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  • If The Strike Goes On Long, The Depot Holders Will Be Given The Responsibility Of Purchase, The Temporary License Will Be Issued To The Raw Agent

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परेशानी:हड़ताल लंबी चली तो डिपो होल्डर्स को सौंपेंगे खरीद का जिम्मा, कच्चा आढ़ती को जारी होंगे टेंपरेरी लाइसेंस

सिरसा13 दिन पहले
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  • 8 मंडियों में 23 हजार 605 क्विंटल गेहूं लेकर पहुंचे 246 किसान, 2576 आढ़तियों ने बंद रखा तोल कार्य
  • डीसी ने दिए पुख्ता इंतजाम के निर्देश

गेहूं खरीद की राशि को सीधा किसानों के खाते में भेजने और अन्य शर्तों के विरोध में आढ़तियों ने मंडियों में गेहूं तोल का काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इन शर्तों के चलते खुद को असमर्थ बताया है। इधर जिला की 8 मंडियों में गुरुवार को 246 किसानों ने 23605 क्विंटल गेहूं के गेट पास कटवाए। लेकिन कोई मजदूर, एजेंसी या आढ़ती गेहूं तुलवाने नहीं पहुंचा। ऐसे में किसानों को पूरा दिन मंडियों में बिताना पड़ा। इतना ही नहीं कई मंडियों में किसान तीन दिनों से गेहूं के पास बैठे हैं, तोल नहीं लगने का कारण बारदाना नहीं होना बताया जाता है।

जबकि सरसों, जौ और अन्य प्राइवेट फसलों के खरीद का काम जारी रखा। उधर डीसी प्रदीप कुमार ने जिला आढ़ती एसोसिएशन की मार्केट कमेटी कार्यालय में मीटिंग बुलाई। मगर कोई समाधान नहीं निकला, तो डीसी ने संबंधित अधिकारियों को कच्चा आढ़ती के टेंपरेरी लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए हैं। डीसी ने कहा कि आढ़तियों की हड़ताल लंबा चलती है, तो इस दौरान किसानों को गेहूं खरीद में परेशानी न आए, पुख्ता इंतजाम किए जाएं। इस दौरान डिपो होल्डरों को खरीद का जिम्मा सौंपा जा सकता है।

59 केंद्रों पर 4 एजेंसियों कर रहीं थी खरीद कार्य

जिले में 59 खरीद केंद्रों पर चार एजेंसियों की ओर से गेहूं की खरीद का काम शुरू हो गया था। जहां तोल का काम आढ़तियों की तरफ से किया जाता रहा है। जिला में 2576 आढ़ती हैं, जिनमें 568 प्रथम कैटेगरी के आढ़ती शामिल हैं। उनमें 1180 आढ़ती केवल सिरसा शहर की मंडियों के हैं। आढ़तियों ने बताया कि केंद्र ने सरकार ने आढ़ती के खातों में आने वाली पेमेंट सीधा किसानों के खातों में भेजने का फैसला लिया है।

जबकि पोर्टल में किसानों के लिए ऑप्शन रखा गया था कि वह किसान आढ़ती के माध्यम से फसल बेचना चाहता है या सीधा। जिसमें 75 फीसदी किसानों ने आढ़ती को माध्यम चुना था। किसानों की मांगों को लेकर सरकार से बैठक हुई थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

जानिए... क्या कहना है किसानों का

दो दिनों से टोकन लेकर बैठे हैं गेहूं की ढेरी के पास

चौपटा मंडी में अपनी गेहूं की ढेरी के पास दो दिनों से टोकन लेकर बैठे किसान रोहताश कुमार, रणजीत सहारण ने बताया कि मंडी में बारदाना नहीं होना बताया जाता है। जबकि गुरुवार को आढ़तियों की हड़ताल बताया गया। ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि खेतों में कामकाज का पूरा शैड्यूल बिगड़ गया है। यह अव्यवस्था उनकी आगामी फसल के उत्पादन को भी सेधेगी। जिससे किसानों में सरकार के प्रति रोष है।

दो दिन से परेशान, साथ लेकर आए हैं बिस्तर

गांव गीगोरानी के किसान रामकुमार कासनियां ने बताया कि दो दिन से परेशान है। आज वह अपना बिस्तर साथ लेकर आएं हैं, क्योंकि चौपटा मंडी में चौकीदार नहीं है, इसलिए खुद गेहूं की रखवाली करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीद सीजन अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है, लेकिन सरकार के दावाें की पोल खुल गई है। ऐसे पुख्ता इंतजाम से जिलाभर के किसान परेशान हैं और उनमें सरकार के प्रति रोष है।

सरकार हमारी मांगें नहीं मानती तब तक मंडियों में कोई भी गेहूं का कार्य नहीं किया जाएगा- सरकारिया

दी आढ़ती एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हरदीप सिंह सरकारिया ने बताया कि हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के आह्वान पर मंडियों में गेहूं तोल का काम आढ़तियों की ओर से बंद किया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों के सभी पदाधिकारियों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर 7 अप्रैल तक सभी मांगें नहीं मानी गई, तो आढ़ती, मुनीम व मजदूर सरकार के लिए गेहूं का कार्य नहीं करेंगे। जिस पर सरकार ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया।

जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मानती तब तक मंडियों में कोई भी गेहूं का कार्य नहीं किया जाएगा। सरकार खुद अपने स्तर पर मंडी में आने वाली गेहूं की तुलाई का प्रबंध करे। क्योंकि केंद्र सरकार ने तुगलकी फरमान जारी कर आढ़तियों के खाते में आने वाली गेहूं खरीद की राशि को सीधा किसानों के खाते में भेजने का निर्णय लिया है जबकि ऑनलाइन सिस्टम में किसान के पास यह ऑप्शन रहता है कि वह आढ़ती के खाते में भी पेमेंट ट्रांसफर करवा सकता है।

आढ़तियों ने अपनी मांगों के समर्थन में गेहूं की सरकारी खरीद का कार्य ठप रखा। जिससे किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी, लेकिन जल्द सरकारी खरीद के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। अगर आढ़तियों की सरकार से बातचीत सिरे नहीं चढ़ पाई, तो डिपो होल्डराें से खरीद शुरू करवाई जाएगी। कच्चा आढ़ती के टेंपरेरी लाइसेंस जारी किए जाएंगे।'' -चरण सिंह, डीएमईओ, सिरसा।

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