जिले में एक लाख से अधिक कट्टों की आवक:किसान सोच-समझ कर लाएं मंडियों में धान आज से आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

कैथल7 दिन पहले
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नई अनाज मंडी में पहुंची हुई धान को तोलते मजदूर।  - Dainik Bhaskar
नई अनाज मंडी में पहुंची हुई धान को तोलते मजदूर। 

अनाज मंडियों में धान की आवक प्रतिदिन तेज हो रही है। मौसम बार-बार बदल रहा है। ऐसे में जहां फसल पक चुकी है, वहां से किसान जल्द मंडियों में धान लेकर आ रहे हैं, ताकि उन्हें अच्छा दाम मिले। लेकिन सोमवार से प्रदेशभर के आढ़ती मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। उधर, भाकियू का कहना है कि ये मामला आढ़ती और सरकार के बीच, किसानों को परेशानी नहीं आनी चाहिए। सरकार अपने स्तर पर खरीद का प्रबंध तुरंत करे। जिला मंडी प्रधान अश्विनी शोरेवाला ने बताया कि सोमवार से मंडी में आढ़तियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी।

सभी आढ़ती मार्केट कमेटी में धरना देंगे और मांगों का ज्ञापन भी अधिकारियों को देंगे। आढ़ती इस दौरान मंडी में खरीद प्रक्रिया में कोई सहयोग नहीं करेंगे। इस दौरान न फसल खरीदी जाएगी और न ही भराई व तुलाई की जाएगी। उनकी मांग है कि आढ़तियों को फसल खरीद पर 2.5 प्रतिशत आढ़त मिलनी चाहिए।

फसल की पेमेंट किसान से पूछकर देने की मांग की है कि किसान आढ़ती के माध्यम से लेना चाहता है या सीधा मिलर से। ई-नेम पोर्टल प्रक्रिया को बंद किया जाए। सीमांत किसानों की फसल उनके आसपास की हरियाणा मंडियों में ही बिकनी चाहिए। हरियाणा राज्य में एमएसपी से अलग बिकने वाले माल पर मार्केट फीस व एचआरडीएफ एक प्रतिशत होनी चाहिए। साथ ही मंडियों में एक दुकान पर 4 से 5 लाइसेंस जारी करने की मांग व्यापारी कर रहे हैं।

जिले में 7 मंडियां संचालित
इस समय जिले में 7 मंडियां संचालित हैं, जिनमें प्रतिदिन 1 लाख से अधिक धान के बैग की आवक है। सबसे ज्यादा आवक कैथल और चीका अनाज मंडी में है। कैथल अनाज मंडी में ही प्रतिदिन 30 से 35 हजार कट्टे धान पहुंच रही है। इसमें 95 प्रतिशत 1509 किस्म की धान है। पीआर धान की आवक फिलहाल बहुत कम है। अब तक मंडी में सवा 2 लाख कट्टे से अधिक की आवक हो चुकी है।

औने-पौने दाम पर फसल नहीं बिकने देंगे: विक्रम कसाना
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने कहा कि जब भी मंडियों में फसल आने का समय होता है, तब ही आढ़तियों को हड़ताल की याद आती है, ताकि फसलों को औने-पौने दाम पर आढ़ती, राइस मिलर खरीद सकें। लेकिन वे ऐसा होने नहीं देंगे। हड़ताल का मामला आढ़तियों और सरकार के बीच का है। सरकार को चाहिए कि धान की फसल को मार्केट कमेटी या फिर राइस मिलर के माध्यम से खरीद का प्रबंध करवाएं, ताकि किसानों को धान बेचने में परेशानी न हो। वहीं उनकी मांग है कि सरकार तुरंत सरकारी खरीद शुरू की जाए।

मौसम भी बन रहा परेशानी
धान की लगभग फसल तैयार हैं। ऐसे में मौसम और आढ़तियों की हड़ताल ने किसानों की चिंता बढ़ा रही है। कृषि मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि प्रदेश में 21 सितंबर तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। बीच-बीच में बादलवाई और हवाएं चलने की संभावना है। अभी 2 दिन पहले ही बरसात हुई है जिस कारण धान की आवक में ब्रेक लग गया था। अब मौसम साफ हुआ तो फिर से किसान कटाई में जुट गए हैं।

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