अगले माह शुरू होगा साइबर क्राइम थाना:साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायतें होंगी दर्ज, जल्द ट्रेस होंगे केस

कैथल2 महीने पहले
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जिले में अगले महीने तक साइबर थाना शुरू हो जाएगा। एसएचओ के तौर पर इंस्पेक्टर सोमबीर को नियुक्त किया गया है। थाना खोलने के लिए जगह तलाशी जा रही है। अभी थाना सिविल लाइन में साइबर क्राइम पुलिस चौकी चल रही है। थाना खुलने के बाद साइबर क्राइम से जुड़े केस साइबर क्राइम थाना में दर्ज करवाए जा सकेंगे। साइबर अपराध के लिए अलग से थाना खुल जाने के बाद जनता को केस दर्ज करवाने के लिए लंबे समय तक नहीं भटकना पड़ेगा। क्योंकि अभी साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद पुलिस पहले जांच करती है और फिर केस दर्ज होता है। इस प्रक्रिया में कई बार महीनों को समय लग जाता है। विशेष थाना खुल जाने के बाद केस दर्ज होने में तेजी आएगी। साइबर अपराध के लिए अलग से स्टाफ नियुक्त होने के बाद केस भी जल्द ट्रेस होंगे।

बैंक खाते से कट गए रुपए गांव हाबड़ी निवासी जितेंद्र ने बताया कि पूंडरी के एक बैंक में उसका खाता है। उसके बैंक खाते से 3 बार में 71 हजार 236 रुपए कट गए। उसे रुपए की जरुरत पड़ी तो वह बैंक में गया, तब पता चला कि उसके खाते से रुपए कट चुके हैं। पूंडरी थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। गांव काकौत निवासी आकाश ने बताया कि जेस्ट मनी एप में उसका एकाउंट है। उसके पास अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को कस्टर केयर एजेंट बताकर ओटीपी ले लिया। जिसके बाद एकाउंट से अमेजॉन गिफ्ट कार्ड बनाकर अमेजॉन पर उनका प्रयोग किया गया। उसके साथ 71 हजार रुपए की धोखाधड़ी हुई है। तितरम थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया है।

इस प्रकार हो रही है साइबर ठगी {बैंक अधिकारी बनकर एटीएम नंबर व ओटीपी पूछकर। {ओएलएक्स पर समान बेचने के नाम पर। {लक्की ड्रा निकालने का नाम लेकर। {फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर दोस्तों व रिश्तेदारों को इमरजेंसी हेल्प के नाम पर मैसेज भेजकर। {वाट्सएप पर लिंक भेजकर, जिससे मोबाइल हैक हो जाता है। {कोरोना वैक्सीनेशन का टीकाकरण कराने के नाम पर ओटीपी पूछकर। {सरकार की योजना बताकर लोगों के खाते से रुपये निकालते हैं। {आढ़ती बनकर किसानों के खाते में रुपये डालने के नाम पर। {गूगल-पे व भीम एप पर रुपए का मैसेज भेजकर उनके खाते से रुपये निकालते हैं। {एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार कर।

खुद को ऐसे बचाएं साइबर क्राइम से {अपने बैंक अकाउंट की जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। {एटीएम में जाकर किसी को अपना पिन कोड न बताएं और न ही किसी से रुपए निकलवाने की सहायता लें। {यदि बैंक अधिकारी बनकर कोई फोन करता है तो उसे कोई जानकारी न दें। {मोबाइल में भी बैंक संबंधी कोई जानकारी न रखें। {अपना ओटीपी कोड भी शेयर न करें। {सिक्योर एप का प्रयोग करें, क्योंकि इन एप के कारण भी जानकारी लीक होती है। {पासवर्ड में स्पेशल कैरेक्टर का प्रयोग कर स्ट्रोंग पासवर्ड रखें और समय-समय पर बदलते रहें। {फेसबुक, वाट्सएप आदि पर आने वाले केबीसी व लक्की ड्रा के मैसेज के लिंक पर क्लिक न करें। {ऑनलाइन खरीदारी में हमेशा कैश ऑन डिलीवरी पेमेंट करने का ऑप्शन चुनें। {बैंक खातों में होने वाली समस्याओं को उनकी ही वेबसाइट से हल करें। {कंपनी की वेबसाइट पर दिए गए नंबर से ही कस्टमर केयर से संपर्क करें। {लुभावने लिंक को खोलने से हमेशा बचना चाहिए। {ऑनलाइन खरीदारी के वक्त उसी साइट का इस्तेमाल करें, जिसके बारे में आप जानते हैं। {खाते से लगातार पैसे कट रहे हैं तो कार्ड को तुरंत ब्लॉक करवाएं। {सरकार की योजना के नाम पर किसी से ओटीपी शेयर ना करें।

इन जगहों से चलता है साइबर ठगों का खेल साइबर ठगी का खेल हरियाणा में मेवात के खेतों से और झारखंड के जामताड़ा के जंगल, राजस्थान के भरतपुर के अलावा अलवर के कुछ कस्बों व गांवों से चलता है। पुलिस की जांच भटकाने के लिए साइबर ठग अलग-अलग शहरों समेत दिल्ली के बैंक खाते और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस जब ठगों के नंबरों को खंगाल कर उक्त जगहों पर पहुंचती है तो ग्रामीण आरोपियों को पहले ही भगा देते हैं और उनके पक्ष में खड़े हो जाते हैं।

थाना के लिए जगह की तलाश की जा रही है। जुलाई माह तक थाना शुरू हो जाएगा। साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस द्वारा समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जाती है। जिसका पालन करके साइबर ठगी से बचा जा सकता है। इंस्पेक्टर सोमबीर सांगवान, एसएचओ साइबर क्राइम थाना।

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