पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना रिपोर्ट में गड़बड़ी:ऑनलाइन पोर्टल पर दर्शायी नॉन कोविड डेथ जबकि कोविड सेंटर में चला था मरीज का इलाज

सिरसा9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
सिरसा। कोविड रिपोर्ट को लेकर भड़के परिजनों को समझाते डॉक्टर व मौके पर पहुंची पुलिस। - Dainik Bhaskar
सिरसा। कोविड रिपोर्ट को लेकर भड़के परिजनों को समझाते डॉक्टर व मौके पर पहुंची पुलिस।
  • रिपोर्ट को लेकर प्राइवेट हॉस्पिटल में मृतक के परिजन भड़के तो डॉक्टर को बुलानी पड़ी पुलिस
  • परिजन बोले- कोर्ट जाएंगे तो डॉक्टर ने कहा-उनके हॉस्पिटल में भर्ती नहीं था पेशेंट

शहर के डबवाली रोड स्थित मेडिसिटी हॉस्पिटल में शनिवार दोपहर उस समय हंगामा हो गया, जब गांव लकड़ांवाली से परिजन कोविड पेशेंट की रिपोर्ट लेने पहुंचे। जहां स्टाफ ने उनको 20 मई (मौत के चार दिन बाद) की रिपोर्ट थमा दी। जिससे परिजन भड़क गए। उसके बाद गेट पर धरना लगाकर बैठ गए।

मामला बढ़ता देख डॉक्टर को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की मौजूदगी में एक घंटे बाद अस्पताल प्रबंधन ने उसी नाम से 12 मई की दूसरी कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट परिजनों को सौंपी है। लेकिन परिजनों ने गलत रिपोर्ट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे।

गांव लकड़ांवाली के बसंत सिंह ने बताया कि उसके पिता को मामूली बुखार आया था। 3 मई को उन्हें शहर के मेडिसिटी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां ओपीडी के बाद डॉक्टर ने उन्हें बिश्नोई मार्केट में कोविड केयर सेंटर भेज दिया। जिसमें 11 मई तक उसके पिता को आईसीयू में रखा गया। लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं आया, तो उसके बाद श्री तारा बाबा चैरीटेबल हॉस्पिटल भर्ती करवाया। वहां से भी 15 मई को डॉक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया।

घर जाने के बाद 16 मई अलसुबह उनके पिता की मौत हो गई। लेकिन उनको दी गई जांच रिपोर्ट में किसी अस्पताल में मरीज को कोरोना पॉजिटिव नहीं दिखाया गया था। इतना ही नहीं विभाग के ऑनलाइन पोर्टल में भी नॉन कोविड डेथ दर्शायी गई है। जिसको रिपोर्ट के बिना अब प्रूफ करना मुश्किल हो गया है। हालांकि कोरोना इलाज के नाम पर उनसे 4 लाख रुपये से ज्यादा राशि अस्पतालों ने वसूली है। परिजनों ने आरोप लगाया कि कुछ अस्पताल संचालकों ने आपदा को अवसर समझा। जिसका फायदा उठा मनचाहा पैसा वसूला गया है।

आशा वर्कर सर्वे के लिए पहुंची तो हुआ खुलासा

मृतक के परिजन बसंत सिंह, गुरजीत सिंह, गुरदीप सिंह ने बताया कि गांव की संबंधित आशा वर्कर ने ऑनलाइन पोर्टल पर नॉन कोविड डेथ रजिस्टर्ड करवा दी। उसे कोरोना पॉजिटिव बारे बताया गया, तो उसने मृतक पेशेंट की पॉजिटिव रिपोर्ट मांगी। लेकिन उनके पास मौजूद जांच संबंधी कागजात में ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं थी। जिसके बाद परिजन उसी मेडीसिटी अस्पताल में पहुंचे। जहां से ओपीडी के दौरान पेशेंट को कोविड सेंटर भेजा गया था।

लेकिन वहां डॉक्टर व स्टाफ ने यह कहते हुए साफ इंकार कर दिया, कि आपका मरीज हमारे पास भर्ती नहीं था। लेकिन जब परिजन हंगामा करने लगे, तो उनको 20 मई (मौत के चार दिन बाद) की रिपोर्ट थमा दी तो अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गए। परिजनों को डॉक्टर ने समझाते हुए कोविड डेथ रजिस्टर्ड करवाने का आश्वासन देकर शांत किया। लेकिन कोर्ट जाने की बात कहकर लौट गए।

मेरे हॉस्पिटल में पेशेंट 3 मई को ओपीडी में आया था। जिसके बाद परिजनों ने उसे पूनिया कोविड केयर सेंटर में भर्ती रखा। 20 मई की रिपोर्ट उसी नाम के किसी दूसरे मरीज की थी, परिजनों को 12 मई की जांच रिपोर्ट दी गई है, जो वह अपने मोबाइल में लेकर आए थे। यहां से सिर्फ उसका प्रिंट दिया गया है। लेकिन परिजनों ने हंगामा करते हुए उसके अस्पताल का गेट रोका।'' -डॉ. शेरगिल, मैडीसिटी अस्पताल, सिरसा ।

खबरें और भी हैं...