मेला आयोजित करने की मांग:फरल के ग्रामीणों ने सरकार से की श्री फल्गु तीर्थ पर मेले के आयोजन की मांग

पूंडरीएक महीने पहले
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गांव फरल के ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन से इस वर्ष श्री फल्गु तीर्थ पर मेला आयोजित करने की मांग उठाई है। प्राचीन व ऐतिहासिक श्री फल्गु तीर्थ पर श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को 16 श्राद्धों में मेले का आयोजन किया जाता है, क्योंकि इन दिनों में देश व विदेश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु तीर्थ में स्नान व पितरों के नियमित पिंडदान करवाने के लिए पहुंचते है। अश्वनि मास में जब भी सोमवती अमावस्या आती है, चाहे वह कितने वर्ष के बाद क्यों न आए मेले का आयोजन होता है।

इससे पहले भी वर्ष 2018 में मेले का आयोजन हुआ था। इस वर्ष 26 सितंबर को भी थोड़े से समय के लिए अमावस्या आ रही है। जो 25 सितंबर दिन रविवार को सुबह 3.14 बजे से शुरू होकर 26 सितंबर दिन सोमवार को सुबह 3.26 बजे पर समाप्त होगी, जबकि पहला श्राद्ध पूर्णिमा का 10 सितंबर को होगा। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि श्राद्ध पक्ष में ही अमावस्या सोमवार में आ रही है, जिसके चलते दूर-दूर से श्रद्धालु तीर्थ में पूजा पाठ और श्राद्ध करने के लिए पहुंचेंगे। ग्रामीण भीमसेन, रामफल, विक्रम सिंह, बजेंद्र सिंह व विक्की राणा ने बताया कि मेले के दौरान ही अति प्राचीन तीर्थ श्री फल्गु तीर्थ के विकास की तरफ ध्यान दिया जाता है।

इसके अतिरिक्त प्रशासन व सरकार का इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं होता है। इसके बाद सोमवती अमावस्या वर्ष 2028 में आने वाली है। इसके अलावा गांव के युवाओं द्वारा बनाई गई श्री फल्गु तीर्थ विकास समिति द्वारा ही तीर्थ पर साफ-सफाई और रखरखाव का कार्य किया जाता है। जिस वर्ष भी मेले का आयोजन किया जाता है तो कई महीने पहले उसकी तैयारियां शुरू कर दी जाती है। ग्रामीणों ने हलका विधायक रणधीर गोलन से भी मेले का आयोजन करवाने की मांग की है।

3.50 करोड़ खर्चने के बाद भी अधूरा है विस्तारक तीर्थ निमार्णधीन विस्तारक फल्गु तीर्थ कार्य लगभग 3.50 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है। विस्तारक तीर्थ में गंदा पानी एकत्रित होकर उसमें घास-फूंस फैल गई है। तीर्थ पर बनाए गए घाट, सीढ़ियां व आधे पर बने प्लेट फार्म भी उखड़ना शुरू हो चुके हैं। तीर्थ में अभी तक साफ पानी का डालने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं कि गई है। तीर्थ कमेटी द्वारा ही जुगाड़ लगाकर विस्तारक तीर्थ में पानी डाला जाता है।

वर्ष 2012 में लगे फल्गु तीर्थ मेले के दौरान ग्रामीणों और फल्गु तीर्थ कमेटी की मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा1 ने तीर्थ दौरे के दौरान विस्तारक तीर्थ बनाने की घोषणा करते हुए 1.25 करोड़ रुपए मंजूर किया था। जिसमें से सिर्फ तीर्थ बनाने के लिए खुदाई ही हो पाई। उसके बाद वर्ष 2015 में आयोजित फल्गु तीर्थ मेले के दौरान सीएम मनोहरलाल ने लगभग 2.25 करोड़ रुपए मंजूर किया। जिसमें से तीर्थ के घाट पक्के किए गए और आधे तीर्थ के प्लेट फार्म पर लाल पत्थर लगाया गया।

महाभारतकाल से भी जूड़ी हुआ है तीर्थ का इतिहास श्री फल्गु तीर्थ का उल्लेख वामन पुराण, महाभारत के वन पर्व में भी आता है। कहा जाता है कि पांडवों ने युद्ध के बाद अपने पूर्वजों व सगे-सबंधियों की आत्मिक शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए श्री फल्गु तीर्थ पर पिंडदान आदि कर्म करवाया था। गांव के बुजुर्ग पंडित बारू राम, राजाराम, लहना सिंह व भरथु सिंह बताते है कि तीर्थ पर एक प्राचीन वट वृक्ष भी खड़ा हुआ है, जो कि महाभारत कालीन है, जो महाभारत युद्ध का साक्षी है। तीर्थ की खुदाई के दौरान भी अति प्राचीन मूर्तियां व अन्य सामान निकलना था। जिसके बारे में पुरात्तव विभाग कुरुक्षेत्र के अधिकारियों ने बताया था कि कुछ अवशेष तो हड़प्पा संस्कृति से जूड़े हुए थे और कुछ मूर्तियां हजारों वर्ष पुरानी थी।

मेले के आयोजन को लेकर उन्हें पूर्ण जानकारी नहीं है। धार्मिक आयोजन करवाने के लिए उच्चस्तर पर सलाह मुशवरा होता है। वे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में ये बात जरूर देंगे कि इस बार 26 सितंबर को भी श्राद्ध पक्ष में सोमवती अमावस्या आ रही है। सरकार के जैसे आदेश होंगे उसके अनुसार कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। श्यामलाल, बीडीपीओ ढांड।

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