्नोई की ढाणी में लगे पेड़। - Dainik Bhaskar
किसान कृष्ण बिश्नोई की ढाणी में लगे पेड़।
  • नील गाय से फसल बचाने काे लगाए करोंदा चैरी के पेड़ से हुई शुरूआत
  • हरियाली बढ़ती दिखी ताे फलदार पाैधाें के साथ लगाए औषधीय पाैधे
  • गांव के लाेग मुरब्बा, आचार डालने के लिए ले जाते हैं फल

अपनी फसल को नील गायों से बचाने के लिए गांव रत्ताखेड़ा निवासी किसान कृष्ण बिश्नोई उर्फ कृष्ण पंसारी ने 8 एकड़ खेत के चारों तरफ करोंदा चैरी की बाड़ लगा दी। इन पौधों की हरियाली को देखकर उसने खेत में 4 कनाल जमीन में अलग-अलग किस्म के 100 तरह के फलदार, फूलदार व दवाओं के रूप में काम आने वाले पौधे लगाने का निर्णय लिया। गांव के लोग अब फलों को मुरब्बा, आचार डालने के लिए ले जाते है।

नील गाय को चारा भी मिला फसल भी बची

करोंदा चैरी की बाड़ से खेत की सुरक्षा हो रही है, साथ में ब्लेड नुमा व कंटीली तार के न लगाने से नील गायों को भी नुकसान नहीं पहुंच रहा। ज्यादा से ज्यादा नील गाय करोंदा चैरी के फल या पत्ते खा लेते हैं, लेकिन खेत में चारा, सब्जियां, पौधे व फसल सुरक्षित बच जाते हैं। वहीं निगरानी को लेकर खेत को सीसीटीवी कैमरों से कवर किया है।

किसान कृष्ण बिश्नोई ने बताया के उनके गांव की तरफ नील गायों का आवागमन काफी है। कई साल पहले नील गायों ने फसल को काफी नुकसान पहुंचा दिया। वे बिश्नोई समाज से तालुक रखते है, इसी कारण कंटीले तार भी नहीं लगा रखे ताकि वे चोटिल न हो। उन्होंने खेत के चारों तरफ करोंदा चैरी के 300 पौधे लगा दिये, जिससे पशुओं का आवागमन भी बंद हो गया।

पौधे ऊंचे व घने होने के कारण बीच से पशु नहीं निकल पाते। करोंदा चैरी को फल भी काफी लग रहा है। हरियाली बढ़ी तो उसके मन में विचार आया, क्यों न इसे बढ़ाया जाए। इस पर उसने 4 कनाल में 100 किस्म के पौधे लगा दिये जो अब पेड़ बन गये है। इनमें अब फल भी लग रहा है।

ढाई लाख रुपये खर्च हुए- 4 कनाल में लगाए ये पौधे

कृष्ण बिश्नोई ने बताया कि वह यह पौधे गोवा, हजूर साहिब, मलेर कोटला, संगरुर, आगरा, मुंबई, हिसार व फतेहाबाद से लाए थे, जिन पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर चुके है। जो फल लगते है, वह उन्हें लोगों को वैसे ही बांट देते हैं और चैरी, नींबू, आंवला आदि को लोग आचार व मुरब्बा बनाने के लिए ले जाते हैं। कुछ पौधों व फलों को दवा के मकसद से भी प्रयोग किया जा सकता है।

लोग उन्हें भी ले जाते हैं। चूंकि वह खुद पंसारी है, कुछ फलों व पौधों को दुकान पर ही प्रयोग करते हैं। उसके पास खेत में करोंदा चैरी, चीकू, अनार, आंवला, संतरा, मौसमी, अंगूर, केला, खजूर, किन्नू, नींबू, आडू, अमरुद, बेलगिरी, स्वाजना, रेहडू, नीम गिलोय, अमर बेल, सोन पापड़ी, तुलसी, हार श्रंगार, रीठा, सिकाकाई, शहतूत, जामुन, ब्लैक अमरुद, कढ़ी पत्ता, चीड़ का पेड़, फालसा, चीनी अमरुद, फूलों में पाम फूल, गुलाब, गेंदा, गेट बेल लगाई है। लोग उसके खेत में लगे पेड़ पौधों व हरियाली को देखने आते है।

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