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एडीसी ने कोविड अस्पतालों का किया निरीक्षण:बिना पूछे कर रहे सीटी स्कैन-एमआरआई, इलाज और दवाओं के लिए वसूल रहे दो गुना, बिल देने से भी इनकार

सिरसा12 दिन पहले
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शहर में निजी अस्पताल का औचक निरीक्षण कर बिल बुक जांचते एडीसी उत्तम सिंह और मरीजों के परिजनों से हालचाल जानते। - Dainik Bhaskar
शहर में निजी अस्पताल का औचक निरीक्षण कर बिल बुक जांचते एडीसी उत्तम सिंह और मरीजों के परिजनों से हालचाल जानते।
  • पूछताछ में मरीज के परिजनों ने लगाए आरोप, बोले-

जिलेेेे में जहां एक तरफ कोरोना तेजी से फैल रहा है। वहीं दूसरी तरफ इलाज के नाम पर शहर के कुछ निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के नाम पर मोटे बिल बनाने के आरोप लग रहे हैं। इसको लेकर शहर के कई अस्पतालों में मरीजों के परिजन हंगामा कर चुके हैं।

प्राइवेट अस्पतालों पर मनमर्जी के बिल बनाने और बेड चार्ज अधिक लेने के मामले मुख्यमंत्री मनोहर लाल से लेकर बिजली मंत्री रणजीत सिंह के समक्ष भी उठ चुके हैं। ऐसे में अब इसका रियलिटी चैक करने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी खासतौर पर एडीसी उत्तम सिंह एक्टिव मोड में आ गए हैं। अपने कड़े तेवर और लापरवाही के खिलाफ सख्त लहजे से पेश आने वाले एडीसी उत्तम सिंह मंगलवार को कोविड अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने निकले।

इस दौरान उन्होंने सरकारी अस्पताल सहित पांच प्राइवेट अस्पताल जांचे। जहां एडीसी को अस्पतालों की चालाकी और मनमर्जी के कई सबूत मिले हैं। जिस पर एडीसी ने अस्पताल संचालकों को कड़ी फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि जल्द से जल्द इन व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना चाहिए।

एडीसी बोले... प्रॉपर बिलबुक मेंटेन रखें और अस्पतालों में हेल्पलाइन नंबर लिखा होना चाहिए वरना होगी कार्रवाई

एडीसी उत्तम सिंह ने सोमवार को पांच निजी अस्पतालों जिसमें मेडिकेयर हॉस्पिटल, अपेक्स अस्पताल, स्वास्तिक व बिश्नोई नर्सिंग होम का निरीक्षण किया। जिसमें दो तीन अस्पतालों में सामने आया कि अस्पताल संचालक इलाज के नाम पर मोटे बिल तो बना रहे हैं, मगर अपनी कारगुजारियां छुपाने का तरीका भी नया अपना लिया है।

अब मरीजों के परिजनों से इलाज के नाम पर पैसे लिए जाते हैं, मगर उन्हें रसीद नहीं दी जा रही है। ऐसे में परिजन मरीज की हालत देखकर कोई सवाल खड़ा नहीं कर पाते। एक अस्पताल में एडीसी उत्तम सिंह व उप सिविल सर्जन डॉ. वीरेश भूषण को मरीज के परिजनों ने बताया कि साहब यहां ऑक्सीजन की तो किल्लत नहीं है।

लेकिन डॉक्टर इलाज के पैसे की रसीद नहीं देते हैं । इस पर एडीसी ने प्रॉपर बिलबुक मेनटेन रखने और अस्पतालों के रिसेप्शन में हैल्पलाइन नंबर लिखा होना चाहिए के आदेश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई मरीज या परिजन अस्पतालों में गड़बड़ी की शिकायत कर लापरवाही की जानकारी देता है, उसका नाम पता गुप्त रखा जाएगा ।

गड़बड़ी.. पुरानी रसीद बुक दिखाने पर एडीसी बोले- सुबह दोबारा जांच करने आऊंगा, यही हाल दिखा तो होगा एक्शन

अस्पताल संचालकों की मनमर्जी जांचने के लिए एडीसी ने एक अस्पताल के कैशियर से बिल बुक दिखाने को कहा। इस पर कैशियर ने चालाकी दिखाते हुए एक साल पुरानी यानि वर्ष 2020 वाली बिल बुक दिखा दी। एडीसी ने डेट देखकर कहा कि बेवकूफ समझ रखा है क्या। इस साल की बिल बुक दिखाओ।

पुरानी फैंक के मारी। डरते हुए कैशियर ने वर्ष 2021 की बिल बुक दी। उसमें भी चालाकी से बिल काटे हुए थे। आगे पीछे की रसीद खाली छोड़कर बीच में से रसीद काट रखी थी। इस पर एडीसी ने सवाल खड़े किए। आखिर में एडीसी ने अस्पताल संचालक को फटाकर लगाते हुए सब मेंटेन रखने के आदेश जारी किए।

बोले कि सुबह दोबारा जांच करने आऊंगा । अगर यही हाल दिखा, तो एक्शन लिया जाएगा । एडीसी ने मरीजों से उनका हाल-चाल पूछते हुए खाली पड़े बेड की जानकारी स्टाफ से ली। एडीसी ने यह कहते हुए आश्वस्त भी किया कि ऐसी स्थिति में जो बेहतर कार्य करेगा, उसे सम्मानित भी किया जाएगा। अस्पताल में कैसा व्यवहार किया जा रहा है, इसे सीसीटीवी कैमरे से जांचा जाएगा।

बिना डॉ.परामर्श के नहीं करानी होगी सिटी स्कैन

उप सिविल सर्जन डॉ. वीरेश भूषण ने बताया कि बिना बजह मरीजों का सिटी स्कैन और एमआरआई करके मोटा पैसा ऐंठने वाले सेंटर संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी । जिसका औचक निरीक्षण किया जाएगा । किस मरीज को कौनसी जांच करवाना जरुरी है । इसके लिए डॉक्टरों की टीम गठित की जाएगी । डॉक्टर की सलाह पर ही कोरोना आशंकित या पीडि़तों के सिटी या अतिरिक्त टेस्ट करने होंगे । अन्यथा सेंटर संचालकों की जवाबदेही होगी ।

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