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कोरोना का असर:बच्चों को लगी मोबाइल-इंटरनेट की लत, मनोचिकित्सक के पास राेजाना 5 से 7 आ रहीं शिकायतें

सिरसा10 दिन पहलेलेखक: पंकज धींगड़ा
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  • लगातार बिगड़ रहा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य

कोरोना के चलते लॉकडाउन के अंदर जहां बहुत सारे काम धंधे बंद हुए। बहुत से लोगों को आर्थिक नुकसान भी हुआ। वहां पर सबसे ज्यादा खामियाजा शिक्षा जगत को ही भुगतना पड़ा। ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली को जैसे-तैसे अपनाने की आवश्यकता आन पड़ी । ऑनलाइन शिक्षा पद्धति के चलते विद्यार्थियों में कई तरह की समस्याएं आने लगी, जिसके दुष्प्रभाव अब दिखाई देने लगे हैं।

बढ़ते मोबाइल का प्रयोग अब साइड इफेक्ट दिखा रहा है। बच्चे पढ़ाई करने के साथ-साथ मोबाइल पर गेम खेलते हैं, जिसका असर उनके व्यवहार पर पड़ रहा है। मनोवैज्ञानिकों के पास इसकी प्रतिदिन 5 से 7 शिकायतें आ रही हैं कि बच्चे घंटों मोबाइल पर लगे रहते हैं।

जब फोन मांगते हैं तो घर में तोड़फोड़ शुरू कर देते हैं। बच्चों का चिड़चिड़ा होना, गुस्सा, कहना न मानना, मोबाइल तोड़ना होने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. रविंद्र पुरी ने बताया कि विद्यार्थियों की समस्या इस कदर बढ़ गई है कि अब बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को लेकर उनसे सलाह देने के लिए आ रहे हैं।

उनके पास लगभग 70 से ज्यादा शिकायतें अब तक आ चुकी हैं। उन्होंने बच्चों के साथ-साथ माता-पिता की भी काउंसलिंग करके उन्हें परामर्श दिया गया है। मोबाइल के अधिक प्रयोग होने से बिहेवियर कंडक्ट डिसऑर्डर ज्यादा देखने को मिल रहा है। जिसमें बच्चे बात न मानने पर वे हिंसक होने के साथ-साथ मोबाइल तोड़ना व घर की चीजों को तोड़ने-फोड़ने लगते हैं ।

ऑनलाइन शिक्षा के कारण सभी विद्यार्थियों के हाथ में मोबाइल फोन, लैपटॉप जैसे उपकरण आ गए हैं। बहुत से अभिभावकों को इस बात का पता ही नहीं चलता है कि उनके बच्चे ऑनलाइन क्लास अटेंड कर रहे हैं या मोबाइल पर कुछ और देख रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के चलते अब दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

अभिभावकों ने बताया-इस तरह आ रही परेशानी

केस-1. 9वीं का एक छात्र मोबाइल में ऑनलाइन पढ़ाई की आड़ में ऑनलाइन गेम या अन्य प्रकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामग्री देखने की आदत लग गई। पेरेंट्स को इस बात का पता मोबाइल की हिस्ट्री देखकर पता चला। पेरेंट्स ने इस केस में मनोवैज्ञानिक की सलाह ली।

केस-2. 5वीं का एक विद्यार्थी बेहद आक्रमक वह गुस्सैल रहने लग गया। जब उसके माता-पिता ने उससे ऑनलाइन कक्षाओं के बाद फोन मांगा तो बच्चे ने गुस्से में घर का सामान इधर-उधर फेंक कर तोड़ना शुरू कर दिया। क्योंकि उसे मोबाइल पर गेम खेलने की लत लग गई थी।

पेरेंट्स की शिकायत थी कि पहले बच्चा कहना मानता था, लेकिन अब बिल्कुल नहीं मानता। केस-3 6वीं कक्षा का एक बच्चा ऑनलाइन कक्षा लगाने के साथ-साथ मोबाइल पर गेम व अन्य गलत साइट्स देखने लगा। गूगल हिस्ट्री से पता चला तो बच्चे से पूछा। पता चला कि एक दोस्त ने साइट्स के बारे में बताया था। पेरेंट्स ने जब डांट लगाई तो अग्रेसिव हो गया। जोर-जोर से रोने लगा।

मनोवैज्ञानिक डॉ. रविंद्र ने दिए कुछ टिप्स

  • कुछ माता-पिता स्वयं ही विद्यार्थियों के शिक्षकों का मजाक उड़ाते रहते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। विद्यार्थी जब ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हों तब टीचर के पढ़ाने के ढंग पर टोका टिप्पणी न करें।
  • ऑनलाइन पढ़ाई के बाद समय निकालकर अपने बच्चों को सकारात्मक व गुणात्मक समय दें। उनके साथ बातचीत कर व घर खेले जाने वाली गेम खेलकर उनके साथ इंटरएक्टिव रहने का प्रयत्न करें। क्योंकि बच्चे सारा समय घर पर रह रहे हैं और वे सभी बातें सीखते हैं जो उनके मां-बाप कर रहे होते हैं, इसलिए एक अच्छे रोल मॉडल बनें व घर में अपनी भाषा और अपने व्यवहार का विशेष ध्यान रखें और स्वयं भी मोबाइल पर कम समय लगाने का प्रयत्न करें ।
  • समय-समय पर अपने बच्चों से अचानक ही किसी बहाने से फोन मांग कर यह भी चेक करें कि उनके बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान फोन पर कोई अन्य सामग्री तो नहीं देख रहे हैं।
  • कुछ माता-पिता अपने बच्चों को सारा दिन समझाने बुझाने का काम करते रहते हैं । इसी टोका टोकी के कारण बच्चे उनसे खिन्न रहने लग जाते हैं। जबकि मां-बाप को चाहिए कि वह बच्चों को संक्षिप्त में समझाएं व हमेशा ही डांटते फटकारते न रहें।
  • मां-बाप को चाहिए कि वह अपने बच्चों को अपने रिश्तेदारों व जान पहचान वालों से भी समय-समय पर बात करवाते रहें, ताकि घर बैठे ही उनका समाजीकरण होता रहे।
  • बच्चों के घर पर रहने की स्थिति का फायदा उठाते हुए बचपन में सुनी हुई कहानियां किस्से वह अपने अनुभव उनसे सांझा करें।
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