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गेहूं घाेटाला व फर्जी डिपो दिलाने का मामला:गेहूं घाेटाले का मुख्य राजदार व साहुवाला प्रथम में फर्जी डिपो दिलाने वाले को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत, पुलिस करवाएगी खारिज

सिरसा4 दिन पहले
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  • 14 सितंबर को पुलिस करेगी हाईकोर्ट में जवाब दाखिल, जसवंत की गिरफ्तारी को कर चुकी थी सीआईए छापेमारी

15 हजार क्विंटल गेहूं घोटाले के मुख्य राजदार और गांव साहुवाला प्रथम में फर्जी डिपो दिलाने वाले तत्कालीन डीएफएससी के सरकारी चालक जसवंत को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही थी। मगर वह हाथ नहीं आया था। अब जसवंत सिंह ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत लेकर एक बारगी अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगवा ली है।

हाईकोर्ट ने इस संबंध में सिरसा पुलिस से जवाब मांगा है कि चालक जसवंत की गिरफ्तारी क्यों जरूरी है। अब इस संबंध में पुलिस अपना जवाब तैयार करवा रही है। वह 14 सिंतबर को हाईकोर्ट में दाखिल करेगी और अग्रिम जमानत खारिज करवाने का प्रयास करेगी। पुलिस के मुताबिक जसवंत सिंह घोटाले में शामिल डीएफएससी का चालक रहा है। इसलिए उसे इस घोटाले संबंधी पूरी जानकारी थी। वह खुद इसमें शामिल था। डिपू होल्डरों से पैसे वसूली तक करता था ।

इतना ही नहीं वह डीएफएससी से मिलकर फर्जी डिपू तक गांव में चलवा चुका है। जसवंत की मिलीभगत के बारे में गिरफ्तार हो चुके एक डीएफएससी ने भी रिमांड के दौरान स्वीकार कर रखा है कि वह ही इस मामले का मुख्य राजदार है। जसवंत के पास इस मामले की पूरी जानकारी है। वह खुद इस मामले में शामिल रहा है। इसलिए पुलिस उसको गिरफ्तार करके पूछताछ करना चाहती है। सीआईए इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि आरोपी जसवंत को अग्रिम जमानत मिली है। वह इस घोटाले का मुख्य आरोपियों में से एक है।

जानिए...दो लाख लेकर दिलाया था साहुवाला में फर्जी डिपो

खाद्य आपूर्ति विभाग कार्यालय की ओर से गांव साहूवाला प्रथम में फर्जी डिपू मामले की जांच तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर केके बिश्नोई ने खुद आकर की थी। हिसार निवासी आरोपी के इस मामल में बयान दर्ज किए गए थे। जिसमें उसने स्वीकार किया है कि उसकी मुलाकात सरकारी ड्राइवर जसवंत से हुई थी। डिपू दिलाने की एवज में उसने किश्तों में दो लाख रुपये लिए थे। फिर उसे डिपू का लाइसेंस दे दिया। फिर सीआईए पुलिस ने जांच की तो हुआ खुलासा 15 हजार क्विंटल गेहूं घोटाले में शामिल 58 डिपू होल्डरों में यह साहूवाला का फर्जी डिपू धारक भी शामिल हैं।

जानिए... डीएफएससी राजेश ने कबूला था जसवंत का नाम

इस मामले में तत्काली डीएफएससी राजेश ने पांच दिन के पुलिस रिमांड के दौरान कबूल किया था कि सरकारी ड्राइवर जसवंत और हिसार का एएफएसओ सुरेंद्र सहित कुछ डिपू होल्डर इस मामले में शामिल हैं। सीआईए पुलिस की एक टीम ने उसी समय सरकारी डीएफएससी के ड्राइवर जसवंत की गिरफ्तारी के लिए पानीपत में छापेमारी करने गई थी। मगर आरोपी फरार मिला था। इनकी प्रोपर्टी की डिटेल भी पुलिस मांग रही है। यहां बता दें कि इस मामले में चार डीएफएससी और 58 डिपू होल्डरों सहित एक दर्जन विभाग के कर्मचारी अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं।

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