4 शुभ योगों में मनाई जाएगी बसंत पंचमी:विशेष मुहूर्त सुबह 7:07 से दोपहर 12:15 बजे तक रहेगा

पूंडरी14 दिन पहले
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इस साल बसंत पंचमी के साथ गणतंत्र दिवस होने से इस दिन 26 जनवरी की महत्ता बढ़ गई है। माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।

बसंत ऋतु का आरंभ होता है और सर्दी धीरे-धीरे कम होने लगती है। बसंत पंचमी पर स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थानों में मां शारदे का विधि-विधान के साथ पूजन होता है। श्री शिव-शक्ति अनुसंधान केंद्र फरल के संचालक आचार्य जेपी कौशिक ने बताया कि इस वर्ष पंचमी तिथि का उदय 25 जनवरी को दोपहर 12.38 बजे से प्रारंभ हो जाएगा, जो अगले दिन 26 जनवरी प्रात 10.38 बजे तक रहेगा।

उदय तिथि (सूर्योदय) में ही पंचमी मनाना शास्त्रसम्मत है। पंचमी तिथि का सूर्योदय 26 जनवरी को होगा। इस दिन उत्तरा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र होने से छत्र और मित्र नाम के दो शुभ और शिव और सिद्ध नाम के दो अन्य योग भी होंगे। इस प्रकार बसंत पर 4 शुभ योग बन रहे हैं। इससे बसंत पंचमी का विशेष महत्व है।

इस दिन ये करें:

शिक्षा, कला व साहित्य से जुड़े लोग शुभ फल पाने के लिए पीले फूल, हल्दी, पीले वस्त्र, पीली मिठाई व हल्दी की माला आदि पीले चीजों से मां सरस्वती का पूजन करें। मां शारदे के चरणों में पेन, पेंसिल, स्टेशनरी का सामान रखकर उन्हें आशीर्वाद के रूप में उपयोग में लाएं। गुरुओं व अपने माता-पिता का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। इस दिन मांस, मदिरा व तामसिक वस्तुओं का सेवन कतई न करें।

जमकर बजेगा बैंड-बाजा:

बसंत पंचमी पर्व पर अबूझ मुहूर्त होने के कारण खूब बैंड बाजा बजेगा। 26 जनवरी को बसंत पंचमी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मां सरस्वती श्वेत कमल पर विराजमान होकर हाथों में वीणा और पुस्तक लेकर प्रकट हुई थीं। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, भवन निर्माण और सभी मांगलिक कार्य किए जाते हैं। इसलिए शादी-विवाह के लिए इसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। इसके बाद 29 जून तक देवशयनी एकादशी तक लगातार शादी के मुहूर्त हैं। 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास के दौरान एक बार फिर शादी-विवाह पर रोक लग जाएगी। 1 अप्रैल से 3 मई तक देव गुरु बृहस्पति भी अस्त रहेंगे।

बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त...

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.12 से 12.55 तक। विजय मुहूर्त दोपहर 02.21 से 03.04 बजे तक। अमृत काल दोपहर 02.22 से 03.54 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त शाम 05.52 से 06.19 बजे तक रहेगा। विशेष मुहूर्त प्रात 7.07 से दोपहर 12.15 बजे तक। ज्योतिषीय दृष्टि से कला, शिक्षा व साहित्य से जुड़े लोगों और विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी खास है।

इस बार बसंत पंचमी गुरुवार है। गुरुवार का दिन देव गुरु बृहस्पति का होता है। देवगुरु बृहस्पति ज्ञान के कारक हैं। विशेष संयोग है कि इस दिन देव गुरु बृहस्पति अपने मित्र चंद्रमा के साथ अपनी ही राशि मीन में गजकेसरी योग का निर्माण भारत की कुंडली में कर रहे हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण इस बार की पंचमी देश के लिए विशेष फल देने वाली रहेगी। देश निश्चित रूप से सुख, शांति व संपन्नता की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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