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नगर परिषद चेयरपर्सन चुनाव:बीजेपी और कांग्रेस खेमे में लगाई सेंध, कांडा ने 9 पार्षदों को तोड़ पासा पलट मारी बाजी, रीना सेठी बनीं चेयरपर्सन

सिरसा4 दिन पहलेलेखक: कुलदीप शर्मा ​
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  • कांडा उम्मीदवार रीना को मिले 17 वोट तो बीजेपी उम्मीदवार सुमन बामनिया 2 वोट से हारीं

हरियाणा में मनोहर सरकार को बाहर से समर्थन कर रहे विधायक गोपाल कांडा ने सिरसा के नगरपरिषद चेयरपर्सन के चुनाव में बीजेपी को ऐसी पटखनी दी है कि स्थानीय नेताओं और पार्टी की हाईकमान सोचने पर मजबूर हो गई है। कल तक नप चुनाव में बीजेपी को समर्थन करने की बात करने वाले विधायक गोपाल कांडा ने रातों रात पलटी मारते हुए चुनाव के सारे समीकरण बदल दिए और राजनीतिक समझ रखने वालों के भी गणित फेल कर दिए।

दरअसल कांडा ने बीजेपी की ओर से उम्मीदवार बनाई गई सुमन बामनिया के खिलाफ अपनी पार्टी की पार्षद रीना सेठी को उम्मीदवार के रूप में उतार दिया। सुबह जब बीजेपी के खिलाफ कांडा को चुनाव लड़ते देखा तो सभी हैरान थे। इसी प्रकार हैरान करने वाला चुनाव परिणाम आया। कांडा की वार्ड 17 से महिला पार्षद रीना सेठी ने बीजेपी की सुमन बामनिया को दो वोट के अंतर से हरा दिया और प्रधान बन गई।

इतना ही नहीं बीजेपी पार्षद के खिलाफ खुद बीजेपी के ही पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग करके कांडा की उम्मीदवार को जिताया। यही हाल कांग्रेस पार्षदों का रहा। उनमें भी बगावत देखी गई और कांडा को वोट डाले गए। यही कारण रहा कि मात्र 8 वोट वाले कांडा ने 10 वोट वाली बीजेपी पार्षद को पटखनी देकर अपनी पार्टी की पार्षद को नप चेयरपर्सन वाली कुर्सी पर बैठा दिया। यहां बता दें कि 2016 में पहली बार बीजेपी ने चेयरपर्सन बनाई थी। 18 महीने बाद ही चेयरपर्सन के खिलाफ बीजेपी पार्षद ही अविश्वास प्रस्ताव ले आए थे।

हार का कारण: डिप्टी स्पीकर गंगवा, बीजेपी के जिलाध्यक्ष सहित वरिष्ठ नेता भी एकजुट नहीं रख पाए अपने पार्षद
बीजेपी के जिलाध्यक्ष आदित्य देवीलाल , मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी एवं वरिष्ठ नेता जगदीश चोपड़ा सहित अन्य नेताओं ने अपने पार्षदों के साथ चुनाव की रणनीति बनानी शुरू की थी। मगर 10 दिनों के दौरान भाजपा नेता चेयरपर्सन के लिए कोई भी महिला पार्षद का नाम फाइनल नहीं कर सके। जब पार्षद सुमन शर्मा की जगह सुमन बामनिया का नाम बीजेपी के एक धड़े ने आगे रखा तो इस पर कुछ पार्षदों ने नाराजगी जतानी शुरू कर दी। चुनाव होने में जब 48 घंटे बाकी रहे तो स्थानीय नेताओं ने हाथ खड़े करके उम्मीदवार चुनने के लिए बीजेपी हाईकमान के पाले में गेंद डाल दी।

चुनाव से एक दिन पहले डिप्टी स्पीकर गंगवा को सिरसा भेजा गया। पार्षदों और नेताओं से मीटिंग करके सुमन बामनिया के नाम पर सहमति तो जतवा दी । जब 7 अप्रैल को वोटिंग हुई तो बीजेपी के तीन पार्षदों ने सुमन बामनिया के खिलाफ क्रॉस वोटिंग करके कांडा की मदद कर दी। कांडा के पास खुद के वोट सहित 8 वोट थे। चुनाव के दौरान तीन बीजेपी के वोट मिले। 2 वोट कांग्रेस, एक इनेलो, दो कांग्रेस और दो आजाद पार्षदों के वोट प्राप्त करके रीना को विजयी बनाया गया। जबकि बीजेपी को सांसद दुग्गल सहित खुद के पार्षदों के 7 वोट मिले। सेतिया और कांग्रेस गुट के पार्षदों ने भी बीजेपी को वोट डाला। 1 कांग्रेस पार्षद ने बहिष्कार किया । कांग्रेस पार्षद बलजीत कौर ने चुनाव का बहिष्कार करते हुए कांग्रेस पार्षदों के ऊपर भी क्रॉस वोटिंग के आरोप जड़ते पार्टी नेताओं के समक्ष शिकायत करने की बात कही।

जीत का कारण: सुमन बामनिया को मैदान में उतारा तो बीजेपी के ही पार्षद हुए नाराज
दरअसल यह खेल उस समय शुरू हो गया था जब दो दिन से बीजेपी नेता अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर रहे थे। बीजेपी के पार्षदों में सुमन बामनिया के नाम पर सहमति नहीं थी। कुछ पार्षद किसी हालत में सुमन बामनिया को प्रधान नहीं देखना चाहते थे। यहीं कारण रहा कि कांडा ने माहौल का फायदा उठाया और बीजेपी और कांग्रेस के धड़े में रातों रात सेंध लगाकर समीकरण बदल दिए। कांडा को इनेलो और आजाद पार्षदों का भी वोट मिला है।

इससे पहले कांडा ने कहा था कि अगर वार्ड नंबर 5 की बीजेपी पार्षद सुमन शर्मा को प्रधान पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाता है तो वे उनके साथ है। अगर कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में होगा तो उस पर मंथन करेंगे। बीेजेपी यहीं मात खा गई। सुमन शर्मा की जगह सुमन बामनिया को उम्मीदवार बना दिया। जिस पर कांडा ने अपना उम्मीदवार मैदान में उतारकर विजयी बनवा दिया। इस पूरे समीकरण को भूनाने वाले विधायक गोपाल कांडा के भाई गोबिंद कांडा रहे। इस पूरे मामले में विधायक गोपाल कांडा का कहना था कि मेरा लक्ष्य सिर्फ शहर का विकास करना है।

प्रदर्शन के बीच छोड़ कर गया नेता एक घंटे बाद वापस आया तो प्रदर्शनकारी किसान भड़के
नप चुनाव में कांडा और दुग्गल का विरोध करने के लिए पहली बार किसानों के दोनों गुट एकसाथ दिखे। इसी दौरान जब किसान पुलिस के साथ धक्का मुक्की कर रहे थे। तब एक गुट का किसान नेता वहां से बीच में ही निकलकर गाड़ी लेकर दूसरी साइड चला गया। जब किसानों को पता लगा तो उन्हें लगा कि उन्हें आगे करके किसान नेता भाग गया। जब एक घंटे बाद वह वापस आया तो प्रदर्शनकारी किसान उस पर भड़क गए। आपस में किसानों को उलझते हुए देखकर वरिष्ठ किसानों ने आपस में एकजुट रहने की बात कही और समझाया।

नारेबाजी: वोट डालने आई सांसद और विधायक गोपाल का जमकर विरोध
इधर नप चुनाव में सांसद सुनीता दुग्गल और विधायक गोपाल कांडा जब वोट डालने पहुंचे तो किसानों ने जमकर बवाल काटा। भारी पुलिस सुरक्षा बल में हो रहे चुनाव के दौरान किसानों ने सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक लगातार कांडा और दुग्गल के खिलाफ नारेबाजी की। उनको वोट डालने से रोकने लिए किसानों ने चार घंटे तक पुलिस के साथ धक्कामुक्की करते हुए बैरिगेटस तोड़ डाले। किसानों को रोकने के लिए चार जगह गलियों और सड़क पर नाकाबंदी की गई थी।

किसानों ने चारों जगह ही पुलिस के साथ अलग अलग गुट में होकर धक्का मुक्की करते हुए नप कार्यालय में घुसने का प्रयास किया। मगर पुलिस के कड़ी सुरक्षा के चलते किसानों की भीड़ को डाटे रखा। इसके लिए सबसे अधिक धक्का मुक्की सिविल लाइन थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में नाकाबंदी कर रही पुलिस की टीम के साथ हुई। यहां पर महिला पुलिस और जवानों ने दंगल को डाटे रखा। महिला थाना प्रभारी डबवाली और महिला सेल अधिकारी सहित उनकी पूरी महिला फोर्स ने फ्रंट लाइन में खड़े होकर किसानों की धक्कामुक्की का जवाब दिया।

सीधी बात; रीना सेठी, नप चेयरपर्सन
Q. सिरसा नप का कार्यकाल पहले भी विवादों में रहा है आप कैसे निपटेंगी।

A. सभी पार्षदों को साथ लेकर चलूंगी। सम्मानजनक तरीके से सभी वार्ड का विकास हो यह प्राथमिकता रहेगी। इसलिए कोई विवाद नहीं होगा।

Q. चेयरपर्सनशिप में परिवारिक लोगों का हस्तक्षेप रहेगा या आप खुद आगे रहकर कार्यभार संभालेगी।
A. पढी लिखी महिला हूं और महिला भी पुरुष से कम नहीं होती। इसलिए किसी पारिवारिक सदस्य का हस्तक्षेप नहीं होगा। मैं खुद चेयरपर्सनशिप का काम करूंगी

Q. 6 महीने के कार्यकाल में आपके 6 प्रमुख काम क्या होंगे
A. मैं सबसे पहले शहर की ऑटो मार्केट को विकसित करूंगी। इसके अलावा शहर में जलभराव की समस्या को खत्म करने का प्रयास रहेगा। स्वच्छता में शहर नंबर वन आए। इसके लिए काम करूंगी वहीं नप कार्यालय में आने के बाद शहरवासियों को किसी प्रकार की परेशानी ना आए यह प्राथमिकता रहेगी। इसके अलावा अतिक्रमण हटाकर शहर को जाम मुक्त करवाना मुख्य कार्याें में शामिल रहेगा। भ्रष्टाचार खत्म किया जाएगा। शहर का विकास ही मेरा लक्ष्य रहेगा।

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