मुंडका अग्निकांड:बिना फायर एनओसी के भवन में चल रही थी कई कंपनियां, बिल्डिंग मालिक फरार

बहादुरगढ़/मुंडका8 दिन पहले
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घटना स्थल पर अपनों को तलाशते हुए परिवार के लोग। - Dainik Bhaskar
घटना स्थल पर अपनों को तलाशते हुए परिवार के लोग।

दिल्ली में मेट्रो स्टेशन के पास शुक्रवार शाम चार मंजिला बिल्डिंग हुए अग्निकांड हादसे के पीछे इमारत की सुरक्षा को लेकर जांच में ढेरों लापरवाही सामने आएगी, लेकिन वर्तमान में आग लगने के बाद 12 वे गलतियां सामने आई हैं, जिस कारण 27 लोग जिंदा जल गए। छह शवों की पहचान कर ली गई है। 29 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिसमें 24 महिलाएं व 5 पुरुष शामिल हैं। इनकी पहचान को लेकर कोई ठोस जानकारी अभी प्रशासन के पास नहीं है।

पुलिस सभी शवों की पहचान के लिए प्रयास कर रही है। इस बारे में दिल्ली के अलावा आसपास के सभी जिलों को जानकारी दे दी है, ताकि जल्द से जल्द शवों की पहचान हो जाए। पुलिस के अनुसार, 27 मृतकों में जिन छह शवों की पहचान हुई है उनमें तानिया भूषण, मोहिनी पाल, यशोदा देवी, रंजू देवी, विशाल मिथलेश और दृष्टि है। अन्य शवों के शिनाख्त की कोशिश की जा रही है। डीएनए की जांच के बाद मृतकों की पहचान होगी।

अग्निशमन विभाग के निदेशक अतुल गर्ग का कहना है कि 32 लोगों के लापता होने की बात भी सामने आई है। पर अब तक 27 शव बरामद हुए हैं, जिनमें छह की पहचान कर ली है। हादसे में 12 लोग घायल हैं। अग्निशमन को पहली काल 4 बजकर 50 मिनट पर मिली थी। आग लगने का कारण जेनरेटर में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है, जो बिल्डिंग के पहले तल पर रखा था। अब तक जांच में पता चला कि बिना फायर एनओसी के भवन में कई कंपनियां चलाई जा रही थी।

बिल्डिंग मालिक मनीष लाकड़ा फरार है। कंपनी मालिक गोयल बंधुओं को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में आईपीसी की धारा 304, 308 120बी और 34 का मुकदमा दर्ज किया है। यह सेक्शन गैर इरादतन हत्या, गैर इरादतन हत्या की कोशिश, आपराधिक षड्यंत्र और कॉमन इंटेंशन के हैं।

हादसे में जिंदा जलने वाले 27 लोगों में अब तक छह की पहचान हुई, 29 लापता

घायलों को 50-50 हजार का मुआवजा मिलेगा बाहरी जिले के डीसीपी समीर शर्मा ने बताया कि मुंडका में बचाव अभियान अब चल रहा है। अब तक 27 शव निकाले जा चुके हैं। 27 में से 25 शवों की पहचान अब तक नहीं हुई है। अज्ञात शवों की पहचान डीएनए सैंपल के माध्यम से की जाएगी। सीएम अरविंद केजरीवाल घटनास्थल पर पहुंचे थे। सीएम ने इसे दर्दनाक हादसा बताया। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वालों लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। घायलों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

सीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के दिए आदेश: सीएम ने कहा कि हादसे में गायब हुए लोगों का पता लगाने के लिए घटनास्थल से मिले शवों के डीएनए से मिलान किया जाएगा। सीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के भी आदेश दिए हैं। सीएम ने कहा कि एफएसएल के जरिए कौन सी बॉडी किस फैमिली की है, इसका पता लगाया जाएगा। घायल व मृतकों के स्वजनों से मिलने के लिए शनिवार को सांसद हंसराज हंस संजय गांधी अस्पताल पहुंचे। पश्चिमी दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों व पीड़ित लोगों से बातचीत की। इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक प्रकट किया। सांसद प्रवेश वर्मा मुंडका गांव के ही रहने वाले हैं।

लापता हुए लोगों के नाम, पहचान करें

  • .गीता चौहान (45) पत्नी राजभवन
  • .सोनम (20) भाई अनुराग
  • .आशा (30) भाई वीरपाल
  • .सोनी कुमारी (35) पत्नी मनोज ठाकुर
  • .तानिया (27) पुत्री चंद्र भूषण
  • .नरेंद्र (26) पुत्र कन्हैया लाल
  • .मोहिनी (38) पत्नी विजय पाल
  • .पूजा (19 वर्ष) पुत्री राजेश
  • .भारती देवी (42) पत्नी चमन
  • .गीता देवी (42) पत्नी उपेंद्र सिंह
  • .कैलाश जानी (55) पुत्र बहादुर सिंह
  • .प्रवीन (33) पुत्र आशाराम
  • .पूजा (19) बहन मोनी
  • .मोहिनी (40) मां पीयूष
  • .मधु (21) पुत्री राकेश
  • .पूनम (19 वर्ष) पुत्री महिपाल
  • .प्रीति (24) पुत्री महिपाल
  • .निशा कुमारी (18 वर्ष) चाचा सुमन
  • .विशाल (24) पुत्र मिथलेश
  • .मधु (24) चाचा अकन
  • .अमित जानी (34) पुत्र कैलाश जानी
  • .मधु देवी (29) पत्नी अमित कुमार
  • .मोनिका (21) पुत्री विजय बहादुर
  • .यशोदा देवी (35) पत्नी विश्वजीत
  • .मुस्कान (22) पुत्री इस्लामुद्दीन
  • .स्वीटी (32) पत्नी मनोज कुमार
  • .भारती नेगी (45) बहन वीरेंद्र नेगी
  • .रंजू देवी (32) देवर राजकुमार
  • .जशोदा देवी (34) पड़ोसी रवि कुमार

जानिए... वो 10 लापरवाही जिसके कारण 27 जिंदगी जल गईं

1. भवन के मालिक मनीष लाकड़ा की गंभीर लापरवाही जो मनीष तीसरी मंजिल पर रहता था। 2. ग्राउंड फ्लोर पर दो महीने पहले ही लकड़ी का गोदाम किराए पर दिया था, उसके लेबर ऊपर वाली मंजिल पर ना आए, इसलिए पीछे की सीढ़ियों को बंद कर दिया था। 3. आग लगी तो एंट्री और एग्जिट का एक ही रास्ता बचा था पर गार्ड ने नीचे का सामान आग से बचाने के लिए ग्राउंड की सीढ़ियों को गेट बंद कर दिया। 4...आग बाहर जाने गेट की सीढ़ियों से लगनी शुरू हुई थी और सीढ़ियों पर ही कंपनी ने अपने सीसी टीवी के पैक किए हुए बड़े बड़े डिब्बे रखे थे, जो तुरन्त ग पकड़ गए। 5. फैक्ट्री में काम करने वाले सभी वर्कर्स का मोबाइल ड्यूटी शुरू होने से पहले काउंटर पर जमा करा लिया था। 6. भवन मालिक ने फायर विभाग से एनओसी भी नहीं ली व यहां चल रही कंपनियों ने अपने स्तर पर भी कोई व्यवस्था नहीं की थी 7. मोटिवेशनल स्पीच मेंं बैठे लोगों को बाहर जाने का रास्ता तक भी पता नहीं था। 8. एक छोटी बिल्डिंग में बिना एनओसी छोटी सी जगह पर 200 से ज्यादा लोगों को एक साथ बैठना एक बड़ी गलती सिद्ध हुई। 9. आग भड़कने के बाद दिल्ली फायर सर्विस की गाड़ियां डेढ़ घंटे बाद पहुंची व पहले केवल पांच गाड़ियां पहुंची। 10. नजफगढ़ कापसहेड़ा टिकरी बॉर्डर के फायर स्टेशन से गाड़ियां 4,5,6 किलोमीटर के दायरे में आ सकती थी। 11. अनजाने में एक बड़ी गलती हुई जब बिल्डिंग के शीशे क्रेन द्वारा तोड़े जाने पर हवा अंदर दाखिल हुई तो एकाएक आग की लपटें भड़क गई। 12. शीशे तोड़ने से पहले धुएं से बचकर लोग सीढी और क्रेन की मदद से निकल रहे थे, एकाएक आग भड़कने से रेस्क्यू बंद हो गया।

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