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गांवों में काेरोना:चौपटा ब्लॉक के 5 गांवों में 15 दिनों में 50 मौत, अधिकतर ग्रामीणों में बुखार, खांसी-जुकाम के लक्षण, आशा और आंगनबाड़ी वर्कर्स कर रहीं निगरानी

सिरसा5 महीने पहलेलेखक: सतबीर साहरण
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चौपटा। नाथूसरीकला में आरएमपी डॉक्टर के पास दवाई लेते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
चौपटा। नाथूसरीकला में आरएमपी डॉक्टर के पास दवाई लेते ग्रामीण।
  • जिले के गांवों में कोरोना की हकीकत : चौपटा सीएचसी के अंतर्गत हॉट स्पॉट चुने गए 10 गांवों में से केवल गुडियाखेड़ा और रूपावास में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड, उनमें भी मेडिकल और इलाज की कोई सुविधा नहीं, कोरोना पॉजिटिव भी गांवों में घूम रहे

कोरोना संक्रमण ने शहर के बाद अब गांव को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। अधिकतर ग्रामीण एरिया के लोगों में कोरोना के लक्षण नजर आ रहे हैं। जिनमें बुखार, खांसी और जुकाम ग्रस्त लोेग शामिल है। फिर भी गांव के लोग कोरोना टेस्ट करवाने से बच रहे हैं।

पढ़िए नाथूसरी चौपटा से सतबीर साहरण की रिपोर्ट..

कोरोना का डर गांव में ऐसा फैला हुआ है कि लोग कहते हैं कि टेस्ट करवाया तो कोरोना पॉजिटिव घोषित कर दिए जाएंगे। फिर अस्पताल में इलाज होगा। वहां जिंदा नहीं रहेंगे। इसलिए लोग शहर में आकर इलाज लेने के बजाए गांव के ही आरएमपी डॉक्टरों पर अधिक भरोसा दिखा रहे हैं और उनसे बुखार, जुकाम व खांसी की दवाइयां लेकर इलाज करवा रहे हैं।

हालांकि सरकारी रिकार्ड के मुताबिक गांवों में कोरोना के केस कम नजर आते हैं, मगर जिस प्रकार से गांव में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है और लोग कोरोना के लक्षणों से ग्रस्त नजर आ रहे हैं। उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि गांव में कोरोना पूरी तरह से पैर पसार चुका हैं, मगर लोग डर के मारे टेस्ट नहीं करवा रहे हैं।

मंगलवार को हमारी दैनिक भास्कर की टीम ने चौपटा खंड में आने वाले कई बड़े गांव का दौरा करके कोरोना की स्थिति जांची। जिसमें स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से लेकर ग्रामीणों की लापरवाही साफ नजर आई। इसी का नतीजा निकल रहा है कि गांव में कोरोना बढ़ रहा है।

भास्कर की टीम ने चौपटा खंड के गांव नाथूसरीकलां, रूपावास, कुम्हारिया, चाहरवाला और जोगेवाला में जाकर पड़ताल की। जिसमें खुलासा हुआ कि इन 6 गांव में ही पिछले 15 दिनों में अज्ञात कारणों के चलते 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मगर गांव में जांच नहीं होने के चलते इसे लोग कोरोना की बजाए सामान्य मौत मानकर चल रहे हैं। कई गांव में मौत से डर का मौहाल भी बना हुआ है। प्रशासन की ओर से गांव में इलाज नाम की कोई व्यवस्था नहीं है।

शिवपुरी सेवादार बोले:इतने दाह संस्कार देख अब डर लगता है

गांव नाथूसरीकलां में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक अब तक 32 केस कोरोना के मिल चुके हैं। जिनमें से 5 की कोरोना से मौत हुई है। वहीं इस गांव की शिवपुरी की संभाल करने वाले सेवादार कमल चौहान ने बताया कि पिछले 15 दिन में जितनी मौत हुई है। पहले कभी नहीं हुई। यहां पर दो सप्ताह के दौरान करीब 10 से अधिक दाह संस्कार हो चुके हैं।

पहले यहां गांव के युवा भी सेवा करने और साफ सफाई करने आते थे। अब रोजाना चित्ता जलती देखकर सब डरने लगे और कोई नहीं आता। मुझे खुद इस मंजर का डर लगने लगा है। अब लोग कोरोना की वजह से मर रहे हैं या कोई और वजह है इसकी जानकारी उसे नहीं है।

जानिए ग्रामीण कोरोना के डर से नहीं करवा रहे टेस्ट

रूपावास के जगदीश ने बताया कि उनके गांव में आइसोलेशन वार्ड बना दिया है। सरपंच ने स्कूल में चारपाई लगाई है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भी आई थी। 100 सेंपल लेकर भी गई। मगर जिन लोगों में लक्षण थे। उनमें से अधिकतर लोगों ने टेस्ट नहीं करवाए। जिन लोगों ने टेस्ट करवाए उनकी रिपोर्ट भी एक सप्ताह बाद आई। उनमें आठ लोग पॉजिटिव आए। जब तक रिपोर्ट नहीं आई। वहीं एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि अब भी कई लोग ऐसे हैं जो पॉजिटिव है फिर भी गांव में घूमते हैं। जबकि सरपंच अनिरूद्ध ढिल्लो ने बताया कि गांव में आइसोलेशन वार्ड बना दिया है। मगर कोई यहां भर्ती होने को तैयार नहीं है।

कुम्हारिया, चाहरवाला, जोगेवाला में भी तेजी से फैल रहा संक्रमण

गांव जोगेवाला, कुम्हारिया और चाहरवाला में भी कोरोना सहित बुखार, जुकाम व खांसी ने अधिकतर ग्रामीणों को जकड़ रखा है। जोगेवाला में पिछले 15 दिन से 13 मौत हो चुकी है। गांव में सरकारी रिकार्ड के मुताबिक 26 कोरोना के केस है। पिछले 15 दिन में यहां 13 लोगों की मौत हो चुकी है। मगर उनमें कोरोना के केवल 3 बताए जा रहे हैं।

इसी प्रकार गांव कुम्हारिया में 36 केस कोरोना के अब तक आ चुके हैं। पिछले 15 दिन में 10 मौत यहां भी हो चुकी है। कोरोना से 3 बताई गई है। इसके अलावा गांव चाहरवाला में 25 केस कोरोना के आए हैं। 3 की मौत हुई है। वहीं कोरोना के अलावा यहां एक ब्लैक फंगस से भी मौत है।

प्रशासन ने अभी तक कोई इलाज का प्रबंध नहीं किया

जिस प्रकार से कोरोना गांव में फैल रहा है। उसके मुताबिक प्रशासन की ओर से बरती जा रही लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। प्रशासन ने अभी तक इन गांव में कोई इलाज या जांच का प्रबंध नहीं किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें यहां नहीं पहुंची है। चौपटा में सीएचसी होने के बाद केवल खानापूर्ति है। वहां कोई जांच या इलाज नहीं हो रहा है। जिसका अंजाम ग्रामीण भुगत रहे हैं। लोगों में डर पैदा हो रहा है। आइसोलेशन वार्ड और इलाज की भी सुविधा दी है। मगर अभी तक इन गांव में ऐसा कुछ नहीं देखने को मिला है। चौपटा खंड में अभी तक सरकारी रिकार्ड मुताबिकि 1600 के करीब कोरोना के केस आए हुए हैं।

रोजाना 100 से 150 लोग इलाज करवाने के लिए आ रहे आरएमपी डॉक्टर पास

नाथूसरी कलां के आरएमपी डॉकटर भूप सिंह ने बताया कि उसके पास आसपास के कई गांव के लोग इलाज के लिए आते रहते हैं। इस कोरोनाकाल में यह संख्या 10 से 15 गुणा बढ़ गई है। गांव से आ रहे लोगों में खांसी, जुकाम और बुखार के ही लक्षण है। जब गांव के मरीजों को कोरोना टेस्ट करवाने की बात कहते हैं तो बोलते हैं सिरसा अस्पताल गए तो वापस नहीं आएंगे।

दाह संस्कार की बढ़ती संख्या के चलते क्षेत्र के ओरों पर खत्म हो गईं लकड़ियां

चौपटा इलाके के गांव कागदाना में दो आरे हैं। जहां से आसपास के गांव के लोग दाह संस्कार के समय सूखी लकड़ी लेकर जाते हैं। आरा संचालक सलीम ने बताया कि इस बार एकाएक लकड़ियों की मांग बढ़ गई है। पिछले 15 दिनों में ही इतनी लकड़ी गई है कि यहां दो आरे हैं। दोनों पर खत्म हो गई है। शहर में जाकर महंगे भाव में लकड़ी लेकर आ रहे हें। ऐसी नौबत पहले कभी नहीं आई थी।

गुडियाखेड़ा में 10 बेड लगाए गए हैं

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण एरिया में कोरोना कंट्रोल करने के लिए चौपटा खंड में 10 ऐसे गांव चुने थे। जहां कोरोना का प्रभाव अधिक है। यहां पर आइसोलेशन वार्ड बनाए जाने के आदेश थे। मगर अभी तक गांव गुडियाखेड़ा और रूपावास को छोड़ दिया जाए तो किसी भी गांव में आइसोलेशन वार्ड नहीं बनाए गए हैं। इन दोनों गांव के सरकारी स्कूल में व्यवस्था की गई है। गुडियाखेड़ा में 10 बेड लगाए गए हैं। जबकि रूपावास में 10 चारपाई लगाकर आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है।

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