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स्वास्थ्य सुविधा:मरीजों तक पाइपलाइन से पहुंचेगी ऑक्सीजन, सिलेंडर की जरूरत नहीं जिले की आठ सीएचसी में मिलेगी सुविधा, प्लांट का भी भेजा प्रस्ताव

सिरसा6 दिन पहलेलेखक: जगसीर शर्मा
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ऑक्सीजन प्लांट के निर्माण का जायजा लेते हुए एमएस डॉ. संदीप गुप्ता। - Dainik Bhaskar
ऑक्सीजन प्लांट के निर्माण का जायजा लेते हुए एमएस डॉ. संदीप गुप्ता।
  • कोरोना की दूसरी लहर ने बरपाया कहर, एक माह में 13832 केस, 246 लोगों ने तोड़ा दम, अब पाइपलाइन से ऑक्सीजन देने की तैयारी

जिले में कोरोना संक्रमण की दोनों लहर में करीब 2 फीसदी लोग संक्रमित हुए । लेकिन इतने लोगों के लिए भी स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी साबित हुई । दूसरी लहर ने ऐसा कहर बरपाया कि जिला प्रशासन के इंतजाम फेल साबित हो गए थे । लेकिन ऐसा दोबारा न हो, इसलिए स्वास्थ्य विभाग पहले से इंतजाम में जुट गया है ।

नागरिक अस्पताल सिरसा व डबवाली में ऑक्सीजन प्लांट निर्माणाधीन हैं, जिसमें 156.28 लाख रुपये के खर्च आएगा, तो वहीं अब जिला के 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) ऐलनाबाद, रानियां, चौटाला, ओढ़ां, कालांवाली, चौपटा, माधोसिंघाना व बड़ागुढ़ा को सेंट्रल ऑक्सीजन पाइप लाइन से जोड़ा जाएगा । जिसके लिए मुख्यालय से 185.17 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं ।

यह बजट इलेक्ट्रिकल डिविजन हिसार को ट्रांसफर किया गया है । जल्द टेंडर निकाले जाएंगे और आगामी 3 माह में यह कार्य सिरे चढ़ाए जाने की उम्मीद है । जिससे मरीजों को ग्रामीण स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी । वार्ड में भर्ती मरीज तक सिलेंडर नहीं, सेंट्रल पाइपलाइन के जरिये ऑक्सीजन पहुंचेगी ।

पिछले दो माह जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा था, तो इससे मौत की तादाद ने भी रफ्तार पकड़ी थी। गांव के साथ- साथ शहरों में भी संक्रमण का दायरा बढ़ गया था। जिससे अस्पतालों में बेड फुल हो गए । गंभीर मरीज अस्पतालों के बाहर दम तोड़ते नजर आए थे, तो वहीं नागरिक अस्पताल के ट्राइज वार्ड में एक बेड पर दो से तीन मरीजों को रखना पड़ा था ।

ग्रामीण स्तर पर सीएचसी व पीएचसी में कोरोना मरीजों के इलाज का कोई खास इंतजाम नहीं था, तो जिला अस्पताल में मरीज कहीं घर से खाट लाकर इलाज करवाने को मजबूर हुए, तो कहीं स्ट्रेचरों पर मरीजों को ऑक्सीजन लगानी पड़ी थी।

ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए रात- रात भर परिजनों को जागना पड़ा था। क्योंकि दूसरी लहर में अप्रैल- मई कोरोना का पीक सीजन रहा । बीते माह जिले में सर्वाधिक 13832 केस सामने आए । जिनमें 246 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी ।

ट्रॉमा सेंटर में 10 बेड का आइसीयू वार्ड बनकर है तैयार

सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन से जोड़ने में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौटाला में 24.71 लाख, बड़ागुढ़ा में 15.53 लाख, रानियां में 15.53 लाख, माधोसिंघाना में 27.15 लाख, कालांवाली 24.71 लाख व ओढ़ां सीएचसी पर 23.24 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे । इधर नागरिक अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का कार्य एनएचएआई ने शुरु कर दिया है । जिससे प्रति मिनट एक हजार लीटर ऑक्सीजन जनरेट हो सकेगी ।

यह प्लांट ट्रेनिंग सेंटर के सामने 30 ई 50 फुट में जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। वहीं ट्रोमा सेंटर में 2 करोड़ 25 लाख रुपये खर्च से 10 बेड का आइसीयू वार्ड बनकर लगभग तैयार है । जिससे गंभीर मरीजों को अग्रोहा व रोहतक रेफर नहीं करना पड़ेगा ।

दूसरी लहर में ऐसे बढ़ा संक्रमण का दायरा

अब सुधरने लगे हालात

पिछले माह संक्रमितों का आंकड़ा सर्वाधिक 13832 तक पहुंचा और 246 की मौत हुई, तो वहीं कोरोना को मात देने वालों की तादाद 14824 तक पहुंची । जिससे रिकवरी रेट 95.84 फीसदी तक पहुंचा है, जबकि 5 मई को गिरकर 72.63 रह गया था । जून में हालात सुधरने लगे हैं, ऑक्सीजन, आइसीयू बेड काफी संख्या में खाली हो गए हैं ।

एक्सपर्ट की राय अनुसार- इन चार बिंदुओं पर पहले दिया जाता ध्यान, तो बच जाती कई जानें

1. कोरोना के लक्षणों को गंभीरता से लेते लोग : अगर शुरुआत में लोग कोरोना के लक्षणों को गंभीरता से लेते और खांसी- जुकाम या बुखार होने पर टैस्ट करवाते, तो उनको समयानुसार इलाज मिलता । फैलाव नहीं होने से कोरोना इतना कहर नहीं बरपाता।
2.समय पर पहुंचता ऑक्सीजन का कोटा तो नही मचता हड़कंप : जिले में ऑक्सीजन का कोटा प्रॉपर पहुचता, तो इतना हडकंप नहीं मचता । जिससे ऑक्सीजन की जमाखोरी नहीं होती और मरीजों को किल्लत पेश नहीं आती । 10 से 12 दिनों तक मरीजों को ऑक्सीजन की किल्लत झेलनी पड़ी ।

3. कोरोना के कहर का पहले से अंदेशा होता, तो बच सकती थी कई जानें : कोरोना के मरीजों का आंकड़ा इतना तेजी से बढ़ेगा, यह अंदेशा विभाग को नहीं था । इसलिए 51 वेंटीलेटर की व्यवस्था थी, लेकिन कोरोना के पीक सीजन में इंतजाम काफी मुश्किल हो गया ।

4. मल्टी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का स्टाफ होने से रेफर नहीं करने पड़ते मरीज : जिला स्वास्थ्य विभाग के पास मल्टी स्पेशलिस्ट डॉक्टर व स्टाफ नहीं था । यह होता, तो सीरियस मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ता, यहीं उनकी जान बचाई जा सकती थी । निजी अस्पतालों का खर्च भी गरीब परिवारों को नहीं चुकाना पड़ता ।

नागरिक अस्पताल सिरसा व डबवाली के बाद अब जिले की 8 सीएचसी को सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन से जोड़ा जाएगा, । तीन माह में काम सिरे चढ़ाये जाने की उम्मीद है । '' -डॉ. बांसल, सिविल सर्जन ​​​​​​​

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