पराली जलाने के रोकथाम के प्रयास:फसल अवशेष जलाने पर अब तक 93 एफआईआर दर्ज, दो लाख 52 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका

रतिया25 दिन पहले
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रतिया। सामुदायिक केंद्र में नंबरदारों, ग्राम स्तरीय निगरानी कमेटी व किसानों की बैठक लेते डीसी। - Dainik Bhaskar
रतिया। सामुदायिक केंद्र में नंबरदारों, ग्राम स्तरीय निगरानी कमेटी व किसानों की बैठक लेते डीसी।
  • प्रदूषित हवा मानव और पशुओं के लिए घातक : डीसी

डीसी महावीर कौशिक ने शनिवार को सामुदायिक केंद्र खंड के नंबरदारों, ग्राम स्तरीय निगरानी कमेटी व किसानों के साथ बैठक कर पराली जलने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण बेहद चिंता का विषय है और प्रदूषित जहरीली हवा के कारण मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पशुओं के लिए भी घातक है।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हवा में घुलकर धुंआ जहरीला हो जाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं एवं खासकर दमा एवं ह्रदय के रोगियों को काफी परेशानी होती है। दूषित वातावरण से आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत व अन्य परेशानियां होती है। उन्होंने कहा कि पराली जलाना समाधान नहीं है, इसका प्रबंधन किया जाना चाहिए। पराली जलाने से जहां वातावरण दूषित होता हैं वहां खेत की जमीन को भी हानि पहुंचती है। उन्होंने बताया कि पराली प्रबंधन के लिए गांव स्तर, ब्लॉक स्तर व उपमंडल स्तर पर टीमें गठित की हुई है। उन्होंने कहा कि फतेहाबाद जिले में लगभग 60 प्रतिशत धान की कटाई हो चुकी है और 40 प्रतिशत धान की कटाई बाकी रहती है।

उन्होंने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन बारे जागरूक किया जाए और समझाएं जो सरकार द्बारा पराली प्रबंधन के लिए उपकरण उपलब्ध करवाये जा रहे उनका उपयोग करे। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए जा रहे हैं तथा इन पर व्यक्तिगत श्रेणी में 50 प्रतिशत व ग्रुप में 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।

उन्होंने कहा फतेहाबाद जिला में अभी तक 93 एफआईआर दर्ज हो चुकी है और दो लाख 52 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। अगर कोई किसान पराली की गांठें बनवाता है तो उसे एक हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जा रहीं हैं।

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