तुलसी की अमरगाथा’ कविता की प्रस्तुति:अणुव्रत चरित्र निर्माण की संजीवन बूटी: साध्वी

सिरसाएक महीने पहले
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आचार्य महाश्रमण की शिष्या साध्वी मंजुप्रभा के सान्निध्य में अणुव्रत समिति के तत्वावधान व तेरापंथ सभा में आचार्य तुलसी का 108वां जन्मदिन अणुव्रत दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मण्डल ने अणुव्रत गीत से किया। साध्वी जयंत प्रभा ने ‘तुलसी की अमरगाथा’ कविता की प्रस्तुति दी। साध्वी मंजुलता ने ‘तुलसी-तुलसी’ गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को संगीतमयी बनाया। मुख्य वक्ता के रूप में साध्वी गुरुयशा ने अपने विचारों की प्रस्तुति देते हुए कहा कि आचार्य तुलसी का व्यक्तित्व करूणा व अहिंसा का महासमंदर था। उनमें आकाश के समान विशालता, धरा-सी क्षमाशीलता, सागर-सी गंभीरता थी। गुरुदेव मानव जीवन केे शिल्पकार थे, आचार्य तुलसी मानवता के मसीहा थे, उन्होंने अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन करके समाज व राष्ट्र को एक अच्छा अवदान दिया।

शासनश्री साध्वी मंजुप्रभा जी ने अपने संयम-प्रदाता गुरुदेव तुलसी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की प्रस्तुति देते हुए कहा कि आचार्य तुलसी के प्रथम दर्शन ही व्यक्ति को सम्मोहित करने वाला था, उनके शरीर का हर अंग सौंदर्य से परिपूर्ण था, उनके कानों की रचना बड़ी विलक्षण थी, उनके प्रत्येक कार्य की अपनी अलग छटा थी, उनके कानों को देखकर भगवान बुद्ध की स्मृति हो जाती थी। आचार्य तुलसी स्वयं सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम् के उद्गाता थे। वे जब तक जीए, तेरापंथ धर्म संघ को ही नहीं, समूची मानवता को सत्यम्, शिवम् और सौंदर्य से परिपूर्ण करते रहे। साध्वी ने कहा कि अणुव्रत एक आदर्श और शांत जीवन जीने के लिए और चरित्र निर्माण के लिए संजीवनी बूटी का कार्य करता है। इस कार्यक्रम में शासनसेवी पद्म जैन, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष रविन्द्र गोयल एडवोकेट, महिला मण्डल की बहनें पूजा, ओमी, ज्ञानशाला की छोटी बच्ची परी नाहटा ने अपनी प्रस्तुति दी। सुमधुर गायिका आंचल गुजरानी ने ‘तुलसी की वाणी गूंजे गगन में’ सुन्दर गीत की प्रस्तुति देकर वातावरण को संगीतमयी बनाया।

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