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उपचुनाव की तैयारी:एक दशक पहले उपचुनाव में सीधे मुकाबले में 6227 वोट से जीत थे अभय सिंह चौटाला, इस बार मुकाबला त्रिकोणीय

सिरसा2 महीने पहले
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राजेंद्र स्कूल में दशहरा उत्सव के प्रतिभागियों को सम्मानित करता स्टाफ। - Dainik Bhaskar
राजेंद्र स्कूल में दशहरा उत्सव के प्रतिभागियों को सम्मानित करता स्टाफ।

ऐलनाबाद हलके के इतिहास में यह तीसरी दफा उपचुनाव होने जा रहा है। इससे पहले दो बार हुए उपचुनाव में एक बार इनेलो सुप्रीमो ओपी चौटाला और दूसरी बार उनके बेटे अभय जीतकर विधायक बने थे। इनेलो का गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर वर्ष 2014 से पहले की बात करे तो हमेशा से ही दो मुख्य पार्टी कांग्रेस और इनेलो के बीच मुकाबला होता आया है । मगर 2009 में भाजपा ने इनेलो से गठबंधन तोड़कर अपनी सियासी जमीन को इस हलके में मजबूत करना शुरू किया और वर्ष 2014 में होने वाले विधानसभा में कांग्रेस को पछाड़कर चुनाव में इनेलो की मुख्य प्रतिद्वंदी पार्टी के रूप में सामने आ गई ।

इस चुनाव के बाद हलके के समीकरण बदलते गए । पहले यहां दो मुख्य दल में आमने सामने की टक्कर होती थी । अब मुकाबला त्रिकोणीय होने लगा है । इस बार भी साफ दिख रहा है कि उपचुनाव में कांग्रेस भाजपा और इनेलो के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है । एक दशक पहले वर्ष 2010 में हुए उपचुनाव में अभय सिंह चौटाला चुनाव जरूर जीते थे, मगर कांग्रेस प्रत्याशी भरत सिंह बैनीवाल ने उन्हें सीधी टक्कर दे दी थी ।

2762 वोट से ही अभय सिंह चुनाव जीत पाए थे । अभय चौटाला को 64813 वोट मिले थे । जबकि भरत सिंह बैनीवाल को 58586 वोट मिले थे । ऐसे में इस बार उपचुनाव का मुकाबला इसलिए रोचक और कड़ा हो जाता है कि अबकी बार आमने सामने की बजाए मुकाबला तीन मुख्य राजनीतिक दलों में है । जहां कांग्रेस हमेशा इस हलके में मजबूत मानी जाती रही है ।

वहीं भाजपा के पास अब सता में होना बड़ा लाभ देता दिख रहा है । इसलिए इस बार उपचुनाव में एक बार फिर इनेलो के सामने कांग्रेस की चुनौती तो है ही । वहीं सत्तापक्ष बीजेपी से भी सीधे तौर पर टकराना है । सियासत के जानकार बताते हैं कि अगर आमने सामने की सीधी टक्कर होती तो अभय सिंह चौटाला के लिए यह चुनाव एक बार फिर आसान रहता । मगर त्रिकोणीय मुकाबले में उनकेे सामने चुनौती बढ़ती जा रही है । उस समय हलके में 1 लाख 44 हजार से अधिक मतदाता होते थे । जबकि अब 1 लाख 85 हजार से अधिक मतदाता है ।

15 प्रत्याशियों में 13 की हो गई थी जमानत जब्त

वर्ष 2009 में हुए विधानसभा के आम चुनाव में इनेलो सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला उचाना हलका और ऐलनाबाद हलके से एक साथ दो जगह से चुनाव लड़ा था । दोनों विधानसभा सीट से उन्हें विजय प्राप्त हुई । इसके बाद उन्होंने ऐलनाबाद की सीट खाली छोड़कर उपचुनाव में अभय चौटाला को चुनाव मैदान में उतारा था ।

इस चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था । कुल 15 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे । जिसमें से 13 की जमानत ही जब्त हो गई थी । इस बार हो रहे उपचुनाव में पहली बार से ऐलनाबाद हलके के इतिहास में सबसे अधिक 19 उम्मीदवार मैदान में है । जिसमें 12 आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

इनेलो नहीं हारी कोई चुनाव

ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र इनेलो का गढ़ रहा है। साल 1991 के बाद से यहां से इनेलो कोई चुनाव नहीं हारी है। 1991 में यहां से कांग्रेस के मनीराम केहरवाला को जीत मिली थी। उसके बाद 1996 और 2000 में इनेलो के भागीराम विधायक चुने गए। साल 2005 के चुनाव में डाॅ. सुशील इंदौरा इनेलो की ओर से विधायक बने तो 2008 के परिसीमन में यह हलका सामान्य बन गया। 2009 में ओमप्रकाश चौटाला विधायक बने।

चुनाव-दर-चुनाव की बात करें तो ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र हरियाणा गठन के बाद से ही अस्तित्व में है। साल 1967 में यहां हुए पहले सामान्य चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चौधरी देवीलाल के मंझले बेटे प्रताप सिंह चौटाला विधायक चुने गए। 1968 के विधानसभा चुनाव में विशाल हरियाणा पार्टी से लालचंद खोड ने कांग्रेस के उम्मीदवार ओमप्रकाश चौटाला को पराजित किया।

चौटाला ने इस चुनाव को अदालत में चुनौती दी और अदालत ने यह चुनाव रद्द कर दिया। 1970 में हुए उपचुनाव में चौटाला ऐलनाबाद से विधायक चुने गए। वहीं 1972 में कांग्रेस के उम्मीदवार बृजलाल गोदारा को जीत मिली। 1977 में जनता पार्टी से भागीराम विधायक बने। 1982 और 1987 में भागीराम लोकदल की टिकट पर चुनाव जीते और हैट्रिक लगाई। 1991 में कांग्रेस के उम्मीदवार मनीराम केहरवाला विधायक चुने गए थे ।

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